शरद पूर्णिमा 2026: प्रयागराज के त्रिवेणी संगम पर ब्रह्म मुहूर्त से उमड़े श्रद्धालु, खीर परंपरा का महत्व
सारांश
मुख्य बातें
प्रयागराज के पवित्र त्रिवेणी संगम पर शरद पूर्णिमा के अवसर पर 25 अक्टूबर 2026 को ब्रह्म मुहूर्त से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम पर हज़ारों आस्थावान लोग पवित्र स्नान कर माँ गंगा और माता लक्ष्मी की विशेष पूजा-अर्चना में लीन दिखे। स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने परिवार की सुख-समृद्धि, आरोग्य और जन-कल्याण की कामना की।
शरद पूर्णिमा का धार्मिक महत्व
सनातन धर्म की मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा वर्ष की एकमात्र ऐसी रात्रि होती है जब चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से पूर्ण होता है। धार्मिक मान्यता यह भी है कि इस विशेष रात्रि में चंद्रमा की किरणों से अमृत की वर्षा होती है, जिस कारण इस तिथि को आरोग्य और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। यह पर्व विशेष रूप से माँ लक्ष्मी और इंद्र देव की उपासना के लिए भी महत्त्वपूर्ण माना जाता है।
खीर रखने की प्राचीन परंपरा
शरद पूर्णिमा की रात खुले आसमान के नीचे खीर रखने की परंपरा सदियों पुरानी है। मान्यता है कि चंद्रमा की अमृतमयी किरणें जब खीर पर पड़ती हैं, तो उसमें औषधीय गुण आ जाते हैं। अगले दिन इस खीर को प्रसाद के रूप में ग्रहण करने से कई रोगों से मुक्ति और शरीर को आरोग्य प्राप्त होता है — ऐसी श्रद्धालुओं की आस्था है।
श्रद्धालुओं की आवाज़
संगम पहुँची महिला श्रद्धालु संजू ने कहा, 'आज पूर्णिमा है और आज हम गंगा स्नान करने आए हैं। हम सबके कल्याण के लिए भगवान से, गंगा मैया से प्रार्थना करने आए हैं। आज के दिन का बहुत बड़ा महत्व है। आज के दिन खीर बनाई जाती है, जिसे रात भर खुले में रखा जाता है।'
तीर्थ पुरोहित का संदेश
तीर्थ पुरोहित गोपाल गुरु ने इस दिन का महत्व बताते हुए कहा, 'आज शरद पूर्णिमा है और सभी गंगा स्नान करने आए हैं। लोग स्नान कर शाम के समय भगवान की कृपा और आरोग्य प्राप्त करने के लिए खीर बनाएंगे और उसे छत पर रखेंगे। उस पर चंद्रमा की किरणें पड़ेंगी, जो अमृत के समान होती हैं। सुबह भोग लगाकर लोग उसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करेंगे और बांटेंगे।' गुरु ने यह भी बताया कि आज रात माँ लक्ष्मी और इंद्र भगवान की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि बढ़ती है और बच्चे स्वस्थ रहते हैं। उन्होंने कहा, 'प्रयाग में गंगा स्नान का अपना अलग ही आनंद है।'
आगे का उत्सव
दिनभर संगम तट पर श्रद्धालुओं का आना जारी रहने की संभावना है। सायंकाल विशेष आरती और पूजन के बाद रात्रि में खीर रखने की परंपरा निभाई जाएगी। तीर्थराज प्रयागराज में शरद पूर्णिमा का यह उत्सव आस्था, परंपरा और सामूहिक श्रद्धा का अनूठा संगम बना हुआ है।