1 नवंबर 2026
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नूंह के घासेड़ा गांव में पुलिस-गोतस्कर मुठभेड़, जवाबी फायरिंग में तस्कर दिलशाद के पैर में लगी गोली

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नूंह के घासेड़ा गांव में पुलिस-गोतस्कर मुठभेड़, जवाबी फायरिंग में तस्कर दिलशाद के पैर में लगी गोली

सारांश

हरियाणा के नूंह में सीआईए पुलिस और गोतस्कर के बीच जानलेवा मुठभेड़ — तस्कर ने पहले फायर किया, जवाब में पुलिस की गोली ने उसे पैर में घायल किया। मौके से 3 गोवंश और देसी कट्टा बरामद। यह अक्टूबर-सितंबर की इसी तरह की घटनाओं की श्रृंखला में ताज़ा कड़ी है।

मुख्य बातें

1 नवंबर 2026 को नूंह के घासेड़ा गांव में सीआईए टीम और गोतस्कर के बीच मुठभेड़ हुई।
आरोपी दिलशाद उर्फ दिल्ला , निवासी सुडाका, के पैर में गोली लगी; उसे शहीद हसन खां नल्हड़ मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया।
मौके से 3 गोवंश , एक देसी कट्टा और एक कारतूस बरामद।
कार्रवाई सीआईए इंचार्ज निरीक्षक विनोद कुमार के नेतृत्व में हुई।
17 अक्टूबर को बलिया और 23 सितंबर को गोंडा में भी इसी तरह की मुठभेड़ हो चुकी हैं।

हरियाणा के नूंह जिले के सदर थाना क्षेत्र स्थित घासेड़ा गांव में 1 नवंबर 2026 को सीआईए (CIA) नूंह की टीम और एक गोतस्कर के बीच मुठभेड़ हो गई। पुलिस के अनुसार तस्कर ने पहले पुलिस टीम पर फायर किया, जिसके जवाब में पुलिस ने की गई कार्रवाई में आरोपी के पैर में गोली लग गई। आरोपी की पहचान दिलशाद उर्फ दिल्ला, निवासी सुडाका, के रूप में हुई है।

मुठभेड़ का घटनाक्रम

सीआईए इंचार्ज निरीक्षक विनोद कुमार के नेतृत्व में पुलिस टीम घासेड़ा गांव में कार्रवाई के लिए पहुँची थी। पुलिस के बयान के अनुसार आरोपी दिलशाद ने टीम पर सीधी फायरिंग की, जिसके बाद आत्मरक्षार्थ जवाबी कार्रवाई की गई और तस्कर पैर में गोली लगने के बाद घायल हो गया।

मौके से पुलिस ने 3 गोवंश, एक देसी कट्टा और एक कारतूस बरामद किया। घायल आरोपी को तत्काल शहीद हसन खां नल्हड़ मेडिकल कॉलेज, नूंह में भर्ती कराया गया, जहाँ उसका उपचार जारी है।

आरोपी की पृष्ठभूमि

पुलिस के प्रारंभिक जाँच के अनुसार दिलशाद गोतस्करी के धंधे में सक्रिय था। घटनास्थल पर बरामद हथियार और पशु इस बात के संकेत देते हैं कि तस्कर गोवंश की अवैध ढुलाई की फिराक में था। मामले में आगे की जाँच जारी है।

पिछली समान घटनाएँ

यह घटना अकेली नहीं है। इससे पहले 17 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में पुलिस ने एक शातिर गोतस्कर को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया था। बलिया सीओ सतीश कुमार के अनुसार आरोपी सगुनी नट ने शाहपुर नट बस्ती नहर पुलिया के पास घिरने पर पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी थी, जिसकी जवाबी कार्रवाई में उसके बाएँ पैर में गोली लगी थी। पूछताछ में पता चला था कि आरोपी आवारा गोवंशीय पशुओं को वाहन में लादकर वध के लिए बिहार ले जाता था।

इससे भी पहले 23 सितंबर को उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में पुलिस ने मुठभेड़ के बाद तीन गोतस्करों को गिरफ्तार किया था। उस कार्रवाई में एक आरोपी के पैर में गोली लगी थी और पुलिस ने तमंचा, कारतूस, चाकू तथा एक मोटरसाइकिल बरामद की थी।

व्यापक संदर्भ

गौरतलब है कि हरियाणा और उत्तर प्रदेश में गोतस्करी विरोधी अभियान पिछले कुछ महीनों में तेज़ हुए हैं। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य पुलिस बलों ने अंतर-राज्यीय गोतस्करी नेटवर्क को तोड़ने के लिए समन्वित अभियान चला रखे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि तस्करों द्वारा पुलिस पर फायरिंग की बढ़ती घटनाएँ इन गिरोहों के संगठित और हथियारबंद होने की ओर इशारा करती हैं। आगे पुलिस इस मामले में दिलशाद के संभावित साथियों की पहचान और गिरफ्तारी की दिशा में जाँच जारी रखेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि हथियारबंद भी हैं और सशस्त्र प्रतिरोध के लिए तैयार हैं। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर व्यक्तिगत मुठभेड़ों को अलग-अलग रिपोर्ट करती है, जबकि असली सवाल यह है कि ये नेटवर्क किस तरह राज्यों की सीमाओं के पार काम करते हैं और इन्हें हथियार कहाँ से मिल रहे हैं। जवाबी फायरिंग की प्रक्रियागत पारदर्शिता भी ज़रूरी है — हर मामले में घायल तस्कर के पैर में ही गोली लगना एक ऐसा सांख्यिकीय संयोग है जिस पर स्वतंत्र जाँच उचित होगी।
RashtraPress
1 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नूंह मुठभेड़ में क्या हुआ?
1 नवंबर 2026 को हरियाणा के नूंह जिले के घासेड़ा गांव में सीआईए पुलिस टीम और गोतस्कर दिलशाद उर्फ दिल्ला के बीच मुठभेड़ हुई। पुलिस के अनुसार आरोपी ने पहले फायर किया, जिसके जवाब में की गई कार्रवाई में उसके पैर में गोली लगी।
घायल तस्कर दिलशाद को कहाँ भर्ती कराया गया?
घायल आरोपी दिलशाद को शहीद हसन खां नल्हड़ मेडिकल कॉलेज, नूंह में भर्ती कराया गया है, जहाँ उसका उपचार चल रहा है।
पुलिस ने मौके से क्या बरामद किया?
मौके से पुलिस ने 3 गोवंश, एक देसी कट्टा और एक कारतूस बरामद किया। यह कार्रवाई सीआईए इंचार्ज निरीक्षक विनोद कुमार के नेतृत्व में हुई।
क्या इस तरह की घटनाएँ पहले भी हुई हैं?
हाँ, 17 अक्टूबर को बलिया (उत्तर प्रदेश) में और 23 सितंबर को गोंडा (उत्तर प्रदेश) में भी इसी तरह की पुलिस-गोतस्कर मुठभेड़ें हो चुकी हैं। दोनों मामलों में आरोपियों ने पुलिस पर फायरिंग की थी और घायल होने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
राष्ट्र प्रेस
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