पहलगाम-गगनगीर हमलों का एक ही M-4 कार्बाइन कनेक्शन, NIA ने उजागर किया लश्कर का 'TRF मॉड्यूल'
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने बैलिस्टिक जांच के ज़रिए यह साबित कर दिया है कि पहलगाम आतंकी हमले और 20 अक्टूबर 2024 को हुए गगनगीर आतंकी हमले में एक ही M-4 कार्बाइन से गोलियां चलाई गई थीं — और दोनों हमलों को लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के छद्म संगठन 'द रजिस्टेंस फ्रंट' (TRF) के एक ही मॉड्यूल ने अंजाम दिया था। यह खुलासा 'ऑपरेशन महादेव' के बाद हुआ, जिसमें 28 जुलाई 2025 को तीन पाकिस्तानी आतंकवादियों को मार गिराया गया।
बैलिस्टिक साक्ष्य: दोनों हमलों की एक ही बंदूक
जांच में बरामद कारतूसों की फोरेंसिक जांच से यह स्थापित हुआ कि गगनगीर और पहलगाम दोनों स्थलों से मिले खोखे एक ही M-4 कार्बाइन से दागे गए थे। यही हथियार सुरक्षा बलों ने 'ऑपरेशन महादेव' के दौरान आतंकवादियों से बरामद किया — साथ में दो AK-47 राइफलें भी मिलीं।
गौरतलब है कि गगनगीर हमले में APCО Infratech के मज़दूर शिविर के डाइनिंग मेस पर अंधाधुंध गोलीबारी की गई थी, जिसमें एक डॉक्टर सहित सात लोगों की जान गई थी। यह शिविर जम्मू-कश्मीर के रणनीतिक Z-मोड़ सुरंग के निकट स्थित था।
मुख्य आरोपी: फैसल जट्ट और उसके साथी
NIA की जांच में सामने आया कि गगनगीर हमले का मुख्य आरोपी फैसल जट्ट उर्फ सुलेमान पहलगाम हमले में भी सीधे तौर पर शामिल था। उसके दो साथी — हबीब ताहिर उर्फ छोटू और हमजा अफगानी — के साथ उसे 28 जुलाई 2025 को 'ऑपरेशन महादेव' में मार गिराया गया।
तीनों आतंकवादी 2023 से ही घाटी में सक्रिय थे। वे हमला करने के बाद घने जंगलों में छिप जाते और अगले निर्देश मिलने तक वहीं रहते। अधिकारियों के अनुसार, वे घाटी के माहौल से इस कदर घुल-मिल गए थे कि उन्हें ट्रैक करना बेहद कठिन था।
पाकिस्तान से संचालित हैंडलर नेटवर्क
NIA को डिजिटल फोरेंसिक, CCTV फुटेज, बैलिस्टिक रिपोर्ट, IP ट्रैकिंग और सोशल मीडिया रिकॉर्ड के आधार पर यह स्पष्ट हुआ कि दोनों हमलों की योजना और निर्देश एक ही पाकिस्तान-स्थित हैंडलर समूह से आए। 'ऑपरेशन महादेव' में बरामद मोबाइल डेटा ने इस पूरे नेटवर्क की कड़ियाँ जोड़ दीं।
इन आतंकवादियों को एन्क्रिप्टेड संचार माध्यमों के ज़रिए निर्देश दे रहा था साजिद जट्ट उर्फ अली भाई, जिसे 'लंगड़ा' के नाम से भी जाना जाता है। खुफिया ब्यूरो (IB) के अनुसार, साजिद जट्ट सबसे अधिक वांछित आतंकवादियों की सूची में शामिल था और जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को पुनः सक्रिय करने की ज़िम्मेदारी उसे सौंपी गई थी।
TRF मॉड्यूल: 2023 से चला आ रहा खूनी सिलसिला
NIA की जांच में एक व्यापक पैटर्न सामने आया है। यही TRF मॉड्यूल 21 दिसंबर 2023 को पुंछ में सेना के काफिले पर हुए हमले के लिए ज़िम्मेदार था, जिसमें पाँच सैनिक शहीद हुए थे। 4 मई 2024 को पुंछ के शाहसितार-सनाई इलाके में वायुसेना के काफिले पर हमले में एक जवान की जान गई। 9 जून 2024 को रियासी ज़िले में शिव खोड़ी से लौट रहे तीर्थयात्रियों की बस पर गोलीबारी की गई।
अधिकारियों के अनुसार, इन सभी हमलों का तरीका एक जैसा था — घुसपैठ, छिपाव, नियमित हमले और जंगलों में शरण। TRF ने इन सभी हमलों की ज़िम्मेदारी ली थी।
TRF का दावा वापसी और 'ऑपरेशन सिंदूर'
'द रजिस्टेंस फ्रंट' ने पहले पहलगाम हमले की ज़िम्मेदारी ली, लेकिन भारत की कड़ी जवाबी कार्रवाई के डर से बाद में इससे मुकर गया। दावा वापस लेने के बावजूद भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' को अंजाम दिया, जिसके परिणामस्वरूप आतंकवादी ढाँचे को व्यापक नुकसान पहुँचाया गया। एक अधिकारी ने कहा कि पाकिस्तान की सीधी संलिप्तता पहले ही साबित हो चुकी थी और इस बार की कार्रवाई भी उतनी ही कड़ी रही।
NIA की यह जांच न केवल दो बड़े हमलों के बीच का ठोस सबूत-आधारित संबंध स्थापित करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकी नेटवर्क कितना संगठित और सुनियोजित है। आगे की जांच और न्यायिक प्रक्रिया में यह फोरेंसिक साक्ष्य निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।