लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग में किए दर्शन, देशवासियों की सुख-समृद्धि के लिए माँगा आशीर्वाद
सारांश
मुख्य बातें
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 13 जुलाई 2025 को महाराष्ट्र के नासिक जिले में स्थित भगवान शिव के पवित्र त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में दर्शन और विधिवत पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर उन्होंने आरती में भाग लिया और देश की प्रगति, शांति, समृद्धि तथा नागरिकों के उत्तम स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना की। मंदिर प्रशासन ने उनका पारंपरिक तरीके से स्वागत किया।
कुशावर्त तीर्थ में भी की पूजा-अर्चना
त्र्यंबकेश्वर मंदिर में दर्शन से पूर्व ओम बिरला ने तीर्थराज कुशावर्त कुंड में भी विधिवत पूजन किया। हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह कुंड गोदावरी नदी का उद्गम स्थल माना जाता है और इसका विशेष आध्यात्मिक महत्व है। गौरतलब है कि सावन मास और अन्य पर्वों पर इस स्थान पर देशभर से लाखों श्रद्धालु पहुँचते हैं।
मुख्य घटनाक्रम और उपस्थित गणमान्य
मंदिर प्रशासन के अनुसार दर्शन के दौरान जिला एवं पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। इनमें त्र्यंबक नगर परिषद की नगराध्यक्ष त्रिवेणी तुंगार, निवासी उपजिलाधिकारी रोहितकुमार राजपूत, सहायक जिलाधिकारी डॉ. पवन दत्ता, प्रशिक्षु जिलाधिकारी डॉ. जयकुमार आढे, तहसीलदार गणेश जाधव, पुलिस निरीक्षक प्रीतम चौधरी, मंदिर संस्थान के विश्वस्त कैलास घुले और रुपाली भुतड़ा शामिल थे। त्र्यंबकेश्वर पुरोहित संघ के अध्यक्ष मनोज थेटे भी इस अवसर पर उपस्थित रहे। लोकसभा अध्यक्ष की यात्रा को देखते हुए मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में व्यापक सुरक्षा प्रबंध किए गए थे।
एक्स पर साझा किया आध्यात्मिक अनुभव
दर्शन के उपरांत ओम बिरला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी आध्यात्मिक यात्रा का अनुभव साझा किया। उन्होंने महामृत्युंजय मंत्र का उल्लेख करते हुए लिखा कि उन्हें महाराष्ट्र के नासिक में स्थित भगवान शिव के आठवें ज्योतिर्लिंग श्री त्र्यंबकेश्वर धाम में दर्शन और पूजा-अर्चना का सौभाग्य प्राप्त हुआ। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भगवान शिव की कृपा भारत की आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक विरासत और जनकल्याण की भावना को निरंतर सशक्त बनाती रहेगी।
त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग का महत्व
त्र्यंबकेश्वर मंदिर देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालु यहाँ दर्शन के लिए आते हैं। सावन मास और कुंभ मेले जैसे धार्मिक अवसरों पर इस मंदिर का महत्व और भी बढ़ जाता है। यह ऐसे समय में आया है जब सावन माह की शुरुआत निकट है और मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है।