तटीय सचिवालय योजना रद्द करो: सीपीआई का हस्ताक्षर अभियान, मछुआरों की आजीविका पर खतरे का हवाला
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) ने चेन्नई के पत्तिनापक्कम में प्रस्तावित तमिलनाडु सचिवालय परिसर के विरोध में 25 अक्टूबर 2026 को एक व्यापक हस्ताक्षर अभियान शुरू किया, जिसमें मछुआरों की आजीविका और तटीय पर्यावरण की रक्षा के लिए सरकारी आदेश द्वारा परियोजना रद्द करने की माँग की गई। पार्टी ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय से आग्रह किया कि प्रशासनिक परिसर के लिए कोई वैकल्पिक भूखंड तलाशा जाए और तटीय भूमि पर मछुआरा समुदाय के पारंपरिक अधिकारों की रक्षा की जाए।
अभियान का विवरण और नेतृत्व
इस पहल का नेतृत्व सीपीआई राज्य सचिव एम. वीरपांडियन ने किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी और अन्य वामपंथी एवं लोकतांत्रिक ताकतें मरीना बीच के निकट सचिवालय स्थापित करने के प्रस्ताव का बार-बार विरोध करती आई हैं। ज़िला स्तर पर यह अभियान जिला सचिव शिवा और निर्वाचन क्षेत्र सचिव मैरी दिव्या की अगुआई में चलाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य फोरशोर एस्टेट योजना को रद्द कराने के लिए जन-समर्थन जुटाना है।
गौरतलब है कि सीपीआई तमिलगा वेट्री कषगम (TVK) सरकार को बाहर से समर्थन देती है, जिससे यह विरोध राजनीतिक दृष्टि से और भी महत्त्वपूर्ण हो जाता है।
मछुआरों की आजीविका पर असर
वीरपांडियन ने तर्क दिया कि मछुआरे समुद्र के साथ घनिष्ठ सामंजस्य में जीते और काम करते हैं, और तट से उनका यह दीर्घकालिक संबंध भूमि-उपयोग संबंधी किसी भी निर्णय का मार्गदर्शक होना चाहिए। उन्होंने पहाड़ियों में रहने वाले समुदायों से तुलना करते हुए कहा कि मछुआरों को उनके पैतृक परिवेश से विस्थापित करना उनकी आजीविका को सीधे नुकसान पहुँचाएगा और तटीय क्षेत्र के स्वरूप को भी क्षति पहुँचाएगा।
उन्होंने कहा, 'तट से उनका जुड़ाव उनके दैनिक जीवन और काम से अविभाज्य है।' इस बयान के साथ उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि विकास में तटीय समुदायों और उनके परिवेश के बीच संबंधों का सम्मान किया जाना चाहिए।
पर्यावरणीय चिंताएँ
सीपीआई नेता ने समुद्र तट पर सरकारी परिसर के निर्माण के पर्यावरणीय दुष्प्रभावों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने समुद्री हवा को बाधित करने वाले निर्माण को 'प्रकृति पर हमला' बताया और कहा कि समुद्र तट को खुले सार्वजनिक स्थान के रूप में बनाए रखना अनिवार्य है। वीरपांडियन के अनुसार, इस प्रकार का विकास अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाई जा रही पर्यावरणीय चिंताओं के भी विपरीत होगा।
वैकल्पिक स्थल का सुझाव
उपयुक्त वैकल्पिक स्थल की अनुपलब्धता के तर्क को खारिज करते हुए वीरपांडियन ने रेसकोर्स की भूमि की ओर इशारा किया और दावा किया कि वहाँ लगभग 120 एकड़ भूमि उपलब्ध है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि प्रस्तावित परिसर के लिए मौजूदा स्थानों का मूल्यांकन किया जाए और तटीय स्थल को 'अपरिहार्य' मानने की प्रवृत्ति से बाहर निकला जाए।
आगे की राह
हस्ताक्षर अभियान के ज़रिये सीपीआई तटीय आजीविका, पर्यावरण और सार्वजनिक स्थान के उपयोग संबंधी अपनी आपत्तियों को एक साथ केंद्रित कर रही है और परियोजना पर औपचारिक सरकारी आदेश के लिए दबाव बना रही है। यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि TVK सरकार अपने सहयोगी दल की इस माँग पर क्या रुख अपनाती है और क्या वह वैकल्पिक स्थल की संभावनाओं की जाँच के लिए कोई समिति गठित करती है।