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नोएडा अग्निकांड: ई-स्कूटी विस्फोट से 4 मंजिला इमारत में आग, स्नेहा श्रीवास्तव समेत 2 की मौत

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नोएडा अग्निकांड: ई-स्कूटी विस्फोट से 4 मंजिला इमारत में आग, स्नेहा श्रीवास्तव समेत 2 की मौत

सारांश

नोएडा के सेक्टर-66 में ई-स्कूटी चार्जिंग के दौरान बेसमेंट में हुए विस्फोट ने पूरी चार मंजिला इमारत को आग की चपेट में ले लिया। 22 वर्षीय स्नेहा श्रीवास्तव समेत दो की मौत, 50 परिवार बचाए गए — और एक बार फिर ई-वाहन बैटरी सुरक्षा मानकों पर सवाल खड़े हो गए।

मुख्य बातें

15 जुलाई को नोएडा के सेक्टर-66, ममूरा में चार मंजिला इमारत के बेसमेंट में ई-स्कूटी चार्जिंग के दौरान विस्फोट से भीषण आग लगी।
22 वर्षीय स्नेहा श्रीवास्तव (बिहार मूल) और एक अज्ञात 30 वर्षीय युवक की मौत; युवक 80% और स्नेहा 40% तक झुलसी थीं।
बेसमेंट में खड़ी 30 से 40 बाइकें जलकर राख; आग पर काबू पाने में 3 घंटे और 7 दमकल गाड़ियाँ लगीं।
फायर ब्रिगेड ने अस्थायी सीढ़ी-पुल बनाकर करीब 50 परिवारों को सुरक्षित निकाला; एक बच्चा और एक युवती गंभीर रूप से झुलसे।
भवन मालिक हिरासत में ; अग्नि सुरक्षा इंतज़ामों और बैटरी विस्फोट के कारणों की जाँच जारी।

नोएडा के सेक्टर-66 स्थित ममूरा क्षेत्र में बुधवार, 15 जुलाई को एक चार मंजिला इमारत के बेसमेंट में इलेक्ट्रिक स्कूटी चार्जिंग के दौरान हुए विस्फोट के बाद भड़की भीषण आग में दो लोगों की मौत हो गई। मृतकों में 22 वर्षीय स्नेहा श्रीवास्तव की पहचान हो चुकी है, जो मूल रूप से बिहार की निवासी थीं, जबकि दूसरे मृतक — करीब 30 वर्षीय एक युवक — की पहचान अभी तक नहीं हो सकी है।

हादसे का घटनाक्रम

पुलिस के अनुसार, यह दर्दनाक हादसा सुबह करीब 11 बजे उस समय हुआ जब इमारत के बेसमेंट में खड़ी एक इलेक्ट्रिक स्कूटी चार्जिंग के दौरान अचानक विस्फोट हो गया। धमाके के बाद आग तेज़ी से फैली और देखते ही देखते पूरी इमारत को अपनी चपेट में ले लिया। बेसमेंट में खड़ी 30 से 40 बाइकें जलकर राख हो गईं।

घटना के समय इमारत में बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। धुएँ और आग की लपटों के कारण ऊपरी मंजिलों पर रहने वाले निवासी फँस गए, जबकि निचली मंजिल के कुछ लोग किसी तरह बाहर निकलने में सफल रहे। आग और धुएँ का गुबार देखकर आसपास के सैकड़ों लोग मौके पर एकत्र हो गए।

बचाव अभियान और चुनौतियाँ

सूचना मिलने पर फायर ब्रिगेड की 7 गाड़ियाँ मौके पर पहुँचीं, लेकिन संकरी गलियों और भारी भीड़ के कारण दमकल वाहनों को इमारत तक पहुँचने में भारी कठिनाई हुई। वाहनों को सड़क पर ही रोककर लंबी पाइपलाइन के ज़रिए आग बुझाने का अभियान चलाया गया। आग पर पूरी तरह काबू पाने में करीब तीन घंटे का समय लगा।

फायर ब्रिगेड की टीम ने जलती इमारत की छत से सामने वाली इमारत तक सीढ़ियों का अस्थायी पुल बनाया और इसी रास्ते से करीब 50 परिवारों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। बचाव अभियान के दौरान एक बच्चा और एक युवती गंभीर रूप से झुलस गए।

मृतकों की स्थिति

पुलिस के अनुसार, अज्ञात युवक आग में लगभग 80 प्रतिशत तक झुलस गया था, जबकि स्नेहा श्रीवास्तव करीब 40 प्रतिशत तक झुलसी थीं। स्नेहा के परिजनों को घटना की सूचना दे दी गई है, वहीं पुलिस मृत युवक की पहचान कराने के प्रयास में जुटी है।

जाँच और कानूनी कार्रवाई

पुलिस ने भवन मालिक को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। जाँच में यह भी देखा जा रहा है कि इमारत में अग्नि सुरक्षा के पर्याप्त इंतज़ाम थे या नहीं। बताया जा रहा है कि इस चार मंजिला भवन में करीब 50 कमरे थे, जहाँ बड़ी संख्या में नौकरीपेशा लोग अपने परिवारों के साथ रहते थे। प्रारंभिक जाँच में हादसे की वजह इलेक्ट्रिक स्कूटी की बैटरी में विस्फोट को माना जा रहा है, हालाँकि मामले की विस्तृत जाँच अभी जारी है। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब देश में ई-वाहनों की बढ़ती संख्या के साथ बैटरी सुरक्षा मानकों पर सवाल उठते रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी आवासीय इमारतों के बेसमेंट में ई-वाहन चार्जिंग पर कोई बाध्यकारी नियामक ढाँचा नहीं है। भवन मालिक की गिरफ़्तारी ज़रूरी कदम है, लेकिन असली सवाल यह है कि नगर निकाय और अग्नि विभाग ने इमारत की अग्नि सुरक्षा अनुपालन की आखिरी बार जाँच कब की थी। जब तक ई-वाहन चार्जिंग के लिए समर्पित, वेंटिलेटेड और अग्निरोधी स्थान अनिवार्य नहीं किए जाते, ऐसी त्रासदियाँ दोहराती रहेंगी।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नोएडा सेक्टर-66 में आग कैसे लगी?
पुलिस की प्रारंभिक जाँच के अनुसार, इमारत के बेसमेंट में खड़ी एक इलेक्ट्रिक स्कूटी चार्जिंग के दौरान अचानक विस्फोट हो गया, जिससे आग भड़की और पूरी चार मंजिला इमारत चपेट में आ गई। मामले की विस्तृत जाँच अभी जारी है।
नोएडा अग्निकांड में कितने लोगों की मौत हुई और कौन थे?
इस हादसे में दो लोगों की मौत हुई। मृतकों में 22 वर्षीय स्नेहा श्रीवास्तव, जो बिहार मूल की थीं, की पहचान हो चुकी है। दूसरे मृतक करीब 30 वर्षीय एक युवक हैं, जिनकी पहचान अभी तक नहीं हो सकी है।
नोएडा आग में कितने परिवार फँसे और कैसे बचाए गए?
घटना के समय इमारत में बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। फायर ब्रिगेड की टीम ने जलती इमारत की छत से सामने वाली इमारत तक सीढ़ियों का अस्थायी पुल बनाकर करीब 50 परिवारों को सुरक्षित बाहर निकाला।
नोएडा अग्निकांड के बाद पुलिस ने क्या कार्रवाई की?
पुलिस ने भवन मालिक को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। साथ ही यह भी जाँचा जा रहा है कि इमारत में अग्नि सुरक्षा के पर्याप्त इंतज़ाम थे या नहीं। स्नेहा श्रीवास्तव के परिजनों को सूचित कर दिया गया है।
क्या ई-स्कूटी चार्जिंग से आग लगने की यह पहली घटना है?
नहीं, देशभर में पिछले कुछ वर्षों में ई-वाहन बैटरी विस्फोट और आग की कई घटनाएँ सामने आ चुकी हैं। यह हादसा आवासीय इमारतों में ई-वाहन चार्जिंग सुरक्षा मानकों और अग्नि नियमों के पालन पर एक बार फिर सवाल खड़े करता है।
राष्ट्र प्रेस
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