20 अक्टूबर 2026
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पीएमके अध्यक्ष अंबुमणि रामदास का विरोध: पल्लवन इल्लम में सचिवालय बनाना 'अनुचित', चेन्नई के बाहर 500 1,000 एकड़ की माँग

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पीएमके अध्यक्ष अंबुमणि रामदास का विरोध: पल्लवन इल्लम में सचिवालय बनाना 'अनुचित', चेन्नई के बाहर 500 1,000 एकड़ की माँग

सारांश

तमिलनाडु सरकार के सचिवालय स्थल बदलने की कथित योजना पर पीएमके अध्यक्ष डॉ. अंबुमणि रामदास ने कड़ा विरोध जताया। पल्लवन इल्लम को ट्रैफिक, बाढ़ और विस्तार की दृष्टि से अनुपयुक्त बताते हुए उन्होंने चेन्नई के बाहर 500 1,000 एकड़ में एकीकृत प्रशासनिक शहर बनाने की माँग दोहराई।

मुख्य बातें

अंबुमणि रामदास ने 20 अक्टूबर 2026 को पल्लवन इल्लम में सचिवालय बनाने के प्रस्ताव का विरोध किया।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार तमिलनाडु सरकार पट्टिनापक्कम स्थल छोड़कर पल्लवन इल्लम पर विचार कर रही है; एक सप्ताह में आधिकारिक घोषणा संभव।
रामदास ने कहा कि पल्लवन इल्लम कूवम नदी के किनारे है और 20 लाख वर्ग फुट के परिसर से पर्यावरण क्षति व बाढ़ का खतरा बढ़ेगा।
अन्ना सलाई पर पहले से ही भारी ट्रैफिक; पल्लवन इल्लम क्षेत्र चेन्नई के टॉप 3 सर्वाधिक जाम वाले इलाकों में।
पीएमके की माँग: चेन्नई के बाहर 500 1,000 एकड़ में एकीकृत प्रशासनिक शहर विकसित किया जाए।
तमिलनाडु को 25 वर्षों से अधिक समय से नए सचिवालय की दरकार; पीएमके निर्माण का समर्थन करती है, लेकिन सही स्थान के साथ।

पट्टाली मक्कल काची (पीएमके) के अध्यक्ष डॉ. अंबुमणि रामदास ने 20 अक्टूबर 2026 को तमिलनाडु सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि चेन्नई की अन्ना सलाई स्थित पल्लवन इल्लम में नया सचिवालय बनाने का कथित प्रस्ताव न केवल अव्यावहारिक है, बल्कि पर्यावरण और यातायात दोनों दृष्टियों से गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सरकार पट्टिनापक्कम के हाउसिंग बोर्ड वाले स्थल को छोड़कर पल्लवन इल्लम को नए सचिवालय का संभावित ठिकाना मान रही है, और एक सप्ताह के भीतर आधिकारिक घोषणा भी हो सकती है।

मुख्य आपत्तियाँ

डॉ. रामदास ने कहा कि पल्लवन इल्लम के चारों ओर विस्तार की कोई गुंजाइश नहीं है — दक्षिण में अन्ना सलाई, पूर्व में पल्लवन सलाई, पश्चिम में कूवम नदी, और उत्तर में सेंट मैरी वॉर सिमेट्री तथा बॉडीगार्ड मुनीश्वरर मंदिर स्थित हैं। उन्होंने कहा, "अगर चेन्नई में सबसे ज्यादा ट्रैफिक जाम वाले इलाकों की सूची बनाई जाए तो पल्लवन इल्लम के आसपास का इलाका टॉप 3 में शामिल होगा।" उनके अनुसार, 20 लाख वर्ग फुट के निर्मित क्षेत्र वाला सचिवालय वहाँ खड़ा करने से अन्ना सलाई पर यातायात नियंत्रण लगभग असंभव हो जाएगा।

पर्यावरण और बाढ़ का खतरा

डॉ. रामदास ने आगाह किया कि प्रस्तावित स्थल कूवम नदी के किनारे है, और इतने बड़े परिसर के निर्माण से पर्यावरणीय क्षति के साथ साथ बाढ़ का जोखिम भी बढ़ेगा। गौरतलब है कि चेन्नई पहले ही तटीय बाढ़ की दृष्टि से अतिसंवेदनशील शहर माना जाता है और 2015 की विनाशकारी बाढ़ के बाद से नदी किनारे निर्माण को लेकर विशेषज्ञ चेतावनियाँ लगातार जारी हैं।

सरकार के बदलते रुख पर सवाल

पीएमके अध्यक्ष ने कहा कि तमिलनाडु सरकार पहले पट्टिनापक्कम का प्रस्ताव लाई, जनविरोध होने पर उसे छोड़ा, और अब पल्लवन इल्लम पर विचार कर रही है। उन्होंने इसे "एक के बाद एक गलतियाँ" करने की प्रवृत्ति बताया। उन्होंने माँग की कि सरकार यह स्पष्ट करे कि मीडिया में आ रही खबरें सच हैं या नहीं।

पीएमके का प्रस्ताव

डॉ. रामदास ने कहा कि तमिलनाडु को 25 वर्षों से अधिक समय से नए सचिवालय की आवश्यकता है और पीएमके इसके निर्माण का पूर्ण समर्थन करती है। हालाँकि, उनका सुझाव है कि सचिवालय चेन्नई के बाहर कम से कम 500 से 1,000 एकड़ भूमि पर एक एकीकृत प्रशासनिक शहर के रूप में विकसित किया जाए। उन्होंने मुख्यमंत्री के उस बयान का हवाला दिया, जिसमें उन्होंने विधानसभा में कहा था कि नया परिसर अगले 100 वर्षों की जरूरतें पूरी करने में सक्षम होगा — और तर्क दिया कि इस लक्ष्य के लिए न पट्टिनापक्कम, न पल्लवन इल्लम, कोई भी स्थल उपयुक्त है।

आगे की राह

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब तमिलनाडु में नए सचिवालय की माँग दशकों पुरानी है और सत्तारूढ़ दल द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) सरकार के लिए यह एक संवेदनशील राजनीतिक मुद्दा बन गई है। यदि सरकार अगले सप्ताह आधिकारिक घोषणा करती है, तो उसे विपक्ष के और अधिक तीखे सवालों का सामना करना पड़ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बाढ़ जोखिम, विस्तार की असंभावना — ठोस हैं और इन्हें महज विपक्षी बयानबाज़ी कहकर खारिज नहीं किया जा सकता। असली सवाल यह है कि क्या DMK सरकार मुख्यमंत्री के '100 वर्षों की जरूरतें पूरी करने' वाले वादे को गंभीरता से लेती है, या जनविरोध से बचने के लिए हर बार एक नए अस्थायी हल की ओर भागती है। चेन्नई के बाहर एकीकृत प्रशासनिक शहर की माँग दशकों पुरानी है और इसे बार बार नज़रअंदाज़ करना शासन की दूरदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।
RashtraPress
20 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पल्लवन इल्लम में सचिवालय बनाने का विवाद क्या है?
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार तमिलनाडु सरकार पट्टिनापक्कम की जगह चेन्नई की अन्ना सलाई स्थित पल्लवन इल्लम में नया सचिवालय बनाने पर विचार कर रही है। पीएमके अध्यक्ष डॉ. अंबुमणि रामदास ने इसे यातायात, पर्यावरण और विस्तार की दृष्टि से अनुपयुक्त बताया है।
पल्लवन इल्लम को सचिवालय के लिए क्यों अनुपयुक्त माना जा रहा है?
पल्लवन इल्लम कूवम नदी के किनारे है, चारों तरफ सड़कें और धार्मिक ऐतिहासिक स्थल हैं जिससे भविष्य में विस्तार असंभव होगा। यह क्षेत्र चेन्नई के टॉप 3 सर्वाधिक ट्रैफिक जाम वाले इलाकों में है और 20 लाख वर्ग फुट परिसर से बाढ़ का खतरा भी बढ़ सकता है।
पीएमके का सचिवालय के संबंध में क्या प्रस्ताव है?
पीएमके का सुझाव है कि नया सचिवालय चेन्नई के बाहर कम से कम 500 से 1,000 एकड़ की भूमि पर एकीकृत प्रशासनिक शहर के रूप में बनाया जाए। पार्टी सचिवालय निर्माण का समर्थन करती है, लेकिन चाहती है कि यह भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर दूरदर्शी तरीके से बने।
तमिलनाडु में नए सचिवालय की माँग कितनी पुरानी है?
तमिलनाडु को 25 वर्षों से अधिक समय से एक नए सचिवालय की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने विधानसभा में प्रस्ताव पेश करते हुए कहा था कि नया परिसर अगले 100 वर्षों की जरूरतें पूरी करने में सक्षम होगा।
क्या सरकार ने पल्लवन इल्लम स्थल पर आधिकारिक पुष्टि की है?
अभी तक सरकार ने इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। रिपोर्टों के अनुसार एक सप्ताह के भीतर घोषणा हो सकती है। डॉ. अंबुमणि रामदास ने सरकार से माँग की है कि वह स्पष्ट करे कि मीडिया में आ रही खबरें सच हैं या नहीं।
राष्ट्र प्रेस
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