एनडीए शासन के 12 साल: भारत मंडपम में आज बड़ी बैठक, मोदी के ऐतिहासिक कार्यकाल रिकॉर्ड पर प्रस्ताव संभव
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) 10 जून 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित कर रहा है, जो केंद्र में एनडीए सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में बुलाई गई है। इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ-साथ गठबंधन के सभी प्रमुख नेता, 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री व उपमुख्यमंत्री शामिल होंगे।
मुख्य घटनाक्रम
सूत्रों के अनुसार, बैठक के दौरान एनडीए एक विशेष प्रस्ताव पारित कर सकता है जिसमें प्रधानमंत्री मोदी को एक ऐतिहासिक उपलब्धि पर बधाई दी जाएगी। 10 जून को मोदी ने चुने हुए प्रधानमंत्री के रूप में भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के 4,399 दिनों के कार्यकाल का रिकॉर्ड तोड़ दिया।
गौरतलब है कि इस तुलना में नेहरू के 1952 से शुरू हुए कार्यकाल को आधार माना गया है, क्योंकि 1947 से 1952 के बीच वे पहले आम चुनाव से पूर्व अंतरिम सरकार के प्रमुख थे। इस प्रकार मोदी भारत के इतिहास में सबसे लंबे समय तक लगातार सेवा करने वाले चुने हुए प्रधानमंत्री बन गए हैं।
इंदिरा गांधी से तुलना का संदर्भ
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने कुल मिलाकर 14 वर्ष से अधिक समय तक प्रधानमंत्री पद संभाला था, परंतु उनका कार्यकाल लगातार नहीं था — बीच में एक अंतराल आया था। इसी कारण मोदी का यह रिकॉर्ड 'निरंतर सेवा' की श्रेणी में विशेष महत्व रखता है।
बैठक में कौन-कौन शामिल होंगे
इस बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन, कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित कई वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री और एनडीए सहयोगी दलों के नेताओं के शामिल होने की उम्मीद है। बैठक में गठबंधन की उपलब्धियों, भविष्य की नीतिगत प्राथमिकताओं और राजनीतिक रोडमैप पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है।
राजनीतिक महत्व और पृष्ठभूमि
यह बैठक राजनीतिक दृष्टि से कई कारणों से अहम है। पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार बनने और असम में सत्ता बरकरार रहने के बाद यह एनडीए की पहली बड़ी संयुक्त बैठक होगी। साथ ही, यह अगले वर्ष होने वाले कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की तैयारियों के लिहाज़ से भी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
यह ऐसे समय में आई है जब विपक्षी इंडिया गठबंधन ने भी हाल ही में नई दिल्ली में अपनी बैठक आयोजित की थी, जिसमें चुनावी सुधार, शिक्षा और आर्थिक मुद्दों पर साझा रणनीति तय की गई थी। दोनों गठबंधनों की इस क्रमिक सक्रियता से आगामी चुनावी मौसम की तस्वीर साफ़ होती दिख रही है।
आगे क्या
बैठक में पारित होने वाले प्रस्तावों और नीतिगत घोषणाओं पर सभी की नज़र रहेगी। शासन से जुड़ी पहलों और विकास कार्यक्रमों की समीक्षा के साथ-साथ आगामी चुनावी चुनौतियों के लिए गठबंधन की एकजुटता का प्रदर्शन भी इस बैठक का एक प्रमुख उद्देश्य बताया जा रहा है।