1 अक्टूबर 2026
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यूपीएससी शताब्दी समारोह में पीएम मोदी: 'नागरिक देवो भव' है नई कार्य-संस्कृति का मंत्र

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यूपीएससी शताब्दी समारोह में पीएम मोदी: 'नागरिक देवो भव' है नई कार्य-संस्कृति का मंत्र

सारांश

UPSC के 100 साल पूरे होने पर भारत मंडपम में पीएम मोदी ने एक स्पष्ट संदेश दिया — 'सरकार माई-बाप नहीं, नागरिक देवो भव।' यह महज़ एक नारा नहीं, बल्कि सिविल सेवा की भर्ती, संस्कृति और जवाबदेही को नए सिरे से परिभाषित करने का आह्वान है।

मुख्य बातें

पीएम नरेंद्र मोदी ने 1 अक्टूबर 2026 को भारत मंडपम, नई दिल्ली में UPSC के 100 वर्ष पूरे होने के समारोह को संबोधित किया।
मोदी ने घोषित किया कि नई शासन-संस्कृति का मंत्र 'नागरिक देवो भव' है — 'सरकार माई-बाप' की सोच को पुराना बताया।
भर्ती की दो कसौटियाँ तय कीं — 'नेशन फर्स्ट' और 'सीटिज़न फर्स्ट' ; परीक्षा में सेवा-भावना की जाँच पर ज़ोर।
कैप्टन स्मित मच्छार के साहस की सराहना; कहा — 'इजरायल के पीएम के अनुसार इस हिंदुस्तानी ने 9/11 जैसी घटना को रोका।' मिशन कर्मयोगी के तहत iGOT प्लेटफॉर्म के ज़रिए UPSC और राज्य चयन आयोगों की कैपेसिटी बिल्डिंग का आह्वान।
परीक्षा में देरी पर चेतावनी — 'कुछ महीनों की देरी भी युवाओं के लिए मुश्किलें पैदा कर सकती है।'

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित शताब्दी समारोह को संबोधित किया। इस दो दिवसीय कार्यक्रम में UPSC के ऐतिहासिक सफर और भविष्य की दिशा पर विचार-मंथन किया जा रहा है। पीएम मोदी ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि 21वीं सदी के भारत में शासन का मूल सिद्धांत 'प्रो-पीपल, प्रो-एक्टिव गुड गवर्नेंस' है।

कैप्टन स्मित मच्छार के पराक्रम का उल्लेख

अपने संबोधन की शुरुआत में पीएम मोदी ने कैप्टन स्मित मच्छार के साहस की सराहना की। उन्होंने कहा, 'कल एक घटना घटी और भारत के कैप्टन स्मित ने जिस प्रकार से धैर्य, सूझबूझ और साहस का परिचय दिया और जैसे आज इजरायल के प्रधानमंत्री ने कहा कि इस हिंदुस्तानी ने 9/11 होने से बचा लिया — हर देशवासी को स्मित मच्छार का ये पराक्रम गौरव से भर देता है।' यह संदर्भ उन्होंने यह रेखांकित करने के लिए दिया कि सिविल सेवकों और राष्ट्र-सेवकों में यही निर्भीकता अपेक्षित है।

सुभाष चंद्र बोस और ऐतिहासिक परंपरा

पीएम मोदी ने कहा कि समारोह की गैलरी देखते समय उनका ध्यान इस तथ्य पर गया कि 1920 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस भी इसी चयन प्रक्रिया से गुज़रे थे। उन्होंने कहा, 'उस समय अंग्रेजों की हुकूमत थी, लेकिन संस्कृत का पेपर हुआ करता था और सुभाष बाबू ने संस्कृत में पेपर लिखा।' यह ऐतिहासिक प्रसंग उन्होंने भारतीय परंपरा और सिविल सेवा की जड़ों को उजागर करने के लिए साझा किया।

'नागरिक देवो भव' — शासन की नई कार्य-संस्कृति

पीएम मोदी ने सरकार और नागरिक के संबंध को पुनर्परिभाषित करते हुए कहा, 'हमने अतीत का वो दौर देखा है, जब माना जाता था कि सरकार ही माई-बाप है, लेकिन आज का ये दौर नागरिक देवो भव का है। यानी देश का नागरिक हमारे लिए किसी देव से कम नहीं है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि आज के भारत में शासन का मूल सिद्धांत 'प्रो-पीपल, प्रो-एक्टिव गुड गवर्नेंस' है, जहाँ नागरिक की सेवा सर्वोपरि है।

उन्होंने सरदार वल्लभ भाई पटेल को भी नमन करते हुए कहा कि आज़ादी के बाद उन्होंने न केवल देश को एकजुट रखने की चुनौती स्वीकार की, बल्कि राष्ट्र के पुनर्निर्माण के लिए जिस 'स्किल फ्रेम' की ज़रूरत थी, वो उन्होंने ही दिया। UPSC को आज़ाद भारत का एक प्रमुख स्तंभ बनाने का श्रेय भी पटेल को दिया।

भर्ती की दो कसौटियाँ — नेशन फर्स्ट, सीटिज़न फर्स्ट

युवाओं की भर्ती के संदर्भ में पीएम मोदी ने कहा कि आज चयनित हो रहे युवा विकसित भारत के निर्माण में अहम भूमिका निभाएंगे और वही उसके सबसे बड़े लाभार्थी भी होंगे। उन्होंने कहा, 'हमें दो कसौटियों को हमेशा याद रखना है — एक, नेशन फर्स्ट; दूसरी, सीटिज़न फर्स्ट। इन्हीं दो कसौटियों पर हर सेलेक्शन को कसा जाना है।'

उन्होंने यह भी जोड़ा कि भर्ती परीक्षा केवल उम्मीदवार के ज्ञान को नहीं, बल्कि उसकी सेवा की प्रेरणा को भी परखे। ऐसे युवाओं को सिविल सेवा में लाना होगा जो पब्लिक ऑफिस की सत्ता से नहीं, बल्कि पब्लिक सर्विस की भावना से आकर्षित हों।

परीक्षा सुधार और कैपेसिटी बिल्डिंग पर जोर

पीएम मोदी ने UPSC और राज्यों के चयन आयोगों की कैपेसिटी बिल्डिंग पर बल देते हुए कहा कि मिशन कर्मयोगी के तहत बनाए गए iGOT प्लेटफॉर्म का उपयोग संस्थागत क्षमता बढ़ाने में किया जा सकता है। उन्होंने परीक्षा प्रणाली में समयबद्धता पर ज़ोर देते हुए कहा कि 'कुछ महीनों की देरी भी युवाओं के लिए मुश्किलें पैदा कर सकती है, इसलिए परीक्षा प्रणाली को समय की निश्चितता के सिद्धांत का पालन करना चाहिए।'

गौरतलब है कि यह वक्तव्य उस पृष्ठभूमि में आया है जब हाल के वर्षों में परीक्षा में देरी और पारदर्शिता को लेकर युवाओं की शिकायतें सामने आई हैं। देश की सिविल सेवा प्रणाली को 'रिफॉर्म एक्सप्रेस' के साथ कदम मिलाकर चलने की बात करते हुए पीएम ने UPSC को युवाशक्ति से राष्ट्रशक्ति के निर्माण का 'महत्वपूर्ण स्तंभ' बताया।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा यह है कि UPSC की चयन प्रक्रिया इस दर्शन को कितनी व्यावहारिक रूप से आत्मसात करती है — जब उम्मीदवार रैंक और विषय-चयन की यांत्रिक दौड़ में फंसे रहते हैं। 'नेशन फर्स्ट, सीटिज़न फर्स्ट' की कसौटी तब तक अर्थहीन है जब तक साक्षात्कार और मूल्यांकन में इसे मापने का कोई पारदर्शी ढाँचा न हो। परीक्षा में समयबद्धता की बात तो हुई, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में देरी और पारदर्शिता के जो सवाल उठे हैं, उनके ठोस समाधान की घोषणा नहीं हुई। शताब्दी का यह मंच एक बड़े सुधार एजेंडे की घोषणा का अवसर था — भाषण प्रेरणादायी रहा, पर नीतिगत स्पष्टता अभी शेष है।
RashtraPress
1 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूपीएससी शताब्दी समारोह में पीएम मोदी ने क्या कहा?
पीएम मोदी ने 1 अक्टूबर 2026 को भारत मंडपम में UPSC के 100 वर्ष पूरे होने पर आयोजित समारोह में कहा कि 'नागरिक देवो भव' आज की शासन-संस्कृति का मंत्र है और सरकार को 'माई-बाप' मानने की पुरानी सोच से देश आगे निकल चुका है। उन्होंने भर्ती की दो कसौटियाँ — 'नेशन फर्स्ट' और 'सीटिज़न फर्स्ट' — भी निर्धारित कीं।
कैप्टन स्मित मच्छार कौन हैं और पीएम मोदी ने उनका ज़िक्र क्यों किया?
पीएम मोदी ने कैप्टन स्मित मच्छार का उल्लेख उनकी धैर्य, सूझबूझ और साहस की मिसाल के रूप में किया। मोदी के अनुसार इजरायल के प्रधानमंत्री ने कहा कि इस भारतीय ने अपनी बहादुरी से एक बड़े हादसे को रोका, जिसे उन्होंने '9/11 जैसी घटना' से बचाव कहा।
UPSC की भर्ती परीक्षा में क्या बदलाव की बात पीएम ने की?
पीएम मोदी ने कहा कि परीक्षा केवल उम्मीदवार का ज्ञान नहीं परखे, बल्कि यह भी देखे कि वह युवा सिविल सेवा में आना क्यों चाहता है — यानी सेवा-भावना का मूल्यांकन ज़रूरी है। उन्होंने परीक्षा प्रणाली में समयबद्धता और सुधार की निरंतरता पर भी ज़ोर दिया।
मिशन कर्मयोगी और iGOT प्लेटफॉर्म का UPSC से क्या संबंध है?
पीएम मोदी ने कहा कि मिशन कर्मयोगी के तहत बनाए गए iGOT प्लेटफॉर्म का उपयोग UPSC और राज्य चयन आयोगों की संस्थागत क्षमता बढ़ाने के लिए भी किया जा सकता है। यह प्लेटफॉर्म अभी तक मुख्यतः सरकारी कर्मचारियों के प्रशिक्षण के लिए उपयोग में है।
यूपीएससी के 100 साल पूरे होने का ऐतिहासिक महत्व क्या है?
UPSC की स्थापना 1926 में हुई थी और 2026 में यह अपनी शताब्दी मना रहा है। पीएम मोदी ने इस अवसर पर बताया कि 1920 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस भी इसी चयन प्रक्रिया से गुज़रे थे, और सरदार वल्लभ भाई पटेल ने आज़ादी के बाद इस संस्था को आज़ाद भारत का प्रमुख स्तंभ बनाया।
राष्ट्र प्रेस
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