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नोमैडिक एलीफेंट-2026: पिथौरागढ़ में भारत-मंगोलिया के 18वें संयुक्त सैन्य अभ्यास का सफल समापन

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नोमैडिक एलीफेंट-2026: पिथौरागढ़ में भारत-मंगोलिया के 18वें संयुक्त सैन्य अभ्यास का सफल समापन

सारांश

उत्तराखंड के पहाड़ों में भारत और मंगोलिया का 18वाँ 'नोमैडिक एलीफेंट' अभ्यास संपन्न हुआ — ड्रोन, साइबर सुरक्षा और हेलिबोर्न अभियानों से लैस यह संयुक्त प्रशिक्षण सिर्फ युद्धकौशल नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक विश्वास की नई इबारत लिखता है।

मुख्य बातें

भारत-मंगोलिया के बीच 18वाँ 'नोमैडिक एलीफेंट-2026' सैन्य अभ्यास 3 अक्टूबर 2026 को पिथौरागढ़, उत्तराखंड में सम्पन्न हुआ।
अभ्यास 20 सितंबर से 3 अक्टूबर तक 14 दिनों तक चला और तीन चरणों — एकीकरण, संयुक्त प्रशिक्षण और मूल्यांकन — में आयोजित हुआ।
ड्रोन संचालन, साइबर सुरक्षा, हेलिबोर्न अभियान और निशानेबाजी सहित आधुनिक युद्धक्षेत्र कौशल पर विशेष फोकस रहा।
खेल गतिविधियों और समापन समारोह ने दोनों देशों के सैनिकों के बीच सांस्कृतिक और व्यक्तिगत संबंध मज़बूत किए।
रक्षा अधिकारियों के अनुसार अभ्यास ने भारत-मंगोलिया रक्षा सहयोग को नई मज़बूती दी और संयुक्त संचालन क्षमता बढ़ाई।

भारत और मंगोलिया की सेनाओं के बीच 18वें संयुक्त सैन्य अभ्यास 'नोमैडिक एलीफेंट-2026' का 3 अक्टूबर 2026 को पिथौरागढ़, उत्तराखंड में सफलतापूर्वक समापन हुआ। 20 सितंबर से शुरू हुए इस 14-दिवसीय अभ्यास में दोनों देशों के सैनिकों ने ड्रोन संचालन, साइबर सुरक्षा, हेलिबोर्न अभियान और उच्च-तीव्रता वाले सामरिक युद्धाभ्यास में संयुक्त दक्षता हासिल की। रक्षा अधिकारियों के अनुसार यह अभ्यास दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग की बढ़ती गहराई का प्रमाण है।

अभ्यास के तीन चरण

अभ्यास को तीन सुनियोजित चरणों में विभाजित किया गया था। 20 से 23 सितंबर तक चले एकीकरण चरण में दोनों देशों के सैनिकों ने एक-दूसरे की सैन्य प्रक्रियाओं, संचार प्रणालियों और प्रशिक्षण पद्धतियों को समझा। इस चरण ने परस्पर विश्वास और समन्वय की नींव रखी।

24 से 30 सितंबर तक चला संयुक्त प्रशिक्षण और युद्धाभ्यास चरण इस अभ्यास का मुख्य आधार रहा। इस दौरान सैनिकों ने विभिन्न सामरिक परिदृश्यों में एकजुट होकर कार्रवाई करने का कौशल विकसित किया। अंतिम मूल्यांकन चरण 1 और 2 अक्टूबर को संपन्न हुआ, जिसमें दोनों सेनाओं ने प्रशिक्षण के दौरान अर्जित क्षमताओं को वास्तविक संयुक्त परिदृश्यों में परखा।

आधुनिक युद्धक्षेत्र की तैयारी

अभ्यास की विशेषता यह रही कि इसका दायरा पारंपरिक हथियार-प्रशिक्षण से कहीं आगे था। ड्रोन संचालन और साइबर सुरक्षा को विशेष प्राथमिकता दी गई, जो आधुनिक संघर्षों में तेज़ी से निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं। इसके साथ ही हेलिबोर्न अभियानों का भी अभ्यास किया गया, जिसमें युद्ध-क्षेत्र में घायल सैनिकों को चिकित्सा उपचार देकर सुरक्षित निकालने की प्रक्रिया शामिल थी। खुफिया एवं निगरानी गतिविधियाँ और उच्च-स्तरीय निशानेबाजी प्रशिक्षण भी कार्यक्रम का हिस्सा रहे।

गौरतलब है कि उत्तराखंड के पर्वतीय भूभाग में आयोजित यह अभ्यास दोनों सेनाओं को दुर्गम इलाकों में तेज़ और प्रभावी संयुक्त कार्रवाई का अनुभव देने के लिहाज़ से विशेष रूप से महत्वपूर्ण था।

सांस्कृतिक आदान-प्रदान और खेल गतिविधियाँ

सैन्य प्रशिक्षण के समानांतर खेल गतिविधियों ने दोनों देशों के सैनिकों के बीच व्यक्तिगत संबंध और मित्रता को प्रगाढ़ किया। मैदानी प्रतिस्पर्धाओं ने टीमवर्क और आपसी सद्भाव को बढ़ावा दिया। समापन समारोह में भारत और मंगोलिया की समृद्ध सांस्कृतिक एवं सैन्य विरासत की झाँकी प्रस्तुत की गई, जिसने दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक मित्रता को और सुदृढ़ किया।

रक्षा सहयोग की व्यापक तस्वीर

रक्षा अधिकारियों के अनुसार, 18वें 'नोमैडिक एलीफेंट' का सफल समापन भारत-मंगोलिया रक्षा साझेदारी की परिपक्वता को दर्शाता है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपने पड़ोसी देशों और मित्र राष्ट्रों के साथ बहु-आयामी रक्षा संबंधों को नई ऊँचाई दे रहा है। यह अभ्यास केवल सैन्य दक्षता बढ़ाने तक सीमित नहीं रहा — इसने परस्पर विश्वास, अनुभवों के आदान-प्रदान और संयुक्त संचालन क्षमता को भी मज़बूत आधार दिया है।

आगामी वर्षों में इस अभ्यास के दायरे और प्रतिभागियों की संख्या में और वृद्धि की संभावना जताई जा रही है, जो भारत की 'पड़ोस प्रथम' और विस्तारित रक्षा कूटनीति के अनुरूप होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह सवाल भी उठता है कि कितने अभ्यास वास्तविक संयुक्त परिचालन तत्परता में तब्दील होते हैं और कितने कूटनीतिक प्रतीकवाद तक सीमित रहते हैं। इसका उत्तर तब मिलेगा जब इन साझेदारियों को किसी वास्तविक बहुपक्षीय संकट में परखा जाए।
RashtraPress
4 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नोमैडिक एलीफेंट-2026 अभ्यास क्या है?
नोमैडिक एलीफेंट भारत और मंगोलिया की सेनाओं के बीच आयोजित वार्षिक द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास है। इसका 18वाँ संस्करण 20 सितंबर से 3 अक्टूबर 2026 तक उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में आयोजित हुआ।
इस अभ्यास में किन-किन गतिविधियों पर फोकस किया गया?
अभ्यास में ड्रोन संचालन, साइबर सुरक्षा, हेलिबोर्न अभियान, खुफिया एवं निगरानी, निशानेबाजी और घायल सैनिकों की सुरक्षित निकासी जैसी आधुनिक युद्धक्षेत्र गतिविधियाँ शामिल थीं। यह अभ्यास पारंपरिक युद्धकौशल से आगे बढ़कर तकनीकी दक्षता पर भी केंद्रित रहा।
अभ्यास के कितने चरण थे और वे कब हुए?
अभ्यास तीन चरणों में हुआ — एकीकरण चरण (20-23 सितंबर), संयुक्त प्रशिक्षण और युद्धाभ्यास (24-30 सितंबर) और अंतिम मूल्यांकन चरण (1-2 अक्टूबर)। प्रत्येक चरण ने दोनों सेनाओं के बीच समन्वय और संयुक्त क्षमता को क्रमशः विकसित किया।
यह अभ्यास भारत-मंगोलिया संबंधों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
रक्षा अधिकारियों के अनुसार यह अभ्यास दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग, आपसी विश्वास और संयुक्त संचालन क्षमता को मज़बूत करता है। यह भारत की व्यापक रक्षा कूटनीति का भी हिस्सा है जिसमें मध्य एशियाई देशों के साथ संबंध गहरे किए जा रहे हैं।
नोमैडिक एलीफेंट का यह संस्करण पहले के अभ्यासों से किस तरह अलग था?
18वें संस्करण में ड्रोन और साइबर सुरक्षा जैसे अत्याधुनिक डोमेन को विशेष प्राथमिकता दी गई, जो पिछले संस्करणों की तुलना में आधुनिक युद्धक्षेत्र की ज़रूरतों के प्रति बढ़ती जागरूकता को दर्शाता है। इसके अलावा सांस्कृतिक आदान-प्रदान और खेल गतिविधियों पर भी ध्यान दिया गया।
राष्ट्र प्रेस
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