सोरोस के $10 अरब निवेश पर पित्रोदा बोले: नीति और उद्देश्य के आधार पर हो विचार
सारांश
मुख्य बातें
इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के अध्यक्ष सैम पित्रोदा ने 15 अक्टूबर 2026 को कहा कि हंगरी मूल के अमेरिकी अरबपति और समाजसेवी जॉर्ज सोरोस के किसी भी निवेश प्रस्ताव को संबंधित नीति और उद्देश्यों के आधार पर परखा जाना चाहिए — न कि व्यक्ति के नाम पर। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे हर प्रस्ताव का मूल्यांकन अलग-अलग मामले के तौर पर होना चाहिए।
पित्रोदा का मुख्य बयान
एक विशेष बातचीत में पित्रोदा ने कहा, 'यह सत्ता में बैठे लोगों पर निर्भर करता है। अगर जॉर्ज सोरोस कोई अच्छा काम करने के लिए 10 अरब डॉलर का निवेश लाना चाहते हैं, तो इस पर विचार किया जा सकता है। यह पूरी तरह मामले-दर-मामले और नीति-दर-नीति पर निर्भर करता है।' उन्होंने जोड़ा कि यह फैसला लेने का अधिकार अंततः सत्ता में बैठे लोगों के पास है।
गौरतलब है कि भारत में जॉर्ज सोरोस का नाम राजनीतिक रूप से संवेदनशील रहा है — सत्तारूढ़ दल उन्हें घरेलू राजनीति में हस्तक्षेप से जोड़ता रहा है। ऐसे में पित्रोदा का यह बयान एक स्पष्ट संतुलन साधने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
सोरोस से व्यक्तिगत परिचय का खंडन
पित्रोदा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह व्यक्तिगत रूप से सोरोस को नहीं जानते और न ही कभी उनसे मिले हैं। अमेरिका में कई वर्ष बिताने के बावजूद उनकी सोरोस से कोई प्रत्यक्ष बातचीत नहीं हुई।
उन्होंने कहा, 'मैं उन्हें नहीं जानता। मैं उनसे कभी नहीं मिला। न्यूयॉर्क में एक-दो बार सार्वजनिक कार्यक्रमों में उन्हें बोलते हुए देखा है, लेकिन न तो उनसे बातचीत की और न ही उनके पास गया।'
मस्क और सोरोस जैसे प्रभावशाली उद्योगपतियों की भूमिका
दुनिया के प्रभावशाली उद्योगपतियों — जैसे एलन मस्क और जॉर्ज सोरोस — के राजनीति और नीतिगत फैसलों पर प्रभाव के बारे में पूछे जाने पर पित्रोदा ने माना कि इन लोगों का कुछ असर ज़रूर होता है, लेकिन वे राजनेताओं और अन्य हितधारकों की जगह नहीं ले सकते।
उनके शब्दों में: 'उनका कुछ प्रभाव है। लेकिन वे अपना काम करते हैं, राजनेता अपना काम करते हैं और लोग अपना काम करते हैं। हर किसी की अपनी भूमिका है।' उन्होंने यह भी कहा कि प्रभावशाली लोग अपने हितों के अनुकूल नीतियों में बदलाव कराने की कोशिश करते हैं, 'लेकिन वे किसी देश को नहीं चलाते — जब तक वह देश बेहद छोटा न हो।'
राहुल गांधी और मस्क की एक्स पर बातचीत का बचाव
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और एलन मस्क के बीच सोशल मीडिया मंच एक्स पर हुई बातचीत — जो स्टारलिंक की सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं के स्पेक्ट्रम आवंटन से जुड़े मुद्दे पर थी — पर पित्रोदा ने सफाई दी। उन्होंने इस व्याख्या को खारिज किया कि राहुल गांधी ने मस्क को स्पेक्ट्रम देने का समर्थन किया।
पित्रोदा ने कहा, 'राहुल गांधी ने मूल रूप से उनके एक छोटे से संदेश का जवाब दिया था, जो बिल्कुल ठीक है। इसका कोई खास मतलब नहीं था। इसका यह मतलब नहीं है कि अगर राहुल गांधी सत्ता में आए, तो वह एलन मस्क को लाइसेंस दे देंगे।' यह ऐसे समय में आया है जब स्पेक्ट्रम आवंटन बनाम नीलामी का विवाद भारत में नीतिगत बहस का केंद्र बना हुआ है।
राजनीतिक संदर्भ और आगे क्या
पित्रोदा के ये बयान ऐसे समय में आए हैं जब BJP कांग्रेस पर सोरोस से कथित संबंधों को लेकर लगातार हमलावर रही है। कांग्रेस ने इन आरोपों को बार-बार खारिज किया है। पित्रोदा का 'मामले-दर-मामले' वाला रुख पार्टी की उस सावधान लाइन को दर्शाता है जो न तो सीधे सोरोस का समर्थन करती है और न ही उनके निवेश को सिरे से नकारती है।
आने वाले दिनों में BJP इस बयान को राजनीतिक हथियार के रूप में उपयोग कर सकती है, जबकि कांग्रेस संभवतः इसे निवेश-तटस्थता के तौर पर पेश करेगी।