एनएचआरसी ने डीपीडीपी एक्ट के उल्लंघन पर उठाया गंभीर सवाल, बच्चों का डेटा सुरक्षा खतरे में

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एनएचआरसी ने डीपीडीपी एक्ट के उल्लंघन पर उठाया गंभीर सवाल, बच्चों का डेटा सुरक्षा खतरे में

सारांश

एनएचआरसी ने डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट के उल्लंघन के मुद्दे पर संज्ञान लिया है। विशेष रूप से बच्चों के डेटा ट्रांसफर की निगरानी की कमी को लेकर चिंता जताई गई है। क्या यह बच्चों की डिजिटल सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा है?

Key Takeaways

  • एनएचआरसी ने बच्चों के डेटा की सुरक्षा पर चिंता जताई है।
  • डीपीडीपी एक्ट का उल्लंघन गंभीर मामला है।
  • प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने अभी तक प्रावधानों का पालन नहीं किया है।
  • संबंधित मंत्रालयों को नोटिस जारी किए गए हैं।
  • आयोग ने १५ दिनों में अनुपालन रिपोर्ट मांगी है।

नई दिल्ली, २५ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट (डीपीडीपी एक्ट) के कथित उल्लंघन पर स्वतः संज्ञान लिया है। इस मामले का संबंध विशेष रूप से बच्चों के डेटा ट्रांसफर की निगरानी और शिकायत निवारण प्रणाली की कमी से है, जो प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अनुपस्थित पाई गई है।

आयोग की पीठ, जिसमें सदस्य प्रियंक कानूनगो शामिल हैं, ने थिंक टैंक एशिया की रिपोर्ट के आधार पर प्राप्त शिकायत पर कार्रवाई शुरू की है। आयोग ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, शिक्षा मंत्रालय और संचार मंत्रालय को नोटिस जारी किए हैं। साथ ही, गृह मंत्रालय को भी नोटिस की प्रतियां भेजी गई हैं।

आयोग ने संचार मंत्रालय से यह भी पूछा है कि बच्चों को इंटरनेट या मोबाइल उपयोग के लिए सिम कनेक्शन प्रदान करने की प्रक्रिया क्या है। यह ध्यान देने योग्य है कि भारत में बच्चों के नाम पर सिम कार्ड पंजीकरण की कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है।

वर्ष २०२३ में पारित डीपीडीपी एक्ट, जिसे २०२५ के अंत में नियम अधिसूचित कर लागू किया गया, दुनिया के सबसे आधुनिक डेटा सुरक्षा कानूनों में से एक माना जाता है। इसका उद्देश्य बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों जैसे संवेदनशील वर्गों को साइबर खतरों से सुरक्षा प्रदान करना है।

कुछ प्रावधानों जैसे कि सत्यापनीय अभिभावकीय सहमति के लिए १८ महीने का समय दिया गया है, जबकि डेटा ट्रैकिंग, सर्वर सुरक्षा और शिकायत निवारण तंत्र जैसे महत्वपूर्ण प्रावधानों को तत्काल लागू करना अनिवार्य है।

रिपोर्ट के अनुसार, मेटा प्लेटफॉर्म्स, खान अकादमी, व्हाट्सएप, ग्रोक, जेमिनी, पर्प्लेक्सिटी एआई और माइक्रोसॉफ्ट मैथ सॉल्वर जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स ने अभी तक इन प्रावधानों का पूर्ण पालन नहीं किया है।

आयोग ने इस स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए इसे बच्चों की डिजिटल सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बताया है और संबंधित संस्थाओं से १५ दिनों के भीतर अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

गौरतलब है कि एनएचआरसी एक वैधानिक और स्वतंत्र निकाय है, जो भारत में मानवाधिकारों के संरक्षण के लिए कार्य करता है। इसके सदस्यों को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान दर्जा प्राप्त है।

आयोग ने संकेत दिया है कि भविष्य में बुजुर्गों सहित अन्य संवेदनशील वर्गों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए भी ऐसी कार्रवाइयां की जा सकती हैं।

Point of View

जहां बच्चों का डेटा सुरक्षित नहीं है। एनएचआरसी का यह कदम इस बात की पुष्टि करता है कि डिजिटल सुरक्षा में सुधार की आवश्यकता है। आयोग द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब देना सभी संबंधित संस्थाओं के लिए अनिवार्य है।
NationPress
25/03/2026

Frequently Asked Questions

डीपीडीपी एक्ट क्या है?
डीपीडीपी एक्ट भारत का एक आधुनिक डेटा सुरक्षा कानून है, जिसका उद्देश्य संवेदनशील वर्गों को साइबर खतरों से सुरक्षा प्रदान करना है।
एनएचआरसी का क्या कार्य है?
एनएचआरसी मानवाधिकारों के संरक्षण के लिए कार्य करने वाली एक स्वतंत्र निकाय है, जो भारत में अधिकारों के उल्लंघन मामलों की जांच करती है।
बच्चों के डेटा ट्रांसफर की क्या प्रक्रिया है?
बच्चों के डेटा ट्रांसफर के लिए कोई स्पष्ट प्रक्रिया नहीं है, जिसके कारण समस्या उत्पन्न हो रही है।
क्या एनएचआरसी ने अन्य संवेदनशील वर्गों के लिए भी कदम उठाए हैं?
जी हां, एनएचआरसी ने भविष्य में बुजुर्गों सहित अन्य संवेदनशील वर्गों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए कार्रवाई करने का संकेत दिया है।
डीपीडीपी एक्ट के उल्लंघन पर क्या कदम उठाए गए हैं?
एनएचआरसी ने संबंधित मंत्रालयों को नोटिस जारी किया है और अनुपालन रिपोर्ट की मांग की है।
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