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पिनाराई विजयन दिल्ली पुलिस हिरासत में: केरल सरकार ने की तत्काल रिहाई की मांग

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पिनाराई विजयन दिल्ली पुलिस हिरासत में: केरल सरकार ने की तत्काल रिहाई की मांग

सारांश

मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की माँग को लेकर दिल्ली पहुँचे पूर्व केरल CM पिनाराई विजयन को दिल्ली पुलिस ने साढ़े तीन घंटे वाहन में रखा, फिर मंदिर मार्ग थाने भेजा। केरल CM सतीशन ने कड़ी निंदा करते हुए मुख्य सचिव और रेजिडेंट कमिश्नर को तत्काल रिहाई के लिए मैदान में उतारा।

मुख्य बातें

पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन को 10 अक्टूबर 2026 को दिल्ली पुलिस ने मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन में रखा।
विजयन को पुलिस स्टेशन ले जाने से पहले करीब साढ़े तीन घंटे पुलिस वाहन में रखा गया, जिससे उन्हें शारीरिक तकलीफ हुई।
केरल CM वीडी सतीशन ने मुख्य सचिव विश्वनाथ सिन्हा और रेजिडेंट कमिश्नर पुनीत कुमार को तत्काल रिहाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
सीपीआई(एम) सांसद जॉन ब्रिटास ने आरोप लगाया कि विजयन को खाना और निर्धारित दवाइयाँ नहीं दी गईं।
दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया कि विजयन और अन्य नेताओं को औपचारिक रूप से गिरफ्तार नहीं किया गया है।
सीपीआई(एम) महासचिव एमए बेबी , केके शैलजा , एमवी गोविंदन सहित कई शीर्ष नेता भी हिरासत में लिए गए।

केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में सीपीआई(एम) नेता और पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन को दिल्ली पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने की कड़ी निंदा करते हुए राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों को उनकी तत्काल रिहाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। विजयन को मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर निकाले जा रहे विरोध मार्च के दौरान हिरासत में लिया गया, जिसके बाद उन्हें मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन ले जाया गया।

मुख्य घटनाक्रम

सीपीआई(एम) के नेता और कार्यकर्ता नई दिल्ली स्थित केरल हाउस से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर मार्च निकालने की तैयारी में थे, तभी दिल्ली पुलिस ने वरिष्ठ नेताओं को हिरासत में ले लिया। रिपोर्टों के अनुसार, विजयन को पुलिस स्टेशन ले जाने से पहले करीब साढ़े तीन घंटे तक पुलिस वाहन में ही रखा गया, जिससे उन्हें शारीरिक तकलीफ हुई।

विजयन के साथ सीपीआई(एम) महासचिव एमए बेबी, राज्य सचिव एमवी गोविंदन, पीके श्रीमाथी, केके शैलजा, पोलित ब्यूरो सदस्य विजय कृष्णन, सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (सीआईटीयू) के नेता और स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष आदर्श साजी को भी हिरासत में लिया गया।

केरल सरकार की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री सतीशन ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि वे विजयन की इस 'मनमानी हिरासत' से बेहद चिंतित हैं और इसकी कड़ी निंदा करते हैं। उन्होंने कहा, 'मेरे निर्देश पर केरल के मुख्य सचिव और नई दिल्ली स्थित रेजिडेंट कमिश्नर उनकी तत्काल रिहाई के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने के लिए दिल्ली पुलिस अधिकारियों के साथ सीधे संपर्क में हैं।'

सतीशन ने राज्य के मुख्य सचिव विश्वनाथ सिन्हा और नई दिल्ली स्थित रेजिडेंट कमिश्नर पुनीत कुमार को दिल्ली पुलिस के साथ तत्काल समन्वय करने के निर्देश दिए। गौरतलब है कि यह पहली बार है जब केरल सरकार को अपने एक वरिष्ठ नेता की हिरासत के मामले में इस प्रकार सीधे हस्तक्षेप करना पड़ा।

स्वास्थ्य और व्यवहार को लेकर आरोप

सीपीआई(एम) सांसद जॉन ब्रिटास, जो विजयन के साथ थे, ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनकी उम्र का ध्यान नहीं रखा और उन्हें न तो खाना दिया गया और न ही उनकी निर्धारित दवाइयाँ। ब्रिटास ने यह भी कहा कि पुलिस उच्च अधिकारियों के निर्देश के बिना नेताओं को रिहा करने से इनकार कर रही है।

पूर्व वित्त मंत्री केएन बालागोपाल और ब्रिटास सहित विजयन के साथ आए नेताओं ने इस दौरान विरोध प्रदर्शन किया और आरोप लगाया कि पुलिस ने उनकी आपत्तियों को नज़रअंदाज़ करते हुए उन्हें घंटों तक एक वाहन में बैठाए रखा।

दिल्ली पुलिस का पक्ष

दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया कि विजयन और अन्य नेताओं को औपचारिक रूप से गिरफ्तार नहीं किया गया है और उन्हें जल्द ही रिहा कर दिया जाएगा। यह ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रीय राजधानी में विपक्षी दलों के विरोध प्रदर्शनों के दौरान नेताओं की हिरासत के मामले बढ़ रहे हैं।

आगे की स्थिति

केरल सरकार के सीधे हस्तक्षेप के बाद यह मामला राजनीतिक रूप से और अधिक संवेदनशील हो गया है। सीपीआई(एम) के शीर्ष नेतृत्व की हिरासत और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की माँग को लेकर जारी विरोध प्रदर्शन आने वाले दिनों में केंद्र और केरल सरकार के बीच राजनीतिक तनाव को और गहरा कर सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि राजनीतिक संदेश है। केंद्र और विपक्ष-शासित राज्यों के बीच संघीय तनाव की यह कड़ी नई नहीं है, लेकिन इस बार एक निर्वाचित राज्य सरकार को अपने नेता की रिहाई के लिए अधिकारियों को मैदान में उतारना पड़ा — यह संवैधानिक असहजता का स्पष्ट संकेत है। मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की माँग को लेकर किया जा रहा विरोध चुनावी स्वायत्तता और लोकतांत्रिक जवाबदेही के बड़े सवाल उठाता है, जिन पर मुख्यधारा की कवरेज प्रायः ध्यान नहीं देती।
RashtraPress
11 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पिनाराई विजयन को दिल्ली में क्यों हिरासत में लिया गया?
विजयन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग को लेकर सीपीआई(एम) के विरोध मार्च में भाग लेने नई दिल्ली पहुँचे थे। केरल हाउस से मार्च शुरू होने से पहले ही दिल्ली पुलिस ने उन्हें और अन्य वरिष्ठ नेताओं को हिरासत में ले लिया।
केरल CM वीडी सतीशन ने क्या कदम उठाए?
सतीशन ने राज्य के मुख्य सचिव विश्वनाथ सिन्हा और नई दिल्ली स्थित रेजिडेंट कमिश्नर पुनीत कुमार को दिल्ली पुलिस के साथ सीधे समन्वय करते हुए विजयन की तत्काल रिहाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने सोशल मीडिया पर इस हिरासत की कड़ी निंदा भी की।
दिल्ली पुलिस ने विजयन की हिरासत पर क्या कहा?
दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया कि विजयन और अन्य नेताओं को औपचारिक रूप से गिरफ्तार नहीं किया गया है और उन्हें शीघ्र रिहा कर दिया जाएगा। पुलिस के अनुसार यह कार्रवाई विरोध प्रदर्शन के संदर्भ में की गई थी।
विजयन के स्वास्थ्य को लेकर क्या चिंताएँ सामने आईं?
सीपीआई(एम) सांसद जॉन ब्रिटास ने आरोप लगाया कि विजयन को साढ़े तीन घंटे पुलिस वाहन में रखने के कारण शारीरिक तकलीफ हुई और उन्हें न तो खाना दिया गया और न ही उनकी निर्धारित दवाइयाँ। ब्रिटास ने यह भी कहा कि उनकी उम्र का ध्यान नहीं रखा गया।
सीपीआई(एम) के कौन-कौन से नेता हिरासत में लिए गए?
पिनाराई विजयन के अलावा सीपीआई(एम) महासचिव एमए बेबी, राज्य सचिव एमवी गोविंदन, पीके श्रीमाथी, केके शैलजा, पोलित ब्यूरो सदस्य विजय कृष्णन, सीआईटीयू के नेता और स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष आदर्श साजी को भी हिरासत में लिया गया।
राष्ट्र प्रेस
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