11 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

पद्मश्री पंडित शिवनाथ मिश्र: बनारस घराने के सितार सम्राट जिन्होंने ठुमरी को दिलाई विश्व पहचान

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
पद्मश्री पंडित शिवनाथ मिश्र: बनारस घराने के सितार सम्राट जिन्होंने ठुमरी को दिलाई विश्व पहचान

सारांश

12 अक्टूबर को 83 वर्ष के हो रहे पद्मश्री पंडित शिवनाथ मिश्र उस दुर्लभ परंपरा के संवाहक हैं, जहाँ सितार और ठुमरी एक साथ साँस लेते हैं। पंडित रविशंकर के बाद पद्म सम्मान पाने वाले दूसरे सितार वादक — काशी की यह आवाज़ आज भी दुनिया भर को अपनी ओर खींचती है।

मुख्य बातें

पंडित शिवनाथ मिश्र का जन्म 12 अक्टूबर 1943 को वाराणसी , उत्तर प्रदेश में हुआ था; 12 अक्टूबर 2026 को वे 83 वर्ष के हो रहे हैं।
वे बनारस घराने से ताल्लुक रखते हैं और सितार वादन तथा ठुमरी गायन दोनों में पारंगत हैं।
मात्र 8 वर्ष की आयु में चाचा स्वर्गीय पंडित महादेव प्रसाद मिश्र से शास्त्रीय संगीत की दीक्षा ली।
सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के संगीत विभाग में विभागाध्यक्ष रहे।
वर्ष 2022 में पद्म श्री से सम्मानित; पंडित रविशंकर के बाद यह सम्मान पाने वाले दूसरे सितार वादक।
पुत्र एवं शिष्य देवव्रत मिश्र गुरु-शिष्य परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।

पद्मश्री पंडित शिवनाथ मिश्र — बनारस घराने के शिखर सितार वादक और ठुमरी के अप्रतिम साधक — का 12 अक्टूबर 2026 को 83वाँ जन्मदिन है। 12 अक्टूबर 1943 को वाराणसी, उत्तर प्रदेश में जन्मे पंडित मिश्र ने भारतीय शास्त्रीय संगीत की तंत्रकारी परंपरा को न केवल देश में, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी अमिट पहचान दिलाई। सितार वादन की दुनिया में पंडित रविशंकर के बाद पद्म पुरस्कार पाने वाले वे दूसरे सितार वादक हैं — यह तथ्य अकेले उनकी ऐतिहासिक स्थिति को रेखांकित करता है।

बचपन से संगीत की साधना

पंडित शिवनाथ मिश्र ने मात्र 8 वर्ष की अल्प आयु में भारतीय शास्त्रीय संगीत — गायन और सितार दोनों — की विधिवत शिक्षा अपने चाचा एवं 'ठुमरी सम्राट' स्वर्गीय पंडित महादेव प्रसाद मिश्र के सान्निध्य में प्रारंभ की। गुरु-शिष्य की यही परंपरा आज भी उनके घराने की पहचान है। काशी की संगीत-भूमि में पले-बढ़े पंडित मिश्र ने बनारस घराने की विशिष्ट गमक और ठुमरी के भाव-प्रवाह को अपनी सितार में ऐसे पिरोया कि दोनों विधाएँ एक-दूसरे की पूरक बन गईं।

शिक्षा और अकादमिक योगदान

संगीत की साधना के साथ-साथ पंडित शिवनाथ मिश्र ने अकादमिक क्षेत्र में भी उल्लेखनीय योगदान दिया। वे सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के संगीत विभाग में विभागाध्यक्ष रहे। इस दायित्व में उन्होंने अनगिनत युवा संगीतकारों को शास्त्रीय परंपरा की गहरी जड़ों से जोड़ा। उनके शिष्य आज देश-विदेश में सक्रिय हैं, और दुनिया भर से विद्यार्थी संगीत सीखने वाराणसी आते हैं।

पद्मश्री सम्मान: काशी में उत्सव का माहौल

वर्ष 2022 में जब केंद्र सरकार ने उन्हें पद्म श्री से सम्मानित करने की घोषणा की, तो वाराणसी में उनके आवास पर बधाई देने वालों का ऐसा तांता लगा कि भीड़ को संभालना कठिन हो गया। यह दृश्य इस बात का प्रमाण था कि काशी की जनता उन्हें कितना आदर और स्नेह देती है। गौरतलब है कि तंतु वादन — अर्थात् तार वाद्य — के क्षेत्र में पद्म सम्मान अत्यंत विरल है; तबला और गायन की तुलना में यह पुरस्कार सितार वादकों को कम ही मिलता रहा है।

पुत्र और शिष्य देवव्रत मिश्र की भावना

पंडित जी के पुत्र एवं शिष्य देवव्रत मिश्र ने पद्मश्री की घोषणा पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा था: 'मेरे पिता जी मेरे गुरु भी हैं और उनका पद्म श्री से सम्मानित होना बहुत बड़ी बात है। सितार तंत्रकारी के क्षेत्र में यह सम्मान उनके लिए एक महत्वपूर्ण मान्यता है।' देवव्रत ने यह भी रेखांकित किया कि गुरु-शिष्य परंपरा को आज भी जीवित रखा जा रहा है, और भारतीय संस्कृति की गहराइयों को समझने के इच्छुक लोग विश्व के कोने-कोने से वाराणसी का रुख करते हैं।

काशी की अमूल्य सांस्कृतिक विरासत

पंडित शिवनाथ मिश्र का संगीत-समर्पण केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि संपूर्ण काशी की सांस्कृतिक विरासत की अमूल्य थाती है। उन्होंने जिस पीढ़ी को संगीत की शिक्षा दी, वह आज भारतीय शास्त्रीय संगीत के मंचों पर बनारस घराने का प्रतिनिधित्व कर रही है। 83वें जन्मदिन पर उनके प्रशंसक, शिष्य और संगीत-जगत उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन करता है — और उम्मीद करता है कि उनकी सितार से निसृत स्वर-धाराएँ आने वाली पीढ़ियों को भी राह दिखाती रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

इस असंतुलन को दर्शाता है। काशी घराने की ठुमरी-सितार परंपरा अत्यंत समृद्ध है, फिर भी यह अकादमिक पाठ्यक्रमों और सरकारी सांस्कृतिक वित्त पोषण में हाशिये पर रही है। असली श्रद्धांजलि सिर्फ जन्मदिन मनाने में नहीं, बल्कि बनारस घराने की इस विशिष्ट शैली के दस्तावेज़ीकरण और संस्थागत संरक्षण में होगी।
RashtraPress
11 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंडित शिवनाथ मिश्र कौन हैं?
पंडित शिवनाथ मिश्र वाराणसी के बनारस घराने के प्रतिष्ठित सितार वादक और ठुमरी साधक हैं, जिन्हें वर्ष 2022 में भारत सरकार ने पद्मश्री से सम्मानित किया। वे पंडित रविशंकर के बाद पद्म पुरस्कार पाने वाले दूसरे सितार वादक हैं।
पंडित शिवनाथ मिश्र को पद्मश्री कब मिला?
पंडित शिवनाथ मिश्र को वर्ष 2022 में पद्म श्री से नवाज़ा गया। इस घोषणा के बाद वाराणसी में उनके आवास पर बधाई देने वालों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी थी।
पंडित शिवनाथ मिश्र ने संगीत की शिक्षा किससे ली?
उन्होंने मात्र 8 वर्ष की आयु में अपने चाचा, ठुमरी सम्राट स्वर्गीय पंडित महादेव प्रसाद मिश्र से भारतीय शास्त्रीय संगीत — गायन और सितार दोनों — की शिक्षा प्रारंभ की। यही गुरु-शिष्य परंपरा आज भी उनके घराने में जीवित है।
पंडित शिवनाथ मिश्र का अकादमिक योगदान क्या है?
पंडित शिवनाथ मिश्र सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के संगीत विभाग में विभागाध्यक्ष रह चुके हैं। इस भूमिका में उन्होंने अनेक युवा संगीतकारों को शास्त्रीय परंपरा से जोड़ा।
बनारस घराने की सितार-ठुमरी शैली क्या है?
बनारस घराना भारतीय शास्त्रीय संगीत में विशेष रूप से ठुमरी की भाव-प्रधान शैली और सितार की गमक-युक्त तंत्रकारी के लिए प्रसिद्ध है। पंडित शिवनाथ मिश्र ने इस शैली को अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुँचाया और विश्व भर के विद्यार्थी इसे सीखने वाराणसी आते हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 4 महीने पहले
  4. 6 महीने पहले
  5. 8 महीने पहले
  6. 1 साल पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले