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मोदी सरकार के 12 वर्ष: स्वामी कैलाशानंद गिरि बोले — सनातन संस्कृति को मिली अभूतपूर्व प्रतिष्ठा

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मोदी सरकार के 12 वर्ष: स्वामी कैलाशानंद गिरि बोले — सनातन संस्कृति को मिली अभूतपूर्व प्रतिष्ठा

सारांश

मोदी सरकार के 12 वर्ष पूरे होने पर महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि ने कहा कि केदारनाथ, काशी विश्वनाथ और राम मंदिर जैसे धार्मिक स्थलों को जो वैश्विक पहचान मिली है, वह अभूतपूर्व है। उन्होंने गोवंश संरक्षण और धर्म में करुणा के सिद्धांत पर भी अपने विचार रखे।

मुख्य बातें

महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि ने 27 मई 2026 को मोदी सरकार के 12 वर्ष पूरे होने पर सनातन संस्कृति को मिली नई प्रतिष्ठा की सराहना की।
केदारनाथ , काशी विश्वनाथ , राम मंदिर और महाकालेश्वर को वैश्विक पहचान मिलने को उन्होंने ऐतिहासिक बताया।
उन्होंने गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की माँग करने वाले मुस्लिम समुदाय के लोगों की सराहना की और 'गावो विश्वस्य मातरः' का उल्लेख किया।
पूर्ववर्ती सरकारों के दौरान पश्चिम बंगाल में संत समाज को अपेक्षित सम्मान न मिलने और भय के माहौल का दावा किया।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की केदारनाथ यात्रा पंजीकरण व्यवस्था के लिए प्रशंसा की।

महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि ने 27 मई 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर कहा कि इस कार्यकाल में भारत की सनातन संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और आध्यात्मिक पहचान को वह सम्मान मिला है जो पहले कभी नहीं मिला था। उनके अनुसार, देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों को जिस प्रकार वैश्विक पहचान प्राप्त हुई है, वह इससे पहले के किसी भी कार्यकाल में देखने को नहीं मिली थी।

सनातन संस्कृति और धार्मिक स्थलों को नई पहचान

स्वामी कैलाशानंद गिरि ने कहा, "अलग-अलग लोगों की राय और दृष्टिकोण अलग हो सकते हैं, लेकिन उनकी दृष्टि में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में भारत की सांस्कृतिक विरासत, सनातन परंपराओं और आध्यात्मिक पहचान को नई प्रतिष्ठा मिली है। देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों को जिस प्रकार से वैश्विक पहचान मिली है, वह पहले कभी देखने को नहीं मिली थी।" उन्होंने विशेष रूप से केदारनाथ मंदिर, काशी विश्वनाथ मंदिर, राम मंदिर और महाकालेश्वर मंदिर का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री की यात्राओं के बाद इन स्थलों के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था और आकर्षण में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

गोवंश और धर्म पर महामंडलेश्वर का दृष्टिकोण

स्वामी कैलाशानंद गिरि ने उन मुस्लिम समुदाय के लोगों की सराहना की जो गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की माँग कर रहे हैं। उन्होंने संस्कृत की कहावत "गावो विश्वस्य मातरः" का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में गाय को माता का स्थान प्राप्त है। उनके अनुसार, उन्होंने कुरान का हिंदी और संस्कृत अनुवाद सहित कई बार अध्ययन किया है और उसमें कहीं भी गोवंश या ऊंट की हत्या का उल्लेख नहीं मिलता। उन्होंने यह भी कहा कि धर्म के नाम पर हिंसा या गोवंश की हत्या का समर्थन करने वाले लोग वास्तव में धर्म के मूल सिद्धांतों को नहीं समझते, क्योंकि सभी धर्मों का मूल उद्देश्य मानवता, करुणा और सह-अस्तित्व की भावना को सुदृढ़ करना है।

पूर्ववर्ती सरकारों पर टिप्पणी

महामंडलेश्वर ने पश्चिम बंगाल और दिल्ली की राजनीति का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले दोनों राज्यों का वातावरण काफी समान था। उनका कहना था कि पूर्ववर्ती सरकारों के दौरान धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यक्रमों में संत समाज को अपेक्षित सम्मान नहीं मिलता था। उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में कई व्यापारी और सनातन धर्म के अनुयायी धार्मिक आयोजनों को लेकर भय का माहौल महसूस करते थे।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री और केदारनाथ यात्रा की सराहना

स्वामी कैलाशानंद गिरि ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की प्रशंसा करते हुए कहा कि वे लगातार श्रद्धालुओं से पंजीकरण कराने के बाद ही यात्रा पर आने की अपील करते रहते हैं। उन्होंने बताया कि केदारनाथ धाम आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा के लिए हर संभव व्यवस्था की जाती है — जिसमें बिना पर्याप्त गर्म कपड़ों के पहुँचने वाले यात्रियों के लिए तत्काल स्वेटर, जैकेट, जूते और दस्तानों की व्यवस्था भी शामिल है। उनके अनुसार, आज देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर के लोग केदारनाथ धाम की यात्रा को लेकर उत्साहित हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन पश्चिम बंगाल में 'भय के माहौल' जैसे दावे सत्यापन की माँग करते हैं। गोवंश को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की माँग पर मुस्लिम समुदाय के एक वर्ग की सराहना एक सूक्ष्म राजनीतिक संकेत है जिसे मुख्यधारा की कवरेज अक्सर नज़रअंदाज़ कर देती है।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

स्वामी कैलाशानंद गिरि ने मोदी सरकार के 12 वर्षों पर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारत की सनातन संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और आध्यात्मिक पहचान को अभूतपूर्व सम्मान मिला है। उनके अनुसार, केदारनाथ, काशी विश्वनाथ, राम मंदिर और महाकालेश्वर जैसे धार्मिक स्थलों को जो वैश्विक पहचान मिली है, वह पहले कभी नहीं देखी गई थी।
स्वामी कैलाशानंद गिरि ने गाय और धर्म के बारे में क्या कहा?
उन्होंने संस्कृत कहावत 'गावो विश्वस्य मातरः' का उल्लेख करते हुए कहा कि गाय को भारतीय संस्कृति में माता का स्थान प्राप्त है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने कुरान का हिंदी और संस्कृत अनुवाद में कई बार अध्ययन किया और उसमें गोवंश या ऊंट की हत्या का कोई उल्लेख नहीं मिला।
केदारनाथ यात्रा की सुविधाओं के बारे में उन्होंने क्या बताया?
स्वामी कैलाशानंद गिरि ने बताया कि केदारनाथ धाम में श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा के लिए हर संभव व्यवस्था की जाती है, जिसमें बिना पर्याप्त गर्म कपड़ों के आने वाले यात्रियों को तत्काल स्वेटर, जैकेट, जूते और दस्ताने उपलब्ध कराए जाते हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की यात्रा पंजीकरण अपील की भी सराहना की।
पूर्ववर्ती सरकारों के बारे में स्वामी जी ने क्या दावा किया?
उन्होंने दावा किया कि पूर्ववर्ती सरकारों के दौरान धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यक्रमों में संत समाज को अपेक्षित सम्मान नहीं मिलता था। उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल में कई व्यापारी और सनातन धर्म के अनुयायी धार्मिक आयोजनों को लेकर भय का माहौल महसूस करते थे।
महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि कौन हैं?
स्वामी कैलाशानंद गिरि महामंडलेश्वर की उपाधि से विभूषित एक प्रमुख हिंदू धर्मगुरु हैं। वे सनातन धर्म, गोवंश संरक्षण और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के प्रचार-प्रसार में सक्रिय रहते हैं और विभिन्न धार्मिक-सामाजिक विषयों पर सार्वजनिक रूप से अपने विचार व्यक्त करते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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