3 अक्टूबर 2026
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नागालैंड में कॉफी किसानों की आय बढ़ाने पर NEC सचिव सतिंदर कुमार भल्ला का जोर, तुओफेमा में किया दौरा

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नागालैंड में कॉफी किसानों की आय बढ़ाने पर NEC सचिव सतिंदर कुमार भल्ला का जोर, तुओफेमा में किया दौरा

सारांश

पूर्वोत्तर परिषद के सचिव सतिंदर कुमार भल्ला ने नागालैंड के तुओफेमा में कॉफी यूएसपी परियोजना की समीक्षा की और किसानों को आश्वासन दिया कि सड़क, मशीनीकरण, मूल्यवर्धन व निर्यात संपर्क के बिना आय वृद्धि अधूरी रहेगी — और यही एकीकृत दृष्टिकोण विकसित भारत 2047 की नींव बनेगा।

मुख्य बातें

NEC सचिव सतिंदर कुमार भल्ला ने 2 अक्टूबर 2026 को कोहिमा जिले के तुओफेमा गांव का दौरा कर कॉफी यूएसपी परियोजना की समीक्षा की।
कॉफी किसानों की आय बढ़ाने के लिए बुनियादी ढाँचा, मशीनीकरण, मूल्यवर्धन और बाज़ार संपर्क को अनिवार्य बताया गया।
नागालैंड सरकार और कॉफी बोर्ड को उपयुक्त अंतरफसलों की पहचान के लिए केंद्रीय कृषि संस्थानों से जोड़ने का आग्रह किया गया।
युवा उत्पादक विबेई केंस की वियतनाम यात्रा और कॉफी प्रमाणन के लिए भल्ला ने सराहना की।
परियोजना का लक्ष्य विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण में योगदान के साथ स्थायी आजीविका और बेहतर जीवन गुणवत्ता सुनिश्चित करना है।

पूर्वोत्तर परिषद (NEC) के सचिव सतिंदर कुमार भल्ला ने 2 अक्टूबर 2026 को नागालैंड के कोहिमा जिले के तुओफेमा गांव का दौरा कर कॉफी किसानों की आय बढ़ाने के लिए एकीकृत दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि बेहतर बुनियादी ढाँचा, मशीनीकरण, मूल्यवर्धन और बाज़ार संपर्क के बिना किसानों की आय में पर्याप्त वृद्धि संभव नहीं है।

दौरे का उद्देश्य और मुख्य गतिविधियाँ

भल्ला ने यह दौरा कॉफी यूएसपी परियोजना के अंतर्गत कॉफी की खेती और संबंधित बुनियादी ढाँचे की प्रगति की समीक्षा के लिए किया। उन्होंने कॉफी बागान स्थलों और हाई-टेक कॉफी वाशिंग स्टेशन का निरीक्षण किया तथा कॉफी उत्पादकों और तुओफेमा क्लस्टर के सदस्यों से सीधी बातचीत की।

गौरतलब है कि यह परियोजना केवल एक वृक्षारोपण पहल नहीं है — एनईसी सचिव ने इसे एक व्यापक आजीविका और आर्थिक विकास कार्यक्रम बताया, जिसका उद्देश्य गाँवों, समाजों और समूहों को क्षेत्र के प्राकृतिक एवं मानवीय संसाधनों से अधिकतम लाभ दिलाना है।

एकीकृत दृष्टिकोण की ज़रूरत

भल्ला ने रेखांकित किया कि कॉफी क्षेत्र को व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य और प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए अच्छी सड़क कनेक्टिविटी, आधुनिक प्रसंस्करण मशीनरी, कुशल कटाईत्तर अवसंरचना, गुणवत्ता आश्वासन, मूल्यवर्धन और मज़बूत बाज़ार व निर्यात संबंध अनिवार्य हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जल संचयन, नई प्रौद्योगिकियों और उपयुक्त उपकरणों की संभावनाओं की जाँच की जाएगी।

उन्होंने स्थानीय प्रशासन को औद्योगिक घरानों, निवेशकों और निर्यातकों के साथ जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया, ताकि उचित वित्तीय और संस्थागत व्यवस्थाओं के ज़रिये क्षेत्र में मशीनीकरण और स्वचालन को बढ़ावा मिल सके।

फसल विविधता और अंतरफसल पर सुझाव

भल्ला ने नागालैंड सरकार और कॉफी बोर्ड से आग्रह किया कि वे केंद्रीय कृषि संस्थानों के साथ मिलकर उपयुक्त अंतरफसलों और पूरक कृषि गतिविधियों की पहचान करें। उन्होंने तर्क दिया कि फसल विविधता से भूमि की उत्पादकता में सुधार होगा और किसानों को आय के अतिरिक्त स्रोत उपलब्ध होंगे।

यह ऐसे समय में आया है जब पूर्वोत्तर के मुख्यमंत्री सामूहिक रूप से किसानों की आय बढ़ाने की रणनीतियाँ विकसित कर रहे हैं, और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के तहत पूर्वोत्तर राज्यों में कृषि आधारित आजीविका को प्राथमिकता दी जा रही है।

स्थानीय युवा उद्यमिता की सराहना

भल्ला ने युवा कॉफी उत्पादक विबेई केंस की विशेष सराहना की, जिन्होंने वियतनाम की यात्रा कर कॉफी में विशेष प्रमाणन प्राप्त किया। एनईसी सचिव ने कहा कि इस तरह की स्थानीय पहलें कॉफी पारिस्थितिकी तंत्र को मज़बूत करने और क्षेत्र में विशेषज्ञता विकसित करने में अहम भूमिका निभाएँगी।

व्यापक लक्ष्य और आगे की राह

भल्ला के अनुसार, परियोजना का व्यापक उद्देश्य स्थायी आजीविका का सृजन करना और समुदायों को बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, आधुनिक सुविधाओं तथा जीवन की उच्च गुणवत्ता तक पहुँच दिलाना है। उन्होंने कहा कि इसके लिए केंद्र सरकार, नागालैंड सरकार, कॉफी बोर्ड, स्थानीय प्रशासन, किसानों, तकनीकी संस्थानों और निजी क्षेत्र के सामूहिक प्रयास अनिवार्य होंगे।

परियोजना की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि ये सभी हितधारक समन्वय के साथ काम कर सकते हैं या नहीं — यही अगली बड़ी परीक्षा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन पूर्वोत्तर में कृषि परियोजनाओं का इतिहास बताता है कि घोषणाओं और ज़मीनी क्रियान्वयन के बीच की खाई अक्सर गहरी रहती है। सड़क संपर्क, मशीनीकरण और निर्यात संबंध — ये तीनों ही पूर्वोत्तर के लिए दशकों पुरानी चुनौतियाँ हैं। असली परीक्षा यह होगी कि क्या केंद्र, राज्य, कॉफी बोर्ड और निजी क्षेत्र के बीच समन्वय कागज़ों से निकलकर तुओफेमा के किसानों की जेब तक पहुँचता है — वरना यह भी उन योजनाओं की सूची में जुड़ जाएगा जो नीति-दस्तावेज़ों में जीती हैं और खेतों में दम तोड़ती हैं।
RashtraPress
3 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कॉफी यूएसपी परियोजना क्या है?
कॉफी यूएसपी परियोजना नागालैंड में एक एकीकृत आजीविका और आर्थिक विकास कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य कॉफी उत्पादन के साथ-साथ बुनियादी ढाँचे, मूल्यवर्धन और बाज़ार संपर्क को मज़बूत कर किसानों की आय बढ़ाना है। यह परियोजना केंद्र सरकार, नागालैंड सरकार, कॉफी बोर्ड और निजी क्षेत्र के सामूहिक प्रयासों पर आधारित है।
NEC सचिव ने तुओफेमा दौरे में क्या पाया?
NEC सचिव सतिंदर कुमार भल्ला ने कोहिमा जिले के तुओफेमा गांव में कॉफी बागान स्थलों और हाई-टेक कॉफी वाशिंग स्टेशन का निरीक्षण किया। उन्होंने कॉफी उत्पादकों और तुओफेमा क्लस्टर के सदस्यों से सीधी बातचीत कर परियोजना की प्रगति की समीक्षा की।
नागालैंड में कॉफी खेती के लिए किन चुनौतियों की पहचान की गई?
भल्ला ने सड़क कनेक्टिविटी की कमी, आधुनिक प्रसंस्करण मशीनरी का अभाव, कमज़ोर कटाईत्तर अवसंरचना, गुणवत्ता आश्वासन की कमी और निर्यात संबंधों की सीमित पहुँच को प्रमुख चुनौतियों के रूप में रेखांकित किया। इन सभी क्षेत्रों में सुधार के बिना क्षेत्र व्यावसायिक रूप से प्रतिस्पर्धी नहीं बन सकता।
फसल विविधता से कॉफी किसानों को कैसे फायदा होगा?
अंतरफसल और पूरक कृषि गतिविधियाँ अपनाने से भूमि की उत्पादकता में सुधार होगा और किसानों को केवल कॉफी पर निर्भर न रहकर आय के अतिरिक्त स्रोत मिलेंगे। इससे कॉफी खेती की समग्र आर्थिक व्यवहार्यता भी मज़बूत होगी।
युवा कॉफी उत्पादक विबेई केंस को क्यों सराहा गया?
विबेई केंस ने वियतनाम की यात्रा कर कॉफी में विशेष प्रमाणन प्राप्त किया, जिसे NEC सचिव ने स्थानीय विशेषज्ञता विकसित करने की दिशा में एक अनुकरणीय पहल बताया। भल्ला ने कहा कि ऐसी पहलें नागालैंड में कॉफी पारिस्थितिकी तंत्र को मज़बूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगी।
राष्ट्र प्रेस
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