नीलोफर हत्याकांड: फरार आरोपी नईम खान फतेह जयपुर से गिरफ्तार, खरगोन पुलिस ने तय किए 3,000 km
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में चर्चित नीलोफर हत्याकांड में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है — एक महीने से अधिक समय से पाँच राज्यों में फरार चल रहे मुख्य आरोपी नईम खान फतेह को खरगोन पुलिस ने राजस्थान के जयपुर से गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस टीम ने यह गिरफ्तारी करीब 3,000 किलोमीटर की तलाश के बाद की, जिसमें अधिकारियों ने अपनी पहचान छिपाने के लिए कई भेष अपनाए।
मामले की पृष्ठभूमि
16 अगस्त को फरहान शेख ने खरगोन कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि उनकी बहन नीलोफर की 15 अगस्त को मौत हो गई थी। परिजनों के अनुसार, नीलोफर के पति ने पोस्टमार्टम कराए बिना ही शव को दफना दिया था, जिससे मृत्यु की परिस्थितियों को लेकर गंभीर संदेह उत्पन्न हुआ। परिजनों की माँग पर पुलिस ने कार्यपालिक दंडाधिकारी की उपस्थिति में शव को कब्र से बाहर निकलवाकर डॉक्टरों की एक विशेष टीम से पोस्टमार्टम कराया।
मर्ग जाँच और मामला दर्ज
पोस्टमार्टम और मर्ग जाँच के दौरान सामने आए तथ्यों एवं साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने नईम खान फतेह के विरुद्ध हत्या और साक्ष्य छिपाने से संबंधित धाराओं में प्रकरण दर्ज किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक रविंद्र वर्मा और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बिट्टू सहगल के निर्देशन में एक विशेष पुलिस टीम गठित की गई। एसडीओपी सौरभ तोमर के मार्गदर्शन में कोतवाली और जैतापुर थाना पुलिस ने आरोपी की तलाश शुरू की।
फरारी और तलाश का विवरण
खरगोन कोतवाली टीआई के अनुसार, आरोपी गिरफ्तारी से बचने के लिए इंदौर, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान में लगातार अपने ठिकाने बदलता रहा। पुलिस ने आरोपी की गिरफ्तारी के लिए ₹10,000 का इनाम घोषित करने के साथ ही नोटिस भी जारी कराया। यह ऐसे समय में आया जब आरोपी की तलाश में टीम पाँच राज्यों में बिखरी हुई थी।
पुलिस की अनूठी रणनीति
इस गिरफ्तारी को उल्लेखनीय बनाती है पुलिस की कार्यशैली — बताया जा रहा है कि तलाश के दौरान पुलिसकर्मियों ने अपना हुलिया बदलकर ढाबे पर काम किया, ई-रिक्शा चलाई, पान की दुकान पर काम किया और गैस सिलेंडर वितरण का काम भी किया। यह रणनीति आरोपी को किसी भी प्रकार की भनक लगने से रोकने के लिए अपनाई गई।
आगे की कार्रवाई
फिलहाल आरोपी नईम खान फतेह को न्यायालय में पेश कर पुलिस रिमांड पर लेने की प्रक्रिया की जा रही है। रिमांड के दौरान पुलिस हत्या की परिस्थितियों, साक्ष्य छिपाने की कोशिश और फरारी के दौरान के ठिकानों की विस्तृत जाँच करेगी। यह मामला मध्य प्रदेश में घरेलू हिंसा और संदिग्ध मौतों की जाँच प्रक्रिया पर एक बार फिर ध्यान केंद्रित करता है।