पोस्ट-पोल हिंसा PIL: ममता बनर्जी काला कोट पहन कलकत्ता हाईकोर्ट पहुंचीं, BJP ने कहा 'सिर्फ नाटक'
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी गुरुवार, 14 मई को वकीलों का काला कोट पहनकर कलकत्ता उच्च न्यायालय पहुंचीं। वे चुनाव के बाद हुई हिंसा (पोस्ट-पोल वायलेंस) से संबंधित एक जनहित याचिका (PIL) में मुख्य न्यायाधीश एचसी सुजॉय पाल की अदालत में उपस्थित हुईं। इस कदम ने पश्चिम बंगाल की राजनीतिक बहस को एक बार फिर तेज कर दिया है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह PIL 2021 विधानसभा चुनाव के बाद राज्य में कथित तौर पर हुई व्यापक हिंसा से जुड़ी है, जिसमें विभिन्न दलों के कार्यकर्ताओं पर हमले, संपत्ति नुकसान और विस्थापन के आरोप लगे थे। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने तब से इस मुद्दे को लगातार उठाया है। गौरतलब है कि नई सरकार ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में इस विषय पर अहम फैसले लिए थे, जिसके बाद यह मामला न्यायिक दायरे में आया।
BJP नेताओं की तीखी प्रतिक्रिया
BJP विधायक स्वपन दासगुप्ता ने कहा कि 2021 के चुनाव के बाद हुई हिंसा की सच्चाई सामने लाने के लिए सरकार ने ठोस कदम उठाए हैं। उनके अनुसार, जो व्यक्ति इन कदमों के विरुद्ध अदालत जा रहा है, उसकी यह कार्रवाई स्वयं उसकी आशंका और अपराधबोध को उजागर करती है।
BJP विधायक लक्ष्मीकांत ने ममता बनर्जी की इस उपस्थिति को महज राजनीतिक नाटक बताया और दावा किया कि जनता उनके इरादे भलीभाँति समझ चुकी है तथा उनका राजनीतिक प्रभाव अब क्षीण हो चुका है।
BJP विधायक अशोक डिंडा ने कहा कि ममता बनर्जी पहले भी कई बार न्यायालय का रुख कर चुकी हैं, लेकिन उन्हें राहत नहीं मिली। उन्होंने यह भी दावा किया कि 2026 के चुनाव के बाद किसी प्रकार की पोस्ट-पोल हिंसा नहीं हुई और ऐसा मानना भ्रम मात्र है। डिंडा ने आगाह किया कि यदि 2021 की पोस्ट-पोल हिंसा की फाइल आगे बढ़ी, तो खुद TMC के नेता उसमें फंस सकते हैं।
सहयोगी दल का रुख
आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के प्रमुख और विधायक हुमायूं कबीर ने कहा कि 2021 में बड़े पैमाने पर हुई हिंसा को जनता नहीं भूल सकती। उन्होंने दावा किया कि जब से सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में BJP मजबूत हुई है, तब से वैसी स्थिति राज्य में नहीं देखी गई।
TMC का बचाव
TMC नेता कुणाल घोष ने ममता बनर्जी का पुरजोर बचाव किया। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी पेशे से वकील भी हैं और वे पहले भी कई कानूनी लड़ाइयों में सक्रिय रही हैं — सर्वोच्च न्यायालय में SIR मामले से लेकर अब पोस्ट-पोल वायलेंस के मुद्दे पर हाईकोर्ट तक। घोष ने कहा कि TMC ने मतदाता सूची, मतदान पैटर्न और मतगणना के दिन की घटनाओं को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।
हालांकि घोष ने यह भी स्वीकार किया कि नई सरकार को काम करने के लिए कुछ समय दिया जाना चाहिए और हर फैसले का पहले दिन से विरोध करना जनदृष्टि में उचित नहीं लगता। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि केंद्र सरकार गलत नीतियाँ अपनाएगी, तो TMC निरंतर विरोध करती रहेगी।
आगे क्या होगा
यह PIL अब कलकत्ता उच्च न्यायालय में विचाराधीन है और मुख्य न्यायाधीश एचसी सुजॉय पाल की अदालत में सुनवाई जारी रहेगी। इस मामले का राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर गहरा असर पड़ सकता है, क्योंकि 2021 की पोस्ट-पोल हिंसा के आरोप राज्य की राजनीति में एक संवेदनशील मुद्दा बने हुए हैं।