श्रीनगर एयरपोर्ट अक्टूबर बंदी पर उमर अब्दुल्ला ने उड्डयन मंत्री से की मुलाकात, विकल्प तलाशने की अपील
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने 12 जून को नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू किंजरापु से नई दिल्ली में मुलाकात की और 1 अक्टूबर से 15 अक्टूबर तक श्रीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को रखरखाव के लिए पूरी तरह बंद करने के प्रस्ताव पर गहरी चिंता जताई। मुख्यमंत्री ने तर्क दिया कि यह अवधि कश्मीर के पर्यटन के सबसे व्यस्त मौसम के साथ टकराती है, जिससे घाटी की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हो सकता है।
मुख्यमंत्री की मांग और सुझाव
उमर अब्दुल्ला ने उड्डयन मंत्री से आग्रह किया कि रखरखाव के शेड्यूल की समीक्षा की जाए और यदि संभव हो तो इसे छोटा किया जाए, चरणों में विभाजित किया जाए, अथवा यात्रा के कम व्यस्त समय में स्थानांतरित किया जाए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि बंदी के दौरान अवंतीपोरा एयर बेस से सीमित नागरिक उड़ानें संचालित की जाएं, ताकि निवासियों, पर्यटकों और व्यवसायों के लिए न्यूनतम हवाई संपर्क बना रहे।
मुख्यमंत्री ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ हुई बैठक के बाद उन्होंने उड्डयन मंत्री से अक्टूबर बंदी के प्रस्ताव पर चर्चा की। उन्होंने कहा, 'हम परेशानी को कम करने और बेसिक फ्लाइट शेड्यूल बनाए रखने के लिए संभावित विकल्पों पर काम कर रहे हैं, जैसा कि 1998 और 2010 में इसी तरह के कारणों से एयरपोर्ट बंद होने पर किया गया था।'
बंदी की पृष्ठभूमि और चरणबद्ध योजना
हवाई अड्डा अधिकारियों के अनुसार, रनवे की मरम्मत परिचालन सुरक्षा के लिए अनिवार्य है। भारतीय वायु सेना द्वारा जारी 'नोटिस टू एयरमेन' के बाद 6 अप्रैल से ही उड़ानों पर आंशिक प्रतिबंध लागू है। पूर्ण बंदी से पहले चरणबद्ध रखरखाव का काम जुलाई से शुरू होगा, जिसके तहत हर सप्ताह सोमवार और मंगलवार को हवाई अड्डा बंद रहेगा। इसका समापन 1 से 15 अक्टूबर तक की पूर्ण 15-दिवसीय बंदी के रूप में होगा।
पर्यटन और अर्थव्यवस्था पर असर
अक्टूबर में दुर्गा पूजा की छुट्टियों के दौरान पश्चिम बंगाल सहित देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में पर्यटक कश्मीर आते हैं। ट्रैवल ऑपरेटरों को आशंका है कि बंदी के कारण बड़े पैमाने पर बुकिंग रद्द होंगी और होटल व पर्यटन क्षेत्र को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। श्रीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर औसतन प्रतिदिन लगभग 4,000 यात्री आवागमन करते हैं।
गौरतलब है कि फिलहाल अधिकांश पर्यटक हवाई मार्ग अथवा जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग से घाटी पहुँचते हैं। जम्मू तक रेल सेवाएं उपलब्ध हैं, लेकिन जम्मू से श्रीनगर के बीच रेल संपर्क अभी पूरी तरह चालू नहीं है, जिससे हवाई मार्ग की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।
विशेषज्ञ और उद्योग की प्रतिक्रिया
होटल और पर्यटन क्षेत्र से जुड़े हितधारक लगातार समयसीमा पर पुनर्विचार की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि साल के सबसे व्यस्त घरेलू पर्यटन सीजन में हवाई संपर्क बाधित होने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को गंभीर झटका लग सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर प्रशासन पर्यटन को आर्थिक पुनरुद्धार का मुख्य आधार मान रहा है।
आगे क्या होगा
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और केंद्रीय उड्डयन मंत्रालय के बीच विकल्पों पर विचार-विमर्श जारी है। अवंतीपोरा एयर बेस से नागरिक उड़ानों की संभावना पर रक्षा मंत्रालय की सहमति भी आवश्यक होगी, जिसके लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से पहले ही बातचीत हो चुकी है। अंतिम निर्णय की प्रतीक्षा है।