NEP 2020 में आलोचनात्मक सोच और रचनात्मकता सर्वोच्च प्राथमिकता: शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने 25 सितंबर 2026 को बेंगलुरु के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc) में आयोजित 'सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज' कार्यक्रम में कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 का मूल उद्देश्य छात्रों में आलोचनात्मक सोच, रचनात्मकता, प्रायोगिक अधिगम और समस्या समाधान की क्षमता विकसित करना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह नीति केवल रोज़गार के लिए नहीं, बल्कि गहरे विचार और वास्तविक दुनिया की चुनौतियों से निपटने में सक्षम पीढ़ी तैयार करने के लिए बनाई गई है।
NEP 2020 का शैक्षिक दर्शन
मंत्री जोशी ने स्पष्ट किया कि NEP 2020 शिक्षा को रटने पर आधारित पद्धति से मुक्त कर प्रयोगात्मक और जिज्ञासा प्रेरित शिक्षण की ओर ले जाती है। उन्होंने कहा, "हमें काम करना चाहिए, इनोवेशन करना चाहिए, समाधान देने चाहिए... न सिर्फ भारत के लिए बल्कि दुनिया के लिए भी।" उन्होंने 'इनोवेट इन इंडिया' और 'मेक इन इंडिया' को वैश्विक आकांक्षाओं से जोड़ते हुए कहा कि भारत की 65 प्रतिशत से अधिक आबादी 35 वर्ष से कम आयु की है, जो देश को नवाचार की वैश्विक शक्ति बनाने का अभूतपूर्व अवसर देती है।
अटल टिंकरिंग लैब्स और नवाचार की ज़मीनी तस्वीर
शिक्षा मंत्री ने बताया कि देशभर में अभी 10,000 से अधिक अटल टिंकरिंग लैब्स में 1.1 करोड़ से ज़्यादा छात्र कार्यरत हैं, और इन लैब्स के माध्यम से अब तक 16 लाख से अधिक इनोवेशन प्रोजेक्ट तैयार किए जा चुके हैं। सरकार ने अगले पाँच वर्षों में 50,000 और अटल टिंकरिंग लैब्स स्थापित करने की घोषणा भी की है।
हालाँकि मंत्री ने अपने स्कूल दौरों का हवाला देते हुए एक व्यावहारिक चुनौती भी रेखांकित की — कुछ स्कूलों में लैब्स इसलिए बंद रखी गई थीं क्योंकि शिक्षकों को आशंका थी कि छात्र उपकरणों को क्षतिग्रस्त कर सकते हैं। उन्होंने आग्रह किया कि छात्रों को बिना किसी भय के प्रयोग करने की स्वतंत्रता दी जाए।
कर्नाटक पर आरोप और राजनीतिक विवाद
जोशी ने कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर आरोप लगाया कि उसने NEP 2020 को लागू करना बंद कर दिया है। उन्होंने कहा कि राज्य ने पहले नीति को लागू करना शुरू किया था, लेकिन बाद में पीछे हट गई और अब क्षेत्रीय आवश्यकताओं के अनुरूप अलग राज्य शिक्षा नीति बनाने पर काम कर रही है। गौरतलब है कि NEP 2020 के क्रियान्वयन को लेकर केंद्र और कई विपक्ष शासित राज्यों के बीच विवाद पहले से चला आ रहा है।
AI, 5G और शैक्षणिक नवाचार की मिसालें
मंत्री जोशी ने उच्च शिक्षा में नवाचार के कई उदाहरण प्रस्तुत किए। उन्होंने IIT मद्रास द्वारा निर्मित रोबोटिक सेप्टिक टैंक क्लीनर 'होमोसैप' और बोलने की क्षमता खो चुके व्यक्तियों के लिए विकसित 'इलेक्ट्रोलेरिंग्स' का विशेष रूप से उल्लेख किया। इसके अतिरिक्त, NIT वारंगल द्वारा तांबे और एल्युमीनियम के बर्तनों के लिए बनाए गए इंडक्शन स्टोव की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि इस तरह के छोटे दिखने वाले नवाचार आम नागरिकों की रोज़मर्रा की समस्याएँ हल कर सकते हैं।
उन्होंने बताया कि देशभर में 17,300 से अधिक इंस्टीट्यूशन इनोवेशन काउंसिल गठित की गई हैं और स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन में 18 लाख से अधिक छात्रों ने 3,158 वास्तविक समस्याओं पर काम किया है। हेल्थकेयर, सस्टेनेबल शहरों, कृषि और शिक्षा क्षेत्रों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के चार 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' स्थापित किए गए हैं, जिन पर ₹1,490 करोड़ व्यय किए गए हैं।
वैश्विक मंच पर भारतीय नवाचार की धाक
मंत्री जोशी ने फ्रांस के नीस में आयोजित 'भारत इनोवेट्स' कार्यक्रम का ज़िक्र करते हुए बताया कि भारत के उच्च शिक्षा संस्थानों से निकले 120 डीप टेक स्टार्टअप्स वहाँ प्रदर्शित किए गए। फ्रांस के राष्ट्राध्यक्ष ने जो समय शुरू में 20 मिनट रखा था, वह भारतीय नवाचार की गहराई देखकर एक घंटे से अधिक हो गया। इसके बाद कनाडा सहित 20 से अधिक देशों ने इसी तरह के शोकेस के लिए अनुरोध किया। जोशी ने 5G तकनीक के स्वदेशी विकास और भविष्य में भारत में ही डिजाइन और निर्मित स्मार्टफोन को घरेलू व अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में बेचने के लक्ष्य पर भी ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि 2047 तक 'विकसित भारत' का सपना आज की युवा पीढ़ी के हाथों में है।