पैरा एथलीट जीवन बदलते हैं, मैं इनसे प्रेरणा लेता हूं: PM मोदी ने खेलो इंडिया डायलॉग में कहा
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 अगस्त 2026 को खेलो इंडिया डायलॉग के दौरान युवाओं को वर्चुअली संबोधित करते हुए भारत के पैरा एथलीटों की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि पैरा एथलीटों की उपलब्धियाँ न केवल पदक तक सीमित हैं, बल्कि ये पूरे परिवारों और समुदायों की सोच और जीवन को बदलने की ताकत रखती हैं।
खेल और जीवन का गहरा संबंध
प्रधानमंत्री ने कहा कि जब कोई पैरा एथलीट को मैदान में देखता है, तो जीवन को देखने का नज़रिया ही बदल जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक पैरा एथलीट की सफलता केवल उसकी अपनी नहीं होती — वह उसके माता-पिता, भाई-बहन और पूरे परिवार के संघर्ष और सपनों को भी नई ऊँचाई देती है।
मोदी ने अपने संबोधन में कहा, 'हमारे पैरा एथलीट इस बात का एक बड़ा उदाहरण हैं कि खेल कैसे जिंदगी बदलते हैं। जब कोई पैरा एथलीट को मैदान में देखता है, तो जिंदगी के बारे में सोचने का तरीका बदल जाता है। और जब वह कुछ हासिल करता है, तो उस एथलीट के साथ-साथ उसके पूरे परिवार को एक नई जिंदगी मिलती है।'
किन एथलीटों का किया विशेष उल्लेख
प्रधानमंत्री ने शीतल देवी, अवनी लेखरा, सुमित अंतिल, नितेश कुमार और झंडू कुमार की उपलब्धियों का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आर्चरी में शीतल देवी ने पैरालिंपिक पदक जीतकर जम्मू-कश्मीर और पूरे भारत को गर्वान्वित किया है।
मोदी ने अवनी लेखरा के बारे में कहा कि उन्होंने दो बार पैरालिंपिक पदक जीते हैं और जब भी वे उनसे मिलते हैं, उन्हें अत्यंत गर्व का अनुभव होता है। उन्होंने कहा, 'वे हमें प्रेरित करते हैं। खेल बेहतर जिंदगी की गारंटी है।'
खेल भावना और समाज निर्माण
प्रधानमंत्री ने खेल भावना को एक स्वस्थ समाज की नींव बताया। उन्होंने कहा कि खेल के मैदान में गए बिना खेल भावना सीखना बहुत कठिन है। मोदी के अनुसार, 'खेल हमें न सिर्फ चैंपियन बनना सिखाते हैं, बल्कि बेहतर प्रतियोगी बनना भी सिखाते हैं — उठना, गिरना और फिर से उठ खड़ा होना।'
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि एक अच्छे परिवार, समाज और बेहतर संस्कृति के निर्माण के लिए खिलाड़ियों वाली भावना अनिवार्य है।
खेलो इंडिया डायलॉग का महत्त्व
खेलो इंडिया डायलॉग युवाओं को खेल और फिटनेस के प्रति जागरूक करने की एक केंद्र सरकार की पहल है। इस मंच के ज़रिए प्रधानमंत्री ने देशभर के युवाओं को सीधे संबोधित किया और पैरा एथलीटों को राष्ट्रीय प्रेरणा का प्रतीक बताया।
गौरतलब है कि हाल के वर्षों में भारत के पैरा एथलीटों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है, जिससे देश में पैरा खेलों के प्रति जागरूकता और सरकारी समर्थन दोनों में वृद्धि हुई है। यह संबोधन उसी दिशा में एक और कदम माना जा रहा है।