'कॉफीज ऑफ नागालैंड' मिशन लॉन्च: सिंधिया ने ₹175 करोड़ की कॉफी मूल्य श्रृंखला पहल का शुभारंभ किया

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'कॉफीज ऑफ नागालैंड' मिशन लॉन्च: सिंधिया ने ₹175 करोड़ की कॉफी मूल्य श्रृंखला पहल का शुभारंभ किया

सारांश

₹175 करोड़ के 'कॉफीज ऑफ नागालैंड' मिशन के ज़रिए केंद्र सरकार नागालैंड को कच्चे कॉफी उत्पादक राज्य से वैश्विक स्पेशलिटी कॉफी बाज़ार में स्थापित करना चाहती है। कोहिमा और न्यूलैंड के दो पायलट क्लस्टरों से शुरू यह पहल, पूर्वोत्तर की कृषि अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकती है।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ₹175 करोड़ के 'कॉफीज ऑफ नागालैंड' मिशन का शुभारंभ किया।
कोहिमा जिले के तुओफेमा गाँव को अरेबिका और न्यूलैंड जिले के घोटोवी गाँव को रोबस्टा कॉफी के लिए पायलट क्लस्टर चुना गया।
मिशन में वृक्षारोपण, प्रसंस्करण, ब्रांडिंग, निर्यात, ट्रैसेबिलिटी और कॉफी पर्यटन को एकीकृत किया गया है।
नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफियू रियो , उपमुख्यमंत्री टी.आर.
जेलियांग और DoNER राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार लॉन्च समारोह में उपस्थित रहे।
लक्ष्य: नागालैंड को घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय बाज़ारों में प्रीमियम स्पेशलिटी कॉफी उत्पादक के रूप में स्थापित करना।

केंद्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास और संचार मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने 19 मई 2025 को नागालैंड के लिए क्लस्टर-आधारित 'कॉफी मूल्य श्रृंखला विकास मिशन' — जिसे 'कॉफीज ऑफ नागालैंड' नाम दिया गया है — का औपचारिक शुभारंभ किया। ₹175 करोड़ के परिव्यय वाली यह पहल नागालैंड को एक कच्चे कॉफी उत्पादक राज्य से प्रीमियम, उत्पत्ति-सत्यापन योग्य स्पेशलिटी कॉफी अर्थव्यवस्था में रूपांतरित करने के उद्देश्य से तैयार की गई है।

मुख्य घटनाक्रम

इस लॉन्च समारोह में पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (DoNER) के राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार, नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफियू रियो, उपमुख्यमंत्री टी.आर. जेलियांग, विधायक एवं भूमि संसाधन सलाहकार जी. इकुतो झिमोमी और DoNER सचिव संजय जाजू उपस्थित रहे। यह 'संपूर्ण-सरकार दृष्टिकोण' पर आधारित मिशन है, जिसमें केंद्र और राज्य सरकार, उद्योग जगत तथा कॉफी उत्पादक समुदाय एक साझा मंच पर लाए गए हैं।

क्लस्टर आधारित रणनीति

मिशन के तहत दो प्रायोगिक कॉफी क्लस्टरों की पहचान की गई है। कोहिमा जिले के तुओफेमा गाँव को 'अरेबिका' कॉफी उत्पादन के लिए और न्यूलैंड जिले के घोटोवी गाँव को 'रोबस्टा' कॉफी के लिए चुना गया है। इन क्लस्टरों में वृक्षारोपण विकास, कटाई के बाद का प्रसंस्करण, ब्रांडिंग, मार्केटिंग, ट्रैसेबिलिटी, निर्यात, पर्यटन और क्षमता निर्माण को एकीकृत रूप से लागू किया जाएगा।

मंत्री सिंधिया ने इस पहल को 'संपूर्ण भारत दृष्टिकोण' करार दिया — जो सरकारों, मंत्रालयों, कॉफी उत्पादकों, उद्यमियों, प्रसंस्करणकर्ताओं, ब्रांडिंग विशेषज्ञों, निर्यातकों और बाज़ार अग्रणियों को एक मंच पर लाता है।

आम जनता और किसानों पर असर

मिशन का केंद्रीय लक्ष्य नागालैंड के कॉफी उत्पादक समुदायों के लिए संवहनीय और अधिक आय सुनिश्चित करना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस परिकल्पना को आधार बनाया गया है जिसमें किसान पूरी कृषि मूल्य श्रृंखला में वास्तविक हितधारक बनें — न केवल उत्पादक। मंत्री ने कहा कि इस पहल की सफलता तब दिखेगी जब 'नागालैंड की कॉफी' को घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय, दोनों बाज़ारों में खास पहचान मिलेगी।

पर्यटन और ब्रांडिंग रणनीति

मिशन 'ब्रांड नॉर्थ ईस्ट' के तहत 'नागालैंड की कॉफी' को वैश्विक पहचान दिलाने की योजना बनाता है। इसके लिए मीडिया अभियान, व्यापार मेलों में भागीदारी और कॉफी पर्यटन अनुभवों को बढ़ावा दिया जाएगा। पायलट क्लस्टरों में 'कॉफी बागानों में ठहरने की व्यवस्था' और 'खेत से कप तक' पर्यटन अनुभव विकसित किए जाएंगे, ताकि नागालैंड को स्पेशलिटी कॉफी के एक विशिष्ट उत्पादन स्थल के रूप में स्थापित किया जा सके।

क्या होगा आगे

सरकार ने नागालैंड के लिए एक विश्व-स्तरीय और प्रतिस्पर्धी 'स्पेशलिटी कॉफी इकोसिस्टम' तैयार करने की प्रतिबद्धता जताई है। यह ऐसे समय में आया है जब पूर्वोत्तर भारत की कृषि-आधारित अर्थव्यवस्थाओं को मुख्यधारा की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं से जोड़ने के प्रयास तेज हो रहे हैं। मिशन के क्रियान्वयन की दिशा में अगले चरण में पायलट क्लस्टरों में ज़मीनी काम शुरू होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा ज़मीन पर होगी — जहाँ पूर्वोत्तर की कृषि योजनाएँ अक्सर क्रियान्वयन की दीवार से टकराती हैं। ₹175 करोड़ की राशि महत्वाकांक्षी है, पर 'स्पेशलिटी कॉफी इकोसिस्टम' बनाने के लिए केवल बजट पर्याप्त नहीं — वैश्विक बाज़ार में टिकने के लिए निरंतर गुणवत्ता नियंत्रण, किसानों को उचित मूल्य और स्थिर निर्यात नेटवर्क चाहिए। यह मिशन 'ब्रांड नॉर्थ ईस्ट' की व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जो पूर्वोत्तर के उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने की कोशिश करती है — लेकिन इस दिशा में पिछले प्रयासों के मिले-जुले नतीजे बताते हैं कि नीति की सफलता नीयत से नहीं, निगरानी तंत्र से तय होती है।
RashtraPress
18 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'कॉफीज ऑफ नागालैंड' मिशन क्या है?
यह केंद्र सरकार की ₹175 करोड़ की क्लस्टर-आधारित पहल है, जिसका उद्देश्य नागालैंड को कच्चे कॉफी उत्पादक राज्य से प्रीमियम स्पेशलिटी कॉफी अर्थव्यवस्था में बदलना है। इसमें वृक्षारोपण, प्रसंस्करण, ब्रांडिंग, निर्यात और कॉफी पर्यटन को एकीकृत किया गया है।
इस मिशन के तहत कौन-से पायलट क्लस्टर चुने गए हैं?
दो पायलट क्लस्टर चिह्नित किए गए हैं — कोहिमा जिले का तुओफेमा गाँव अरेबिका कॉफी के लिए और न्यूलैंड जिले का घोटोवी गाँव रोबस्टा कॉफी के लिए। ये क्लस्टर पूरी कॉफी मूल्य श्रृंखला के प्रायोगिक मॉडल के रूप में काम करेंगे।
इस मिशन से नागालैंड के किसानों को क्या फायदा होगा?
मिशन का लक्ष्य कॉफी उत्पादक समुदायों के लिए संवहनीय और अधिक आय सुनिश्चित करना है। किसानों को पूरी मूल्य श्रृंखला — उत्पादन से लेकर निर्यात तक — में हितधारक बनाया जाएगा, जिससे उन्हें केवल कच्चे माल के उत्पादक की बजाय प्रीमियम उत्पाद के भागीदार के रूप में लाभ मिलेगा।
मिशन में कॉफी पर्यटन की क्या भूमिका है?
पायलट क्लस्टरों में 'कॉफी बागानों में ठहरने की व्यवस्था' और 'खेत से कप तक' पर्यटन अनुभव विकसित किए जाएंगे। इसका उद्देश्य नागालैंड को स्पेशलिटी कॉफी के एक विशिष्ट और अनोखे उत्पादन स्थल के रूप में पर्यटकों के बीच स्थापित करना है।
इस मिशन का 'ब्रांड नॉर्थ ईस्ट' से क्या संबंध है?
'कॉफीज ऑफ नागालैंड' मिशन 'ब्रांड नॉर्थ ईस्ट' रणनीति का हिस्सा है, जो पूर्वोत्तर भारत के उत्पादों को घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय बाज़ारों में पहचान दिलाने की व्यापक कोशिश है। मीडिया अभियान और व्यापार मेलों के ज़रिए 'नागालैंड की कॉफी' को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने की योजना है।
राष्ट्र प्रेस
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