केजरीवाल न्यायपालिका पर सवाल उठाकर सिस्टम को कमजोर करना चाहते हैं: मंत्री प्रवेश वर्मा
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 20 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। दिल्ली सरकार के मंत्री प्रवेश वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट के उस निर्णय पर प्रतिक्रिया दी है, जिसमें कहा गया है कि केजरीवाल के मामले की सुनवाई हाई कोर्ट के वही जज करेंगे। उन्होंने कहा कि कोर्टरूम में जज से सवाल करना, केजरीवाल का न्यायपालिका के प्रति एक नकारात्मक धारणा स्थापित करने का प्रयास प्रतीत होता है।
प्रवेश वर्मा ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि आज कोर्ट ने जो निर्णय दिया है, हम उसका स्वागत करते हैं। यह अरविंद केजरीवाल से ही अपेक्षित था कि वह ऐसे कदम उठाएंगे जिससे हमारी न्यायपालिका पर सवाल उठे। वह व्यक्ति जिसने सेना पर सवाल उठाया, अब वह हमारी न्यायपालिका पर सवाल उठाकर पूरे प्रणाली को कमजोर करना चाहते हैं। कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि एक आरोपी यह नहीं तय कर सकता कि उसका केस कौन सुनेगा। कोर्ट ने कहा कि जज को यह सोचने की आवश्यकता है कि वह खुद आरोपी नहीं है, बल्कि वह तो यह तय करेगा कि याचिकाकर्ता आरोपी है या नहीं। सोचिए, अगर देश में लाखों मामले चल रहे हैं और सभी याचिकाकर्ता यह तय करने लगें कि कौन जज उनको सुनेगा, तो हमारी प्रणाली का क्या होगा? क्या अरविंद केजरीवाल चाहते हैं कि कोर्ट उनके पास जाकर पूछे कि उन्हें किस जज के सामने अपना मामला प्रस्तुत करना है?
उन्होंने कहा कि सबसे अजीब यह है कि केजरीवाल की अपील में कहा गया है कि लोअर कोर्ट का निर्णय सही है और वह जज ईमानदार हैं। लेकिन अब वह हाई कोर्ट की उस महिला जज पर सवाल उठा रहे हैं, जो किसी कार्यक्रम में गई थीं और केजरीवाल ने उनके बारे में धारणा बना ली है। यदि हाई कोर्ट का निर्णय उनके पक्ष में आता है, तो वह उस जज को ईमानदार कहेंगे; और यदि नहीं आता तो कहेंगे कि वह किसी विचारधारा से प्रभावित हैं।
वर्मा ने कहा कि केजरीवाल जानते हैं कि उन्होंने कई गलतियां की हैं। शराब घोटाले में हजारों करोड़ की रिश्वत दी गई और दलाली खाई गई। इसलिए वह डर रहे हैं। जहां वह लोअर कोर्ट का निर्णय आने के बाद सहानुभूति बटोर रहे थे, वहीं अब वह हाई कोर्ट के जज को गलत बता रहे हैं। क्या केजरीवाल यह तय करेंगे कि किस जज के सामने उनका मामला सुना जाएगा? मैं उनसे अपेक्षा करता हूं कि वह एक जिम्मेदार नागरिक के नाते इस पूरी कानूनी प्रक्रिया में भाग लें और अपने सारे सबूत पेश करें तथा देश की कानूनी प्रक्रिया पर विश्वास रखते हुए निर्णय का इंतजार करें।