एनआईए ने सहारनपुर पीएनबी करेंसी चेस्ट नकली नोट मामले में दो और गिरफ्तार, अब तक 4 आरोपी पकड़े
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने 20 सितंबर 2026 को उत्तर प्रदेश के सहारनपुर स्थित पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) करेंसी चेस्ट से ₹17.29 करोड़ के नकली नोटों के सर्कुलेशन की साजिश में दो और संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। इस मामले में अब तक कुल चार लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है।
कौन हैं नए गिरफ्तार आरोपी
एजेंसी के बयान के अनुसार, गिरफ्तार दोनों व्यक्तियों की पहचान मुकेश कुमार (पुत्र सोम प्रकाश, निवासी गाँव हसनपुर कदीम, मनोहरपुर) और राजेंद्र कुमार (पुत्र प्यारे लाल, निवासी गाँव कल्याणपुर, सरसावा) के रूप में हुई है। दोनों, इस मामले के मुख्य आरोपी आदेश चौधरी के करीबी सहयोगी बताए जाते हैं और नकली नोटों के सर्कुलेशन की साजिश में प्रमुख भूमिका निभाने के संदिग्ध हैं।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला 29 अगस्त 2026 को सामने आया, जब सहारनपुर जिले के सदर बाजार पुलिस स्टेशन को विश्वसनीय सूचना मिली कि सिविल लाइंस स्थित पीएनबी करेंसी चेस्ट से ₹17.29 करोड़ की फेस वैल्यू के नकली भारतीय नोट बरामद हुए हैं। इस सूचना के आधार पर एफआईआर नंबर 0431/2026 भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 की धारा 178 के तहत दर्ज की गई। इसके बाद 3 सितंबर 2026 को एनआईए ने इस मामले को अपने हाथ में लेते हुए इसे केस नंबर आरसी-02/2026/एनआईए/एलकेडब्ल्यू के तहत पुनः पंजीकृत किया।
गौरतलब है कि जांच के दौरान बैंक के तीन कर्मचारियों की भी इस साजिश में कथित संलिप्तता सामने आई, जिसके बाद बैंक प्रबंधन ने उन्हें निलंबित कर दिया। यह उजागर करता है कि यह रैकेट बाहरी तत्वों तक सीमित नहीं था, बल्कि संभवतः बैंकिंग तंत्र के भीतर से भी संचालित हो रहा था।
पहले की गिरफ्तारियाँ
7 सितंबर 2026 को एनआईए ने इस मामले में अमित कुमार को गिरफ्तार किया था। इसके बाद 15-16 सितंबर 2026 को पीएनबी करेंसी चेस्ट में कॉन्ट्रैक्ट ड्राइवर के रूप में कार्यरत आदेश चौधरी को गिरफ्तार किया गया। चौधरी सहारनपुर के मानक मऊ में कुतुब शेर पुलिस स्टेशन क्षेत्र के न्यू नंदपुरी कॉलोनी, गंगोह रोड का निवासी है और इस पूरे नकली नोट रैकेट का मुख्य आरोपी माना जा रहा है।
जांच की वर्तमान स्थिति
एनआईए के अनुसार, पूरी साजिश का भंडाफोड़ करने और शेष सह-आरोपियों तक पहुँचने के लिए जांच अभी जारी है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि इन नकली नोटों का नेटवर्क कहाँ तक फैला हुआ था और इसमें और कितने लोग शामिल हो सकते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब वित्तीय संस्थाओं में सुरक्षा तंत्र की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं।