29 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

PM मोदी बनासकांठा में ₹407.56 करोड़ की बनास डेयरी परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे, दो बायो-सीएनजी प्लांट की रखेंगे नींव

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
PM मोदी बनासकांठा में ₹407.56 करोड़ की बनास डेयरी परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे, दो बायो-सीएनजी प्लांट की रखेंगे नींव

सारांश

प्रधानमंत्री मोदी का बनासकांठा दौरा सिर्फ उद्घाटन नहीं है — ₹407.56 करोड़ की तीन परियोजनाएँ और दो बायो-सीएनजी प्लांट की नींव, 4.18 लाख दुग्ध उत्पादकों को सीधा लाभ और भारत की पहली सहकारी एकीकृत फ्रेंच फ्राइज श्रृंखला — यह सहकारी डेयरी क्षेत्र में तकनीकी क्रांति का प्रतीक है।

मुख्य बातें

PM मोदी 29 अक्टूबर 2026 को बनासकांठा में ₹407.56 करोड़ लागत की बनास डेयरी की तीन परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे।
₹324.77 करोड़ लागत का भारत बोवाइन ब्रीडिंग एंड रिसर्च सेंटर , भिल्डी में 127 एकड़ में फैला है।
पालनपुर का ASRS ( ₹31.14 करोड़ ) 11,000 पैलेट क्षमता के साथ 4.18 लाख दुग्ध उत्पादकों को लाभ दे रहा है।
सनादार फ्रेंच फ्राइज प्लांट ( ₹51.65 करोड़ ) की क्षमता बढ़कर 5 टन प्रति घंटे होगी; भारत में किसी अन्य सहकारी के पास ऐसा एकीकृत मॉडल नहीं।
थराद ( 75 मीट्रिक टन ) और राधनपुर ( 100 मीट्रिक टन ) में दो नए बायो-सीएनजी प्लांट की आधारशिला रखी जाएगी।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल , उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी और बनास डेयरी चेयरमैन शंकर चौधरी शामिल होंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात के दो दिवसीय दौरे के तहत शुक्रवार, 29 अक्टूबर 2026 को बनासकांठा जिले में बनास डेयरी की कुल ₹407.56 करोड़ लागत वाली तीन परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे। इसके साथ ही वे थराद और राधनपुर में दो नए बायो-सीएनजी संयंत्रों की आधारशिला वर्चुअल माध्यम से रखेंगे।

उद्घाटन की जाने वाली तीन परियोजनाएँ

इस अवसर पर सबसे बड़ी परियोजना भिल्डी में स्थित 'भारत बोवाइन ब्रीडिंग एंड रिसर्च सेंटर' है, जिसे ₹324.77 करोड़ की लागत से तैयार किया गया है। 127 एकड़ में फैला यह केंद्र पशु प्रजनन के क्षेत्र में 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' के रूप में काम करेगा, जिसका प्राथमिक ध्यान आनुवंशिक सुधार और पशुपालन नवाचार पर होगा।

केंद्र सरकार के राष्ट्रीय गोकुल मिशन के अंतर्गत इस सुविधा के लिए ₹38.83 करोड़ मंजूर किए गए हैं, जिसमें डोनर पशुओं के लिए ₹2 करोड़ की अलग राशि शामिल है। इसे नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (NDDB) का तकनीकी सहयोग भी प्राप्त है। एनिमल हसबेंडरी इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड के तहत स्वीकृत यह परियोजना नाबार्ड से वित्तपोषित है।

दूसरी परियोजना देवदार तालुका के सनादार में स्थित 'फ्रेंच फ्राइज प्रोसेसिंग प्लांट' है, जिसे ₹51.65 करोड़ की लागत से विकसित किया गया है। इसकी उत्पादन क्षमता इस वर्ष अप्रैल से प्रति घंटे 2 टन से बढ़ाकर 5 टन की जा रही है। बनास डेयरी ने फ्रेंच फ्राइज के लिए प्रयोगशाला में पौधों के विकास से लेकर बीज खेती, कोल्ड स्टोरेज और अंतिम प्रसंस्करण तक एक पूरी एकीकृत उत्पादन श्रृंखला तैयार की है। प्रोजेक्ट के विवरण के अनुसार, भारत में किसी अन्य सहकारी संस्था के पास इस प्रकार का एकीकृत मॉडल फिलहाल उपलब्ध नहीं है।

तीसरी परियोजना पालनपुर में ₹31.14 करोड़ की लागत से बनाया गया 'ऑटोमेटेड स्टोरेज एंड रिट्रीवल सिस्टम (ASRS)' है। इस नौ-स्तरीय स्टील-रैक प्रणाली में 11,000 पैलेट रखे जा सकते हैं और इसका उपयोग अल्ट्रा-हाई-टेम्परेचर डेयरी उत्पादों के स्वचालित भंडारण एवं डिस्पैच के लिए होगा। सनादार और पालनपुर की इन दोनों सुविधाओं का उद्घाटन वर्चुअल माध्यम से किया जाएगा।

4.18 लाख दुग्ध उत्पादकों को सीधा लाभ

बनास डेयरी द्वारा स्वयं विकसित ASRS प्रणाली से वेयरहाउसिंग की गति, ट्रेसेबिलिटी और परिचालन दक्षता में सुधार होने की उम्मीद है। इस स्व-विकसित तकनीक से लागत में कटौती हुई है, जिसका आर्थिक लाभ सीधे डेयरी के 4.18 लाख दुग्ध उत्पादकों को मिल रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब सहकारी डेयरी क्षेत्र किसान-स्तर पर आय बढ़ाने के लिए तकनीकी एकीकरण पर ज़ोर दे रहा है।

दो नए बायो-सीएनजी संयंत्रों की आधारशिला

प्रधानमंत्री दो नए बायो-सीएनजी प्लांट की नींव भी वर्चुअल माध्यम से रखेंगे — एक थराद में जिसकी क्षमता 75 मीट्रिक टन गोबर प्रतिदिन प्रसंस्करण की है, और दूसरा राधनपुर में जिसकी क्षमता 100 मीट्रिक टन है। बनास डेयरी पहले से ही चार ऐसे संयंत्र संचालित करती है, जहाँ गोबर से वाहनों के लिए बायो-सीएनजी और जैविक खाद का उत्पादन होता है।

इन दोनों नई सुविधाओं से स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन में वृद्धि होगी और पशुपालकों को गोबर के माध्यम से आय का एक अतिरिक्त स्रोत भी मिलेगा। गौरतलब है कि यह केंद्र सरकार की जैव-ऊर्जा नीति और किसानों की आय दोगुनी करने की मुहिम दोनों के अनुरूप है।

कार्यक्रम में शामिल होने वाले प्रमुख नेता

इस उद्घाटन कार्यक्रम में गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी, विधानसभा अध्यक्ष और बनास डेयरी के चेयरमैन शंकर चौधरी उपस्थित रहेंगे। यह कार्यक्रम गुजरात में बनास डेयरी के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।

आगे की राह

नए बायो-सीएनजी संयंत्रों के चालू होने के बाद बनासकांठा क्षेत्र में हरित ऊर्जा उत्पादन की क्षमता उल्लेखनीय रूप से बढ़ेगी। ब्रीडिंग रिसर्च सेंटर के माध्यम से उन्नत नस्लों के विकास से दुग्ध उत्पादकता में भी सुधार अपेक्षित है, जो अंततः सहकारी सदस्यों की आय पर सकारात्मक प्रभाव डालेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

असली सवाल यह है कि बायो-सीएनजी और ब्रीडिंग सेंटर से होने वाली अतिरिक्त आय 4.18 लाख दुग्ध उत्पादकों तक कितनी पारदर्शिता से पहुँचती है — और क्या इसका सत्यापन-योग्य ढाँचा बनाया जाएगा।
RashtraPress
29 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PM मोदी बनासकांठा में किन परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे?
प्रधानमंत्री मोदी 29 अक्टूबर 2026 को बनासकांठा में बनास डेयरी की कुल ₹407.56 करोड़ लागत की तीन परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे — भिल्डी में भारत बोवाइन ब्रीडिंग एंड रिसर्च सेंटर (₹324.77 करोड़), सनादार में फ्रेंच फ्राइज प्रोसेसिंग प्लांट (₹51.65 करोड़) और पालनपुर में ऑटोमेटेड स्टोरेज एंड रिट्रीवल सिस्टम (₹31.14 करोड़)।
बनास डेयरी के बायो-सीएनजी प्लांट कहाँ बनेंगे और उनकी क्षमता क्या होगी?
दो नए बायो-सीएनजी प्लांट थराद (75 मीट्रिक टन प्रतिदिन गोबर प्रसंस्करण क्षमता) और राधनपुर (100 मीट्रिक टन) में बनाए जाएंगे। PM मोदी इनकी आधारशिला वर्चुअल माध्यम से रखेंगे। बनास डेयरी पहले से चार ऐसे संयंत्र चला रही है।
भारत बोवाइन ब्रीडिंग एंड रिसर्च सेंटर क्या है?
यह भिल्डी में 127 एकड़ में फैला पशु प्रजनन का 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' है, जो आनुवंशिक सुधार और नवाचार पर केंद्रित है। इसे राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत ₹38.83 करोड़ की मंजूरी मिली है और नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड इसे तकनीकी सहयोग दे रहा है।
बनास डेयरी के ASRS सिस्टम से किसे फायदा होगा?
पालनपुर में स्थित इस नौ-स्तरीय स्टील-रैक ASRS प्रणाली में 11,000 पैलेट रखे जा सकते हैं। यह अल्ट्रा-हाई-टेम्परेचर डेयरी उत्पादों के स्वचालित भंडारण और डिस्पैच के लिए है। इससे होने वाली लागत बचत का लाभ डेयरी के 4.18 लाख दुग्ध उत्पादकों को मिलता है।
सनादार फ्रेंच फ्राइज प्लांट क्यों खास है?
यह भारत में किसी सहकारी संस्था द्वारा स्थापित पहली पूर्ण एकीकृत फ्रेंच फ्राइज उत्पादन श्रृंखला है, जो प्रयोगशाला में पौधों के विकास से लेकर बीज खेती, कोल्ड स्टोरेज और उपभोक्ता-स्तर की प्रोसेसिंग तक सभी चरणों को कवर करती है। इसकी क्षमता अप्रैल 2026 से 2 टन से बढ़ाकर 5 टन प्रति घंटे की जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम कल
  2. 3 महीने पहले
  3. 7 महीने पहले
  4. 10 महीने पहले
  5. 1 साल पहले
  6. 1 साल पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले