नितिन नवीन ने 82 देशों के राजनयिकों को भेजे भारतीय आमों के उपहार, सांस्कृतिक कूटनीति की अनोखी पहल
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने 24 जून 2025 को नई दिल्ली में तैनात 82 देशों के राजनयिकों को भारतीय आमों के विशेष प्रीमियम उपहार बॉक्स भेंट किए। इस पहल के ज़रिए भारत की कृषि विरासत, सांस्कृतिक पहचान और अंतरराष्ट्रीय सद्भावना को एक साथ सामने रखने की कोशिश की गई है। आम को मेहमाननवाजी, मित्रता और भारत की समृद्ध बागवानी परंपरा के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया।
पहल का स्वरूप और उद्देश्य
नितिन नवीन ने राजनयिकों को भेजे गए इन उपहार बॉक्स में भारत की चार प्रतिष्ठित आम किस्में — केसर, दशहरी, बंगनपल्ली और लंगड़ा — शामिल कीं। प्रत्येक किस्म अपने विशिष्ट स्वाद, सुगंध और क्षेत्रीय पहचान के लिए जानी जाती है। बॉक्स के साथ नवीन ने एक व्यक्तिगत संदेश भी भेजा, जिसमें भारतीय संस्कृति में आम के महत्व को रेखांकित किया गया।
इस पहल को व्यापक रूप से सांस्कृतिक कूटनीति (Cultural Diplomacy) का एक उदाहरण माना जा रहा है — जहाँ किसी देश की सॉफ्ट पावर को उसकी कृषि और खाद्य परंपराओं के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है।
भारत के आम और उनकी वैश्विक पहचान
भारत दुनिया के सबसे बड़े आम उत्पादक देशों में से एक है। उपहार बॉक्स में शामिल चारों किस्मों को भारतीय कृषि की विविधता और गुणवत्ता का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुना गया।
गिर केसर गुजरात के गिरनार पर्वत की तलहटी में उगाया जाता है। इसका चमकीला केसरिया गूदा और मीठी सुगंध इसे विशिष्ट बनाते हैं। वर्ष 2011 में इसे भौगोलिक संकेत (GI Tag) प्राप्त हुआ।
मलिहाबादी दशहरी उत्तर प्रदेश के मलिहाबाद क्षेत्र की पहचान है — पतले छिलके, रेशारहित गूदे और शहद जैसी मिठास के लिए प्रसिद्ध। वर्ष 2009 में इसे GI टैग मिला।
बनगानपल्ली आंध्र प्रदेश की प्रीमियम किस्म है — बड़े आकार, सुनहरे पीले छिलके और मजबूत रेशारहित गूदे के लिए जानी जाती है। वर्ष 2017 में इसे GI मान्यता मिली।
बनारसी लंगड़ा वाराणसी की अनूठी किस्म है जो पकने के बाद भी बाहर से हरी दिखती है, जबकि भीतर का गूदा नींबू-पीला, रसदार और मीठा-खट्टा होता है। वर्ष 2023 में इसे GI टैग प्रदान किया गया।
सांस्कृतिक कूटनीति का संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी सॉफ्ट पावर को वैश्विक मंच पर और प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने की दिशा में काम कर रहा है। गौरतलब है कि आम के माध्यम से राजनयिक सद्भावना की यह परंपरा भारत में नई नहीं है — पूर्व में भी विभिन्न अवसरों पर आम को कूटनीतिक उपहार के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है। 82 देशों के राजनयिकों तक एक साथ पहुँचना इस पहल को अपने आप में व्यापक बनाता है।
आगे की संभावनाएँ
इस पहल से भारतीय आमों के निर्यात और उनकी वैश्विक माँग को बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। GI टैग प्राप्त इन किस्मों की अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में पहले से ही अच्छी साख है, और राजनयिक स्तर पर इस तरह की पहचान उनके निर्यात को और गति दे सकती है।