नोएडा: छात्र हर्षित भट्ट की मौत से जुड़ी नई जानकारी, विवादित भूमि पर थी घटना
सारांश
Key Takeaways
- छात्र हर्षित भट्ट की मृत्यु ने प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए हैं।
- घटना विवादित भूमि पर हुई, जहां सुरक्षा के इंतजाम नहीं थे।
- स्थानीय निवासियों ने सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है।
- भूमि विवाद 2022 से आर्बिट्रेशन में है।
- पूर्व सीईओ ने करार रद्द किया था, लेकिन कब्जा आरएनएन के पास बना रहा।
नोएडा, 9 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश के नोएडा में एक दुखद घटना ने प्रशासनिक व्यवस्थाओं और जमीन विवादों पर गंभीर प्रश्न उठाए हैं। हाल ही में गड्ढे में भरे पानी में डूबने से छात्र हर्षित भट्ट की मृत्यु हो गई। इस मामले में नई जानकारी सामने आई है।
यह घटना उस भूमि पर हुई, जिसे नोएडा अथॉरिटी ने हैबिटेट सेंटर के निर्माण के लिए उत्तर प्रदेश राज्य निर्माण निगम को आवंटित किया था। वर्तमान में यह जगह यूपी आरएनएन के कब्जे में थी, जहां सुरक्षा के लिए कर्मियों की तैनाती की गई थी।
सूत्रों के अनुसार, जिस स्थान पर यह दुर्घटना हुई, वहां निर्माण कार्य लंबे समय से रुका हुआ था और गहरे गड्ढों में पानी भरा हुआ था। स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस क्षेत्र में सुरक्षा के लिए उचित इंतजाम नहीं थे, जिसके कारण यह दुखद घटना हुई।
यह भी सवाल उठता है कि जब सुरक्षा कर्मी तैनात थे, तो यह घटना कैसे घटित हुई। इस मामले में भूमि स्वामित्व को लेकर भी विवाद चल रहा है। वर्ष 2022 से यह मामला आर्बिट्रेशन में है। नोएडा अथॉरिटी और आरएनएन के बीच इस भूमि को लेकर मतभेद लंबे समय से हैं।
पूर्व सीईओ रितु माहेश्वरी ने वर्ष 2022 में हुई 205वीं बोर्ड बैठक में आरएनएन के साथ किया गया करार रद्द कर दिया था। इसके बाद इस परियोजना को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर विकसित करने का प्रस्ताव भी पारित किया गया था। हालाँकि, करार रद्द होने के बावजूद भूमि का कब्जा आरएनएन के पास बना रहा, जिससे स्थिति और जटिल हो गई। निर्माण कार्य न होने और सुरक्षा के अभाव में यह स्थान दुर्घटनाओं के लिए संवेदनशील बन गया है।
स्थानीय निवासियों ने मांग की है कि ऐसे खतरनाक स्थलों को तुरंत सुरक्षित किया जाए और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।