हैदराबाद रिटायर्ड IPS की पत्नी हत्याकांड: नेपाली गैंग के 4 सदस्य गिरफ्तार, 5 महीने बाद खुला राज़
सारांश
मुख्य बातें
हैदराबाद पुलिस ने सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी रे विनय रंजन की पत्नी तनुजा रंजन की हत्या के मामले में चार नेपाली नागरिकों को गिरफ्तार किया। 7-8 मई 2026 की दरमियानी रात को हैदराबाद के प्रशासन नगर स्थित घर में हुई इस वारदात का खुलासा पाँच महीने से अधिक की गहन जाँच के बाद हुआ, जो कई राज्यों और भारत-नेपाल सीमा तक फैली रही। गिरफ्तारी नामपल्ली रेलवे स्टेशन के पास एक विशेष जाँच टीम (SIT) ने की।
गिरफ्तार आरोपियों का विवरण
गिरफ्तार किए गए चारों आरोपियों में पीड़िता के घर पर काम करने वाली घरेलू सहायिका धर्मा तिरुवा उर्फ कल्पना (26 वर्ष, नेपाल के सुर्खेत जिले की निवासी) शामिल है। इसके अलावा गणेश बीके उर्फ गणेश विश्वकर्मा उर्फ दिनेश थापा (31 वर्ष, पुणे निवासी मजदूर), चंद्र बहादुर तमांग उर्फ रंजीत थापा उर्फ शंकर चंद्र लामा उर्फ कांचा (44 वर्ष, हरियाणा के गुरुग्राम में पंजीकृत पता वाला रसोइया), तथा गणेश बहादुर शाही (37 वर्ष, पुणे निवासी चौकीदार) को हिरासत में लिया गया।
पुलिस के अनुसार, इससे पहले 22 मई को सुनील बहादुर औजी उर्फ सुनील परियार और लूटे गए सामान को ठिकाने लगाने वाले दिलीप बहादुर मिजार उर्फ सोनार को गिरफ्तार किया जा चुका है। दो अन्य आरोपी अब भी फरार बताए जा रहे हैं।
वारदात की पूरी योजना और मुख्य घटनाक्रम
जाँच में सामने आया कि धर्मा उर्फ कल्पना जून 2025 में एक रिश्तेदार के माध्यम से हैदराबाद पहुँची थी और जुबली हिल्स स्थित आवास में लगभग ₹20,000 प्रति माह के वेतन पर काम कर रही थी। पुलिस के अनुसार, काम के दौरान वह पुणे में रहने वाले एक नेपाली नागरिक विकास के संपर्क में रही, जो कथित तौर पर उससे घर की संपत्ति और कीमती सामान की जानकारी लेता रहता था।
अप्रैल 2026 में धर्मा अपने बीमार पिता से मिलने पुणे गई, जहाँ वह इस कथित गिरोह के अन्य सदस्यों के संपर्क में आई। 4 मई को जब पीड़िता के पति बेंगलुरु रवाना हुए, तो उसने कथित तौर पर साथियों को सूचित किया। उसी दिन गणेश बहादुर शाही, शंकर चंद्र लामा और सुनील परियार महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के कलंबोली में मिले और किराए की मारुति अर्टिगा से पुणे गए। अगले दिन हैदराबाद रवाना होने से पहले वे गणेश बीके समेत अन्य साथियों से मिले।
7 मई की सुबह, गणेश बीके और सुरेश शाही ने कथित तौर पर धर्मा से उसके कार्यस्थल के निकट मिलकर घर का मुआयना किया। शाम को यह गिरोह महात्मा गांधी बस स्टेशन के पास रवींद्र बार में इकट्ठा हुआ और दो समूहों में बँट गया — एक समूह ने घर के भीतर वारदात को अंजाम दिया और दूसरा नामपल्ली रेलवे स्टेशन के पास निगरानी टीम की भूमिका में रहा।
हत्या और लूट का ब्योरा
पुलिस के अनुसार, 7-8 मई की रात को धर्मा ने कथित तौर पर दरवाज़ा खोलकर साथियों को अंदर आने दिया। उस दौरान तनुजा रंजन जाग गईं। हमलावरों ने कथित तौर पर उनका मुँह दबाकर उन्हें काबू किया, जिससे दम घुटने से उनकी मृत्यु हो गई। इसके बाद गिरोह ने घर की अलमारियाँ तोड़ीं और 225 ग्राम सोने के गहने व अन्य कीमती सामान लूटकर घर के पिछले दरवाज़े से भाग निकले।
गौरतलब है कि वारदात के बाद यह गिरोह काजीपेट की ओर गया, सुनसान पहाड़ी इलाकों में लूटे गए सामान को नौ बराबर हिस्सों में बाँटा और छोटे-छोटे समूहों में नेपाल भाग गए। 22 मई को पुलिस ने पहली गिरफ्तारी में 26 ग्राम सोना व अन्य सामान बरामद किया।
जाँच का दायरा और पुलिस का अभियान
हैदराबाद पुलिस कमिश्नर वीसी सज्जनार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि तीन पुलिस कमिश्नरेट क्षेत्रों में नेपाली गिरोहों द्वारा संपत्ति से जुड़े अपराधों की बढ़ती घटनाओं की पृष्ठभूमि में गठित SIT ने इस मामले की जाँच की। जाँच बेंगलुरु, मुंबई, पुणे, सूरत, पटना, दिल्ली, लखनऊ और उत्तराखंड तक फैली रही, तथा भारत-नेपाल सीमा के निकट पहाड़ी इलाकों में पाँच महीने से अधिक खुफिया जानकारी जुटाई गई। स्थानीय मुखबिरों ने संदिग्धों के ठिकाने, यात्रा मार्ग और संपर्क सूत्रों की पहचान में अहम भूमिका निभाई।
यह मामला इस मायने में व्यापक चिंता का विषय बना है क्योंकि इसमें एक सुव्यवस्थित गिरोह द्वारा घरेलू सहायिका के माध्यम से लक्षित हमले की रणनीति सामने आई है। आने वाले दिनों में फरार दो आरोपियों की तलाश में जाँच जारी रहने की उम्मीद है।