नागालैंड में कॉफी किसानों की आय बढ़ाने पर NEC सचिव सतिंदर कुमार भल्ला का जोर, तुओफेमा में किया दौरा
सारांश
मुख्य बातें
पूर्वोत्तर परिषद (NEC) के सचिव सतिंदर कुमार भल्ला ने 2 अक्टूबर 2026 को नागालैंड के कोहिमा जिले के तुओफेमा गांव का दौरा कर कॉफी किसानों की आय बढ़ाने के लिए एकीकृत दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि बेहतर बुनियादी ढाँचा, मशीनीकरण, मूल्यवर्धन और बाज़ार संपर्क के बिना किसानों की आय में पर्याप्त वृद्धि संभव नहीं है।
दौरे का उद्देश्य और मुख्य गतिविधियाँ
भल्ला ने यह दौरा कॉफी यूएसपी परियोजना के अंतर्गत कॉफी की खेती और संबंधित बुनियादी ढाँचे की प्रगति की समीक्षा के लिए किया। उन्होंने कॉफी बागान स्थलों और हाई-टेक कॉफी वाशिंग स्टेशन का निरीक्षण किया तथा कॉफी उत्पादकों और तुओफेमा क्लस्टर के सदस्यों से सीधी बातचीत की।
गौरतलब है कि यह परियोजना केवल एक वृक्षारोपण पहल नहीं है — एनईसी सचिव ने इसे एक व्यापक आजीविका और आर्थिक विकास कार्यक्रम बताया, जिसका उद्देश्य गाँवों, समाजों और समूहों को क्षेत्र के प्राकृतिक एवं मानवीय संसाधनों से अधिकतम लाभ दिलाना है।
एकीकृत दृष्टिकोण की ज़रूरत
भल्ला ने रेखांकित किया कि कॉफी क्षेत्र को व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य और प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए अच्छी सड़क कनेक्टिविटी, आधुनिक प्रसंस्करण मशीनरी, कुशल कटाईत्तर अवसंरचना, गुणवत्ता आश्वासन, मूल्यवर्धन और मज़बूत बाज़ार व निर्यात संबंध अनिवार्य हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जल संचयन, नई प्रौद्योगिकियों और उपयुक्त उपकरणों की संभावनाओं की जाँच की जाएगी।
उन्होंने स्थानीय प्रशासन को औद्योगिक घरानों, निवेशकों और निर्यातकों के साथ जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया, ताकि उचित वित्तीय और संस्थागत व्यवस्थाओं के ज़रिये क्षेत्र में मशीनीकरण और स्वचालन को बढ़ावा मिल सके।
फसल विविधता और अंतरफसल पर सुझाव
भल्ला ने नागालैंड सरकार और कॉफी बोर्ड से आग्रह किया कि वे केंद्रीय कृषि संस्थानों के साथ मिलकर उपयुक्त अंतरफसलों और पूरक कृषि गतिविधियों की पहचान करें। उन्होंने तर्क दिया कि फसल विविधता से भूमि की उत्पादकता में सुधार होगा और किसानों को आय के अतिरिक्त स्रोत उपलब्ध होंगे।
यह ऐसे समय में आया है जब पूर्वोत्तर के मुख्यमंत्री सामूहिक रूप से किसानों की आय बढ़ाने की रणनीतियाँ विकसित कर रहे हैं, और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के तहत पूर्वोत्तर राज्यों में कृषि आधारित आजीविका को प्राथमिकता दी जा रही है।
स्थानीय युवा उद्यमिता की सराहना
भल्ला ने युवा कॉफी उत्पादक विबेई केंस की विशेष सराहना की, जिन्होंने वियतनाम की यात्रा कर कॉफी में विशेष प्रमाणन प्राप्त किया। एनईसी सचिव ने कहा कि इस तरह की स्थानीय पहलें कॉफी पारिस्थितिकी तंत्र को मज़बूत करने और क्षेत्र में विशेषज्ञता विकसित करने में अहम भूमिका निभाएँगी।
व्यापक लक्ष्य और आगे की राह
भल्ला के अनुसार, परियोजना का व्यापक उद्देश्य स्थायी आजीविका का सृजन करना और समुदायों को बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, आधुनिक सुविधाओं तथा जीवन की उच्च गुणवत्ता तक पहुँच दिलाना है। उन्होंने कहा कि इसके लिए केंद्र सरकार, नागालैंड सरकार, कॉफी बोर्ड, स्थानीय प्रशासन, किसानों, तकनीकी संस्थानों और निजी क्षेत्र के सामूहिक प्रयास अनिवार्य होंगे।
परियोजना की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि ये सभी हितधारक समन्वय के साथ काम कर सकते हैं या नहीं — यही अगली बड़ी परीक्षा है।