पितृ पक्ष 2026: कुरुक्षेत्र के पेहोवा और सन्निहित सरोवर में पितरों का तर्पण, जानें महत्व
सारांश
मुख्य बातें
पितृ पक्ष 2026 में हरियाणा के कुरुक्षेत्र के प्राचीन तीर्थ श्रद्धालुओं के आस्था का केंद्र बने हुए हैं। भाद्रपद पूर्णिमा की समाप्ति के साथ ही पितृ पक्ष का आरंभ हो चुका है, और हिंदू परंपरा के अनुसार इस पखवाड़े में पूर्वजों के निमित्त तर्पण, पिंडदान एवं प्रार्थना का विशेष विधान है। देशभर के तीर्थों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है, जिनमें सरस्वती नदी के तट पर बसे कुरुक्षेत्र के धार्मिक स्थल सबसे अग्रणी हैं।
पेहोवा — पृथूदक तीर्थ का पौराणिक महत्व
कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के अनुसार, पेहोवा को प्राचीन ग्रंथों में 'पृथूदक तीर्थ' के नाम से जाना जाता है। यह पवित्र स्थल सरस्वती नदी के तट पर अवस्थित है और महाभारत में इसे कुरुक्षेत्र के सर्वाधिक महत्वपूर्ण तीर्थों में गिना गया है। पौराणिक मान्यता यह है कि महाराज पृथु ने यहाँ अपने पितरों को जलांजलि अर्पित की थी, और उन्हीं के नाम पर इस तीर्थ का नाम पृथूदक पड़ा।
इस तीर्थ का उल्लेख महाभारत के अतिरिक्त वायु पुराण में भी मिलता है। पृथूदक की धार्मिक परंपराएँ श्राद्ध, तर्पण और अन्य कर्मकांडों से अभिन्न रूप से जुड़ी हैं। पितृ पक्ष में यहाँ आकर पूर्वजों को जल एवं अन्न अर्पित करना परिवार की पिछली पीढ़ियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का सर्वोच्च माध्यम माना जाता है।
सन्निहित सरोवर — सात नदियों का संगम
पेहोवा के अतिरिक्त, कुरुक्षेत्र से लगभग 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित सन्निहित सरोवर भी पितृ कर्म के लिए विशेष स्थान रखता है। हरियाणा पर्यटन के अनुसार, मान्यता है कि अमावस्या के दिन यहाँ समस्त तीर्थों का संगम होता है और सात पवित्र नदियों का जल इस सरोवर में एकत्रित होता है।
विशेष रूप से सूर्य ग्रहण के अवसर पर यहाँ बड़ी संख्या में तीर्थयात्री पहुँचते हैं। सरोवर के घाटों पर स्नान, पूजा-पाठ और पितरों के निमित्त अनुष्ठान का विशेष महत्व माना जाता है। हरियाणा पर्यटन के अनुसार, यह स्थल श्रद्धालुओं के लिए आत्मिक शांति और पूर्वजों की मोक्ष-प्राप्ति की कामना हेतु महत्वपूर्ण है।
पिण्डास्क तीर्थ — महाभारत और पांडवों से जुड़ाव
कुरुक्षेत्र के पितृ तीर्थों की सूची में पिण्डास्क का नाम भी उल्लेखनीय है। पितृ पक्ष और अमावस्या जैसे अवसरों पर श्रद्धालु यहाँ स्नान, पिंडदान और तर्पण के लिए आते हैं। स्थानीय मान्यता के अनुसार, इस तीर्थ का संबंध महाभारत काल और पांडवों से जोड़ा जाता है। इसी कारण इसे 'पिण्डास्क' एवं 'पिंड तारक तीर्थ' जैसे नामों से भी जाना जाता है।
कुरुक्षेत्र में पितृ कर्म का विशेष महत्व क्यों
कुरुक्षेत्र की भूमि का सम्बन्ध सरस्वती नदी की प्राचीन सभ्यता और महाभारत की ऐतिहासिक घटनाओं से है, जो इसे अन्य तीर्थों से अलग बनाता है। पेहोवा से लेकर सन्निहित सरोवर और पिण्डास्क तक — ये सभी स्थल पितृ पक्ष के दौरान पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के सबसे प्रामाणिक केंद्र माने जाते हैं।
गौरतलब है कि पितृ पक्ष में इन तीर्थों पर पहुँचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में हर वर्ष वृद्धि होती जा रही है, जो इस परंपरा के प्रति लोगों की गहरी आस्था को दर्शाता है। इस वर्ष भी 27 सितंबर 2026 से पितृ पक्ष की शुरुआत के साथ कुरुक्षेत्र के इन प्रमुख घाटों पर भक्तों का आना-जाना बढ़ गया है।