नूंह के घासेड़ा गांव में पुलिस-गोतस्कर मुठभेड़, जवाबी फायरिंग में तस्कर दिलशाद के पैर में लगी गोली
सारांश
मुख्य बातें
हरियाणा के नूंह जिले के सदर थाना क्षेत्र स्थित घासेड़ा गांव में 1 नवंबर 2026 को सीआईए (CIA) नूंह की टीम और एक गोतस्कर के बीच मुठभेड़ हो गई। पुलिस के अनुसार तस्कर ने पहले पुलिस टीम पर फायर किया, जिसके जवाब में पुलिस ने की गई कार्रवाई में आरोपी के पैर में गोली लग गई। आरोपी की पहचान दिलशाद उर्फ दिल्ला, निवासी सुडाका, के रूप में हुई है।
मुठभेड़ का घटनाक्रम
सीआईए इंचार्ज निरीक्षक विनोद कुमार के नेतृत्व में पुलिस टीम घासेड़ा गांव में कार्रवाई के लिए पहुँची थी। पुलिस के बयान के अनुसार आरोपी दिलशाद ने टीम पर सीधी फायरिंग की, जिसके बाद आत्मरक्षार्थ जवाबी कार्रवाई की गई और तस्कर पैर में गोली लगने के बाद घायल हो गया।
मौके से पुलिस ने 3 गोवंश, एक देसी कट्टा और एक कारतूस बरामद किया। घायल आरोपी को तत्काल शहीद हसन खां नल्हड़ मेडिकल कॉलेज, नूंह में भर्ती कराया गया, जहाँ उसका उपचार जारी है।
आरोपी की पृष्ठभूमि
पुलिस के प्रारंभिक जाँच के अनुसार दिलशाद गोतस्करी के धंधे में सक्रिय था। घटनास्थल पर बरामद हथियार और पशु इस बात के संकेत देते हैं कि तस्कर गोवंश की अवैध ढुलाई की फिराक में था। मामले में आगे की जाँच जारी है।
पिछली समान घटनाएँ
यह घटना अकेली नहीं है। इससे पहले 17 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में पुलिस ने एक शातिर गोतस्कर को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया था। बलिया सीओ सतीश कुमार के अनुसार आरोपी सगुनी नट ने शाहपुर नट बस्ती नहर पुलिया के पास घिरने पर पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी थी, जिसकी जवाबी कार्रवाई में उसके बाएँ पैर में गोली लगी थी। पूछताछ में पता चला था कि आरोपी आवारा गोवंशीय पशुओं को वाहन में लादकर वध के लिए बिहार ले जाता था।
इससे भी पहले 23 सितंबर को उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में पुलिस ने मुठभेड़ के बाद तीन गोतस्करों को गिरफ्तार किया था। उस कार्रवाई में एक आरोपी के पैर में गोली लगी थी और पुलिस ने तमंचा, कारतूस, चाकू तथा एक मोटरसाइकिल बरामद की थी।
व्यापक संदर्भ
गौरतलब है कि हरियाणा और उत्तर प्रदेश में गोतस्करी विरोधी अभियान पिछले कुछ महीनों में तेज़ हुए हैं। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य पुलिस बलों ने अंतर-राज्यीय गोतस्करी नेटवर्क को तोड़ने के लिए समन्वित अभियान चला रखे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि तस्करों द्वारा पुलिस पर फायरिंग की बढ़ती घटनाएँ इन गिरोहों के संगठित और हथियारबंद होने की ओर इशारा करती हैं। आगे पुलिस इस मामले में दिलशाद के संभावित साथियों की पहचान और गिरफ्तारी की दिशा में जाँच जारी रखेगी।