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पटना सरस मेला 2026: मधुबनी पेंटिंग से लिट्टी-चोखा तक, दूसरे दिन ₹22.90 लाख की बिक्री

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पटना सरस मेला 2026: मधुबनी पेंटिंग से लिट्टी-चोखा तक, दूसरे दिन ₹22.90 लाख की बिक्री

सारांश

पटना के ज्ञान भवन में बिहार सरस मेला 2026 सिर्फ खरीदारी का मंच नहीं — यह 15 राज्यों की ग्रामीण 'जीविका दीदियों' के लिए बड़े बाज़ार तक पहुँचने की सीढ़ी है। दूसरे दिन ₹22.90 लाख से अधिक की बिक्री यह दर्शाती है कि लोगों का उत्साह बढ़ रहा है।

मुख्य बातें

बिहार सरस मेला 2026 पटना के ज्ञान भवन में 29 सितंबर 2026 तक प्रतिदिन सुबह 10 बजे से रात 8 बजे IST तक आयोजित हो रहा है।
दूसरे दिन 24,000 से अधिक आगंतुक पहुँचे और ₹22 लाख 90 हज़ार से अधिक की खरीद-बिक्री हुई; पहले दिन यह आँकड़ा ₹20 लाख 28 हज़ार था।
मेले में 15 राज्यों के स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिला उद्यमी अपने उत्पाद लेकर आई हैं।
जीविका और अर्न्स्ट एंड यंग के संयुक्त क्रेता-विक्रेता संवाद कार्यक्रम में ब्रीहति , नेचुरल बी फार्म और हनी हॉस्पिटैलिटी जैसे खरीदार शामिल हुए।
सभी स्टॉल पर डिजिटल भुगतान की सुविधा और ग्राहक सेवा केंद्र उपलब्ध हैं।

पटना के ज्ञान भवन में आयोजित बिहार सरस मेला 2026 में दूसरे दिन 24,000 से अधिक लोगों ने भ्रमण किया और ₹22 लाख 90 हज़ार से अधिक के उत्पादों की खरीद-बिक्री हुई। 15 राज्यों की ग्रामीण महिला उद्यमियों द्वारा सजाए गए इस मेले में हस्तशिल्प, देशी व्यंजन और जैविक उत्पादों ने हर उम्र के दर्शकों को आकर्षित किया। 29 सितंबर 2026 तक चलने वाला यह आयोजन ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्वावलम्बन की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण मंच बन गया है।

मेले का स्वरूप और आकर्षण

बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति (जीविका) द्वारा ग्रामीण विकास विभाग के तत्वावधान में आयोजित इस मेले में मधुबनी पेंटिंग, सुजनी, सिक्की शिल्प, टेराकोटा और भागलपुरी सिल्क जैसे पारंपरिक हस्तशिल्प लोगों की खरीदारी की पहली पसंद बने हुए हैं। मखाना, गोविंद भोग चावल, कतरनी चूड़ा-चावल, गुड़, मड़ुआ, बाजरा और मिलेट्स जैसे देशी अनाज एवं खाद्य उत्पाद भी भारी माँग में हैं।

मेले में कृत्रिम आभूषण, कालीन, रग्स, खादी एवं ऊनी परिधान, आयुर्वेदिक पौधे, अचार-पापड़ और हर्बल उत्पाद भी आगंतुकों का ध्यान खींच रहे हैं। फूड कोर्ट में लिट्टी-चोखा, सेव-बुनिया, चाट और गोलगप्पे सहित विभिन्न राज्यों के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद लेने के लिए भीड़ उमड़ रही है।

बिक्री के आँकड़े

मेले के पहले दिन ₹20 लाख 28 हज़ार की बिक्री दर्ज की गई, जो दूसरे दिन बढ़कर ₹22 लाख 90 हज़ार से ऊपर पहुँच गई। यह आँकड़ा दर्शाता है कि मेले के प्रति लोगों का उत्साह दिन-प्रतिदिन बढ़ रहा है। 15 राज्यों के स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिला उद्यमियों की भागीदारी इस मेले को राष्ट्रीय स्तर का चरित्र देती है।

क्रेता-विक्रेता संवाद: एक विशेष पहल

मेले की सबसे उल्लेखनीय पहल है प्रतिदिन आयोजित होने वाला क्रेता-विक्रेता संवाद कार्यक्रम, जो जीविका और अर्न्स्ट एंड यंग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। इस मंच के ज़रिए ग्रामीण उत्पादकों को बड़े खरीदारों और वितरकों से सीधे जुड़ने का अवसर मिल रहा है। मंगलवार के संवाद कार्यक्रम में ब्रीहति, नेचुरल बी फार्म और हनी हॉस्पिटैलिटी सहित कई बड़े खरीदार और वितरक शामिल हुए।

इस अवसर पर जीविका की जिला परियोजना प्रबंधक माधवी चौधरी और परियोजना प्रबंधक आलोक कुमार गोपाल ने विशेषज्ञ के रूप में भाग लिया। उन्होंने बताया कि बेहतर पैकेजिंग, एकसमान गुणवत्ता और उत्पाद से जुड़ी ब्रांड कहानी ग्रामीण उत्पादों को बड़े बाज़ारों और ई-कॉमर्स मंचों तक पहुँचाने में सहायक हो सकती है।

जीविका दीदियों की आवाज़

मेले में भाग ले रही जीविका दीदियों ने बताया कि सरस मेला उन्हें गाँव से बाहर अपने उत्पादों की पहचान बनाने और बड़े खरीदारों से सीधे संपर्क का अवसर प्रदान कर रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब ग्रामीण महिला उद्यमिता को राष्ट्रीय नीति के केंद्र में लाने की कोशिशें तेज़ हुई हैं।

डिजिटल सुविधाएँ और समापन

मेले के सभी स्टॉल पर डिजिटल भुगतान की सुविधा उपलब्ध है और ग्राहक सेवा केंद्र भी संचालित किए जा रहे हैं। बिहार सरस मेला 29 सितंबर 2026 तक प्रतिदिन सुबह 10 बजे से रात 8 बजे IST तक आम लोगों के लिए खुला रहेगा। आने वाले दिनों में बिक्री के आँकड़े और ऊँचे जाने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि इस तरह के मेलों में अक्सर बिक्री मेले तक ही सीमित रह जाती है और दीर्घकालिक आपूर्ति शृंखला नहीं बन पाती। मधुबनी और भागलपुरी सिल्क जैसे उत्पादों की ब्रांडिंग और ई-कॉमर्स पर उपस्थिति अभी भी उस स्तर पर नहीं है जहाँ होनी चाहिए। यदि इस मंच को केवल वार्षिक उत्सव के बजाय स्थायी बाज़ार-संयोजन में बदला जाए, तो जीविका दीदियों की आय में वास्तविक और टिकाऊ बदलाव संभव है।
RashtraPress
22 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहार सरस मेला 2026 कहाँ और कब तक चलेगा?
बिहार सरस मेला 2026 पटना के ज्ञान भवन में आयोजित है और 29 सितंबर 2026 तक प्रतिदिन सुबह 10 बजे से रात 8 बजे IST तक आम लोगों के लिए खुला रहेगा। इसका आयोजन जीविका और ग्रामीण विकास विभाग मिलकर कर रहे हैं।
सरस मेले में कौन-कौन से उत्पाद मिलते हैं?
मेले में मधुबनी पेंटिंग, सुजनी, सिक्की शिल्प, टेराकोटा, भागलपुरी सिल्क, मखाना, गोविंद भोग चावल, कतरनी चूड़ा-चावल, मिलेट्स, हर्बल उत्पाद, खादी परिधान और आयुर्वेदिक पौधे शामिल हैं। फूड कोर्ट में लिट्टी-चोखा सहित विभिन्न राज्यों के पारंपरिक व्यंजन भी उपलब्ध हैं।
सरस मेले में कितने राज्यों की महिला उद्यमी भाग ले रही हैं?
15 राज्यों के स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिला उद्यमी इस मेले में अपने उत्पाद लेकर आई हैं। यह मेला मुख्य रूप से जीविका से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं को बड़ा बाज़ार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से आयोजित किया जाता है।
क्रेता-विक्रेता संवाद कार्यक्रम क्या है और इसका क्या उद्देश्य है?
यह जीविका और अर्न्स्ट एंड यंग द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित दैनिक कार्यक्रम है, जिसमें ग्रामीण उत्पादकों को बड़े खरीदारों और वितरकों से सीधे जोड़ा जाता है। इसका उद्देश्य ग्रामीण उत्पादों की गुणवत्ता, ब्रांडिंग और पैकेजिंग में सुधार कर उन्हें ई-कॉमर्स समेत बड़े बाज़ारों तक पहुँचाना है।
सरस मेले में भुगतान की क्या सुविधाएँ हैं?
मेले के सभी स्टॉल पर डिजिटल भुगतान की सुविधा उपलब्ध है। इसके अलावा रुपए की जमा-निकासी के लिए ग्राहक सेवा केंद्र भी संचालित किए जा रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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