बुरहान वानी को 'शहीद' बोलना पड़ा भारी: पीडीपी नेता अब्दुल कबीर से किश्तवाड़ पुलिस की पूछताछ
सारांश
मुख्य बातें
किश्तवाड़ में पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के नेता अब्दुल कबीर के एक विवादास्पद बयान के बाद जम्मू-कश्मीर में सियासी माहौल गरम हो गया है। कथित तौर पर कबीर ने 9 अक्टूबर 2026 को किश्तवाड़ में हुई पार्टी कार्यकर्ताओं की एक बैठक में प्रतिबंधित आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन के पूर्व कमांडर बुरहान वानी को 'शहीद' बताया, जिसके बाद पुलिस ने तत्काल पूछताछ शुरू कर दी है।
क्या था विवादित बयान
रिपोर्टों के अनुसार, अब्दुल कबीर ने पार्टी बैठक के दौरान दिए अपने भाषण में बुरहान वानी का उल्लेख करते हुए उसे 'शहीद' की संज्ञा दी। उन्होंने यह भी कहा कि किसी को शहीद बुलाना या न बुलाना 'हमारी अपनी आज़ादी है।' इसी बयान ने पूरे जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक हलचल पैदा कर दी।
इसके अलावा कबीर ने एक और दावा किया जिसने विवाद को और हवा दी। उनके अनुसार, 2016 में बुरहान वानी के मारे जाने के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता उसके घर जाकर मुआवज़ा दे आए थे। इस दावे की अभी तक स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
पुलिस की कार्रवाई
बयान सामने आते ही किश्तवाड़ पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी। पुलिस ने अब्दुल कबीर से पूछताछ आरंभ की है और उनसे यह स्पष्ट करने को कहा जा रहा है कि किस संदर्भ में और किस आधार पर उन्होंने बुरहान वानी को 'शहीद' कहा। अधिकारियों के अनुसार, बयान और उससे जुड़े सभी तथ्यों की विधिवत जाँच की जा रही है।
बुरहान वानी: पृष्ठभूमि
बुरहान वानी दक्षिण कश्मीर के त्राल इलाके का रहने वाला था और हिजबुल मुजाहिदीन का कुख्यात कमांडर था। उस पर सुरक्षाकर्मियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की हत्या सहित कई संगीन आरोप थे, और सरकार ने उस पर ₹10 लाख का इनाम घोषित किया हुआ था। वानी 8 जुलाई 2016 को सुरक्षाबलों के साथ हुई एक मुठभेड़ में मारा गया था। गौरतलब है कि उसके पिता मुजफ्फर अहमद वानी एक सरकारी स्कूल के हेडमास्टर थे।
यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव के बाद का राजनीतिक माहौल अभी पूरी तरह स्थिर नहीं हुआ है। किसी प्रतिबंधित आतंकी संगठन के कमांडर को महिमामंडित करने वाले बयानों को लेकर पहले भी कानूनी कार्रवाइयाँ हो चुकी हैं।
आम जनता और राजनीतिक प्रतिक्रिया
इस बयान के सामने आने के बाद किश्तवाड़ सहित पूरे जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का सिलसिला शुरू हो गया है। विपक्षी दलों ने पीडीपी से इस बयान पर जवाब माँगा है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जाँच पूरी निष्पक्षता से की जाएगी।
क्या होगा आगे
पुलिस की पूछताछ पूरी होने के बाद यह तय होगा कि अब्दुल कबीर के खिलाफ कोई औपचारिक कानूनी कदम उठाया जाता है या नहीं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे बयान भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं और आतंकवाद-विरोधी कानूनों के तहत जाँच के दायरे में आ सकते हैं। पीडीपी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।