'न्यू दिल्ली रिव्यू ऑफ बुक्स' का पहला अंक लॉन्च, संजीव सान्याल ने भारतीय बौद्धिक स्वतंत्रता का आह्वान किया
सारांश
मुख्य बातें
न्यू दिल्ली रिव्यू ऑफ बुक्स (एनडीआरबी) का उद्घाटन अंक 25 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में औपचारिक रूप से जारी किया गया। यह त्रैमासिक प्रकाशन समकालीन भारत को आकार देने वाले विचारों के आलोचनात्मक विश्लेषण और निबंधों पर केंद्रित है। लॉन्च कार्यक्रम में प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य संजीव सान्याल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
मुख्य घटनाक्रम
एनडीआरबी के प्रधान संपादक प्रेम अंश सिन्हा और प्रकाशक तथा नेशन फर्स्ट पॉलिसी रिसर्च एंड चेंज फाउंडेशन (एनएफपीआरसी) के अनुसंधान निदेशक अनंत कृष्णा भी इस अवसर पर उपस्थित रहे। कार्यक्रम में अकादमिक, नीति विशेषज्ञ और शोधार्थियों की उल्लेखनीय भागीदारी देखी गई।
सान्याल ने प्रकाशन की युवा संपादकीय टीम को बधाई देते हुए इसकी संपादकीय दृष्टि, डिजाइन और गुणवत्ता नियंत्रण की सराहना की। उन्होंने तीव्र विस्तार के बजाय दीर्घायु, निरंतरता और गुणवत्ता को प्राथमिकता देने की सलाह दी।
संजीव सान्याल का संदेश: भारतीय परिप्रेक्ष्य की ज़रूरत
सान्याल ने वैश्विक घटनाक्रमों को भारतीय नज़रिए से देखने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि भारत को अंतरराष्ट्रीय घटनाओं का विश्लेषण विदेशी आकलन पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय अपने स्वतंत्र दृष्टिकोण से करना चाहिए।
उन्होंने भारत में बौद्धिक विविधता की कमी पर चिंता व्यक्त करते हुए वैचारिक एकरूपता और व्यक्तियों के विचारों को आलोचनात्मक विश्लेषण के बजाय अमान्य ठहराने की प्रवृत्ति के प्रति आगाह किया। फ्रेडरिक हायेक और बीआर शेनॉय जैसे विचारकों का उल्लेख करते हुए उन्होंने विविध आर्थिक विचारों से जुड़ने के महत्व को रेखांकित किया।
प्रकाशन की संपादकीय नीति
अनंत कृष्णा ने एनडीआरबी को 'एक बौद्धिक बुनियादी ढाँचा' बताया और कहा कि भारत को वास्तविक बौद्धिक बहुलवाद और कठोर, गैर-सैद्धांतिक चिंतन की आवश्यकता है। उनके अनुसार, यह प्रकाशन पुस्तकों का मूल्यांकन 'उनकी राजनीतिक विचारधारा के बजाय उनके तर्कों की मज़बूती' के आधार पर करेगा।
प्रेम अंश सिन्हा ने एनडीआरबी को 'एक विशिष्ट रुचि' की पत्रिका बताया और समझाया कि समीक्षा निबंध पुस्तकों का केवल सारांश प्रस्तुत नहीं करते, बल्कि उनके तर्कों, संदर्भों और साक्ष्यों की गहरी पड़ताल करते हैं। उन्होंने एनडीआरबी को 'भारत की संस्थाओं और नागरिक जीवन को आकार देने वाले लोगों का मिलन स्थल' के रूप में परिभाषित किया।
आम जनता पर असर और भागीदारी का आमंत्रण
एनडीआरबी ने संकाय सदस्यों, थिंक-टैंक पेशेवरों, पीएचडी शोधार्थियों, छात्रों और अन्य इच्छुक प्रतिभागियों को प्रस्तुतियों, इंटर्नशिप और सहयोग के माध्यम से प्रकाशन से जुड़ने का आमंत्रण दिया है। गौरतलब है कि यह पहल ऐसे समय में आई है जब वैश्विक स्तर पर बौद्धिक विमर्श की जगह तेज़ी से संकुचित होती दिख रही है।
यह प्रकाशन अकादमिक, अनुसंधान और नीति क्षेत्रों में कार्यरत व्यक्तियों के बीच जुड़ाव बढ़ाने और आलोचनात्मक चर्चा के लिए एक ऐसा मंच बनाने का लक्ष्य रखता है जो प्रचलित राजनीतिक या वैचारिक प्राथमिकताओं से परे विचारों को उनके गुणों पर परखे।
क्या होगा आगे
त्रैमासिक प्रकाशन के रूप में एनडीआरबी का अगला अंक शीघ्र अपेक्षित है। प्रकाशन ने दीर्घकालिक संस्था-निर्माण पर ध्यान केंद्रित करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की है, जो भारत के बौद्धिक परिदृश्य में एक नई आवाज़ के रूप में अपनी पहचान बनाने की कोशिश करेगा।