पिनाराई विजयन को ईडी का समन: सीपीआई(एम) पोलित ब्यूरो के इतिहास में पहली बार
सारांश
मुख्य बातें
केरल के पूर्व मुख्यमंत्री और सीपीआई(एम) के वरिष्ठ नेता पिनाराई विजयन अब एक नए — और बेहद असुविधाजनक — रिकॉर्ड के धारक बन गए हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उन्हें 'मसाप्पाडी' (सीएमआरएल-एक्सलॉजिक) मामले में शुक्रवार को पेश होने के लिए समन भेजा है, जिससे वे सीपीआई(एम) पोलित ब्यूरो के ऐसे पहले सदस्य बन गए हैं जिन्हें ईडी ने औपचारिक रूप से तलब किया हो। यह समन केरल की राजनीति में एक नई और जटिल परिस्थिति पैदा करता है।
मामले का पृष्ठभूमि
आरोप है कि कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड (सीएमआरएल) ने एक्सलॉजिक सॉल्यूशंस नामक कंपनी को कुछ भुगतान किए, और यह कंपनी विजयन की बेटी टी. वीना से जुड़ी बताई जाती है। इन वित्तीय लेन-देन के सिलसिले में दो अलग-अलग मामले दर्ज किए गए हैं।
दोनों ही मामलों में वीना दूसरी आरोपी हैं, जबकि उनके पति और सीपीआई(एम) विधायक पी.ए. मोहम्मद रियास हवाला से जुड़े एक अलग मामले में पहले आरोपी हैं।
विजयन की राजनीतिक यात्रा
विजयन के लिए रिकॉर्ड बनाना नई बात नहीं है। उन्होंने 1998 से 2015 तक सीपीआई(एम) के राज्य सचिव के रूप में कार्य किया और फिर 2016 से 2026 तक लगातार दो पूर्ण कार्यकाल के लिए मुख्यमंत्री पद संभाला — केरल के इतिहास में यह उपलब्धि इससे पहले किसी अन्य मुख्यमंत्री को हासिल नहीं हुई थी।
गौरतलब है कि अब उनके नाम से जुड़ा यह नवीनतम 'रिकॉर्ड' उनकी राजनीतिक विरासत पर एक अलग ही तरह की छाया डालता है।
सीपीआई(एम) की जवाबदेही परीक्षा
इस विवाद की विडंबना कम नहीं है। सीपीआई(एम) ने अपनी राजनीतिक पहचान काफी हद तक भ्रष्टाचार-विरोध और जवाबदेही की माँग के इर्द-गिर्द गढ़ी है। 2015 में पार्टी ने 'बार रिश्वत मामले' में तत्कालीन वित्त मंत्री के.एम. मणि के खिलाफ जोरदार अभियान चलाया था और उच्च न्यायालय की तीखी टिप्पणियों के बाद उन्हें इस्तीफा देने पर मजबूर होना पड़ा था।
इसी तरह, 'सोलर स्कैम' विवाद के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री ओमन चांडी के सबसे मुखर आलोचकों में स्वयं विजयन शामिल थे। उन्होंने बार-बार चांडी के इस्तीफे की मांग की थी। उल्लेखनीय है कि बाद में चांडी को उन आरोपों से बरी कर दिया गया था।
सीपीआई(एम) का रुख और राजनीतिक प्रतिक्रिया
पार्टी का परंपरागत बचाव यह रहा है कि ईडी का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के लिए किया जाता है। हालाँकि, यह तर्क भले ही पार्टी की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा हो, इससे समन की कानूनी बाध्यता समाप्त नहीं होती।
सीपीआई(एम) ने स्पष्ट कर दिया है कि विजयन को विपक्ष के नेता के पद से इस्तीफा देने की आवश्यकता नहीं है — एक ऐसा रुख जो तब पार्टी के अपने मानकों से भिन्न लगता है जब दूसरों पर इसी तरह के आरोप हों।
आगे की राह
विजयन का शुक्रवार को ईडी के सामने पेश होना कानूनी और राजनीतिक, दोनों दृष्टियों से निर्णायक होगा। पूर्व मुख्यमंत्री ओमन चांडी की यह टिप्पणी आज फिर प्रासंगिक हो उठी है कि केरल की राजनीति में अक्सर यह नहीं देखा जाता कि क्या हुआ, बल्कि यह देखा जाता है कि वह किसने किया। यह विवाद इस परिपाटी की एक कठिन नई परीक्षा बन गया है।