कंगना रनौत और एनडीए नेताओं ने सीजेपी के जंतर-मंतर प्रदर्शन को बताया सुनियोजित साजिश
सारांश
मुख्य बातें
भाजपा सांसद एवं अभिनेत्री कंगना रनौत और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के कई वरिष्ठ नेताओं ने 10 अक्टूबर 2026 को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के जंतर-मंतर, नई दिल्ली पर आयोजित विरोध-प्रदर्शन के आह्वान की कड़ी आलोचना करते हुए इसे देश के खिलाफ एक सुनियोजित साजिश करार दिया। एनडीए खेमे से एकजुट प्रतिक्रिया सामने आई जिसमें मंत्रियों, विधायकों और सांसदों ने एक स्वर में इस प्रदर्शन को लोकतांत्रिक मर्यादाओं के विरुद्ध बताया।
कंगना रनौत का बयान
भाजपा सांसद कंगना रनौत ने मीडिया से बातचीत में कहा, 'देश-विरोधी तत्व, आतंकवादी ताकतें और अंतरराष्ट्रीय साजिशें इस समय हमारे देश के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गई हैं। देश और उसके नागरिकों को परेशान करने के लिए किसी न किसी बहाने से तरह-तरह की साजिशें रची जा रही हैं।' उनके इस बयान ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।
भाजपा नेताओं की प्रतिक्रिया
मथुरा के भाजपा विधायक श्रीकांत शर्मा ने कहा, 'कुछ लोग सोची-समझी साजिश के तहत भारत को बांग्लादेश और पाकिस्तान जैसा बनाने की कोशिश कर रहे हैं। यह तो बस वोटर लिस्ट को शुद्ध करने की प्रक्रिया है, फिर भी इतना हंगामा हो रहा है। वोटर लिस्ट में मौजूद गड़बड़ियों को ठीक किया जा रहा है।'
पटना में भाजपा नेता मृत्युंजय तिवारी ने सीजेपी के कथित दोहरे चरित्र पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले प्रश्न पत्र लीक मुद्दे पर जंतर-मंतर पर हंगामा किया गया, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की माँग की गई, और सरकार ने छात्रों की माँगें मानकर कड़े कानून बनाने का वादा किया। उनके अनुसार, 'दो महीने में ही सीजेपी के लोगों का असली चेहरा सबके सामने आ गया है।'
छत्तीसगढ़ के मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने संतुलित रुख अपनाते हुए कहा, 'भारतीय जनता पार्टी लोकतंत्र और संविधान का सम्मान करती है। संविधान हर व्यक्ति को अपने विचार व्यक्त करने का अधिकार देता है, लेकिन यह मौलिक अधिकार इस शर्त के अधीन है कि इससे दूसरों को असुविधा न हो।'
संजय निषाद की प्रतिक्रिया और अखिलेश पर कटाक्ष
उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री संजय निषाद ने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करना सबका अधिकार है, परंतु बिना जाँच-पड़ताल के किसी खास व्यक्ति को निशाना बनाना अनुचित है। जंतर-मंतर प्रदर्शन को समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के समर्थन पर उन्होंने कहा, 'देश की जनता सर्वोपरि है। सरकार हो या विपक्ष, जनता जिसे पसंद करती है, उसे सत्ता में बैठाती है और जिसे नापसंद करती है, उसे बाहर कर देती है। अब जो व्यक्ति बाहर है, वह बयानबाजी के अलावा और क्या कर सकता है?'
राजनीतिक पृष्ठभूमि और व्यापक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब सीजेपी पहले भी जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर चुकी है और उस दौरान प्रश्न पत्र लीक तथा मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) के खिलाफ आंदोलन ने राजनीतिक हलचल मचाई थी। गौरतलब है कि विपक्षी दलों की इस प्रदर्शन को समर्थन देने की कोशिश ने सत्तापक्ष की प्रतिक्रिया को और तीखा कर दिया है। आलोचकों का कहना है कि एनडीए नेताओं की इस एकजुट प्रतिक्रिया में भावनात्मक और राजनीतिक दोनों आयाम हैं।
आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सीजेपी का विरोध-प्रदर्शन किस दिशा में जाता है और सरकार की ओर से कोई औपचारिक कार्रवाई होती है या नहीं।