बिहार सरस मेला 2026: जीविका दीदियों को ऑनलाइन बाज़ार से जोड़ने की पहल, ₹1 करोड़ से अधिक का कारोबार
सारांश
मुख्य बातें
बिहार सरस मेला 2026 पटना के ज्ञान भवन में ग्रामीण महिला उद्यमियों के लिए केवल खरीद-बिक्री का मंच नहीं, बल्कि उन्हें ऑनलाइन बाज़ार, ब्रांडिंग और राष्ट्रीय कारोबार से जोड़ने का सशक्त माध्यम बन चुका है। 24 सितंबर 2026 तक मेले में महज़ चार दिनों में खरीद-बिक्री का आँकड़ा ₹1 करोड़ से अधिक हो गया है। मेला 29 सितंबर 2026 तक चलेगा।
मुख्य घटनाक्रम
गुरुवार, 24 सितंबर को ज्ञान भवन सभागार में आयोजित क्रेता-विक्रेता संवाद कार्यक्रम में बाज़ार विशेषज्ञों और बड़ी कंपनियों के प्रतिनिधियों ने जीविका दीदियों के साथ उत्पादों की गुणवत्ता, पैकेजिंग, लेबलिंग, ब्रांडिंग, जीएसटी, ऑनलाइन बिक्री और निर्यात की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की। विशेषज्ञों के अनुसार, बाज़ार की माँग को समझकर उत्पादों में सुधार और बेहतर पैकेजिंग के ज़रिए बिक्री का दायरा काफी बढ़ाया जा सकता है।
उल्लेखनीय है कि यह पहला अवसर है जब कंपनियों के प्रतिनिधियों को सरस मेले में विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है — जो इस आयोजन को परंपरागत हाट से आगे ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
भागीदारी और उत्पाद
ग्रामीण विकास विभाग के तत्वावधान में जीविका द्वारा आयोजित इस मेले में बिहार के अलावा झारखंड, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, हरियाणा, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, पंजाब, असम, पश्चिम बंगाल, गुजरात, मणिपुर, मध्य प्रदेश, तेलंगाना, राजस्थान और जम्मू-कश्मीर की महिला उद्यमी हिस्सा ले रही हैं। मेले में परिधान, हस्तशिल्प, सजावटी सामान, रसोई के उत्पाद, देशी व्यंजन, अचार-पापड़, मिलेट्स और मखाना सहित अनेक उत्पाद उपलब्ध हैं।
कारोबार के आँकड़े
मेले में बिक्री का प्रवाह उत्साहजनक है। बुधवार, 23 सितंबर को अकेले ₹30.48 लाख से अधिक का कारोबार दर्ज किया गया और उस दिन 28,000 से ज़्यादा लोगों ने मेले का भ्रमण किया। राजस्थान के चूरू जिले की पुष्पा देवी, जो लोहे से बने रसोई उत्पाद बेचती हैं, के स्टॉल पर भी भारी भीड़ रही — चार दिनों में उनकी बिक्री ₹2.5 लाख से अधिक हो चुकी है, जिसमें अकेले 23 सितंबर को ₹82,000 से अधिक का कारोबार शामिल है।
आगे की योजना
आने वाले दिनों में जीविका और संबंधित कंपनियों के बीच संभावित सहयोग को लेकर विस्तृत योजना तैयार की जाएगी। इसके तहत कंपनियों और जीविका के बीच एमओयू (MoU) किए जाने की संभावना है, जिससे ग्रामीण महिला उद्यमियों को स्थायी और संगठित बाज़ार मिल सके। मेले में डिजिटल भुगतान की सुविधा और ग्राहक सेवा केंद्र भी संचालित है।
व्यापक महत्व
यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में स्वयं सहायता समूहों (SHG) को औपचारिक अर्थव्यवस्था से जोड़ने की कोशिशें तेज़ हो रही हैं। गौरतलब है कि बिहार का जीविका कार्यक्रम देश के सबसे बड़े SHG नेटवर्कों में से एक है। ऑनलाइन बाज़ार से जुड़ाव इन महिलाओं की आय को स्थायित्व देने और भौगोलिक सीमाओं को पार करने की दिशा में निर्णायक साबित हो सकता है।