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हुमायूं कबीर का पलटवार: 'हाजी इतने बड़े नहीं कि उनकी हर बात मानूं,' गोवंश कुर्बानी विवाद में नई तकरार

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हुमायूं कबीर का पलटवार: 'हाजी इतने बड़े नहीं कि उनकी हर बात मानूं,' गोवंश कुर्बानी विवाद में नई तकरार

सारांश

मुर्शिदाबाद में पूर्व TMC विधायक हुमायूं कबीर ने गोवंश कुर्बानी के बयान पर गिरफ्तारी की माँग करने वाले इस्लामिक विद्वान हाजी मोहम्मद परवेज सिद्दीकी को सीधे खारिज किया। कबीर ने संविधान प्रदत्त धार्मिक अधिकारों का हवाला देते हुए कहा कि वे अपनी बात कहते रहेंगे।

मुख्य बातें

पूर्व TMC विधायक हुमायूं कबीर ने 23 मई 2026 को मुर्शिदाबाद में गोवंश कुर्बानी विवाद पर प्रतिक्रिया दी।
इस्लामिक विद्वान हाजी मोहम्मद परवेज सिद्दीकी ने कबीर की गिरफ्तारी और सख्त कार्रवाई की माँग की थी।
कबीर ने माँग को खारिज करते हुए कहा — 'वह इतना बड़ा आदमी नहीं कि मुझे उसकी हर बात माननी पड़े।' कबीर ने संविधान प्रदत्त धार्मिक अधिकारों का हवाला देते हुए अपना रुख बरकरार रखा।
बकरीद की छुट्टी को लेकर भी विवाद पर कबीर ने कहा — सरकार जिस दिन छुट्टी दे, वही मान्य होगा।

पूर्व तृणमूल कांग्रेस (TMC) विधायक हुमायूं कबीर ने 23 मई 2026 को मुर्शिदाबाद में बकरीद पर गोवंश की कुर्बानी संबंधी अपने बयान को लेकर जारी विवाद के बीच इस्लामिक विद्वान हाजी मोहम्मद परवेज सिद्दीकी की गिरफ्तारी की माँग को सीधे खारिज कर दिया। कबीर ने स्पष्ट किया कि संविधान प्रदत्त धार्मिक अधिकारों के दायरे में वे अपनी बात कहते रहेंगे और किसी के दबाव में नहीं आएंगे।

क्या है पूरा विवाद

विवाद की जड़ में हुमायूं कबीर का वह बयान है जिसमें उन्होंने बकरीद पर गोवंश की कुर्बानी देने की बात कही थी। इस पर इस्लामिक विद्वान हाजी मोहम्मद परवेज सिद्दीकी ने कड़ी आपत्ति जताई और कहा था कि कानून के खिलाफ बोलने वाले ऐसे लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जाना चाहिए और उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

हुमायूं कबीर की सीधी प्रतिक्रिया

शनिवार को मुर्शिदाबाद में पत्रकारों से बातचीत में कबीर ने तीखे लहजे में कहा, 'वह कौन है? मुझे उसकी टिप्पणी का जवाब देने की कोई ज़रूरत नहीं है। एक मुसलमान के तौर पर मेरे जो भी अधिकार हैं, संविधान ने मुझे अपने धर्म का पालन करने की अनुमति दी है। मैं उस अनुमति का इस्तेमाल करने के लिए हर संभव प्रयास करता रहूंगा। मेरे बारे में बोलने वाला वह कौन होता है? वह इतना बड़ा आदमी नहीं है कि मुझे उसकी हर बात माननी पड़े।' कबीर का कहना था कि इस मुद्दे को जरूरत से ज्यादा तूल दिया जा रहा है।

बकरीद की छुट्टी पर भी बोले कबीर

हुमायूं कबीर ने बकरीद की छुट्टी की तारीख को लेकर चल रहे विवाद को भी बेवजह करार दिया। उन्होंने कहा, 'मेरे लिए 28 तारीख को कुर्बानी है। अगर उस दिन छुट्टी रहेगी तो ठीक है। अगर सरकार आगे-पीछे छुट्टी देती है तो भी कोई दिक्कत नहीं है। अगर छुट्टी नहीं भी मिले तो उससे भी कोई बड़ी समस्या नहीं होगी।' उनके अनुसार यह केवल एक दिन का मामला है और सरकार जिस दिन छुट्टी घोषित करे, वही मान्य होगा।

राजनीतिक पृष्ठभूमि और व्यापक संदर्भ

गौरतलब है कि हुमायूं कबीर पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के पूर्व नेता और विधायक रह चुके हैं। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में धार्मिक संवेदनशीलता और अल्पसंख्यक अधिकारों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज है। आलोचकों का कहना है कि ऐसे बयान सामाजिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा दे सकते हैं, जबकि कबीर इसे संवैधानिक अधिकारों की अभिव्यक्ति बताते हैं। यह विवाद आगे किस दिशा में जाता है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

वह यह है कि इस विवाद में दोनों पक्ष अपनी-अपनी सियासी ज़मीन मजबूत करने में लगे हैं, जबकि असली सवाल — कानून की सीमाओं के भीतर धार्मिक अधिकारों का संतुलन — अनुत्तरित रह जाता है।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हुमायूं कबीर का गोवंश कुर्बानी विवाद क्या है?
पूर्व TMC विधायक हुमायूं कबीर ने बकरीद पर गोवंश की कुर्बानी देने का बयान दिया था, जिस पर इस्लामिक विद्वान हाजी मोहम्मद परवेज सिद्दीकी ने आपत्ति जताते हुए उनकी गिरफ्तारी और सख्त कार्रवाई की माँग की। इसके जवाब में कबीर ने संविधान प्रदत्त अधिकारों का हवाला देते हुए माँग को खारिज कर दिया।
हाजी मोहम्मद परवेज सिद्दीकी ने क्या कहा था?
इस्लामिक विद्वान हाजी मोहम्मद परवेज सिद्दीकी ने कहा था कि जो लोग कानून के खिलाफ इस तरह बोलते हैं, उन्हें पकड़कर जेल में डाल देना चाहिए और उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
हुमायूं कबीर ने गिरफ्तारी की माँग पर क्या जवाब दिया?
कबीर ने कहा कि हाजी 'इतने बड़े आदमी नहीं कि उनकी हर बात माननी पड़े।' उन्होंने स्पष्ट किया कि संविधान ने उन्हें अपने धर्म का पालन करने की अनुमति दी है और वे इस अधिकार का इस्तेमाल करते रहेंगे।
बकरीद की छुट्टी को लेकर कबीर का क्या कहना है?
हुमायूं कबीर ने कहा कि उनके लिए 28 तारीख को कुर्बानी है। सरकार जिस दिन छुट्टी घोषित करे वही मान्य होगा — चाहे छुट्टी उस दिन हो, आगे-पीछे हो या न भी हो, उन्हें कोई बड़ी आपत्ति नहीं है।
हुमायूं कबीर कौन हैं?
हुमायूं कबीर पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद से तृणमूल कांग्रेस (TMC) के पूर्व नेता और विधायक हैं। वे धार्मिक और राजनीतिक मुद्दों पर अपने सीधे बयानों के लिए जाने जाते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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