पंजाब BJP अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों का ऐलान: नशा-विरोधी कार्यकर्ता परविंदर झोटा को न्याय मिलने तक पहनेंगे काली पगड़ी
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब भारतीय जनता पार्टी (BJP) के अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने 18 अक्टूबर 2026 को घोषणा की कि नशा-विरोधी अभियान में सक्रिय कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या के मामले में न्याय मिलने तक वे काली पगड़ी पहनेंगे। यह ऐलान उन्होंने मानसा में चल रहे न्याय-माँग प्रदर्शन में शिरकत के बाद किया, जहाँ उन्होंने पंजाब में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर कानून-व्यवस्था की विफलता का आरोप लगाया।
मानसा में विरोध प्रदर्शन
ढिल्लों शनिवार, 18 अक्टूबर को मानसा कस्बे में परविंदर सिंह झोटा के लिए न्याय की माँग कर रहे प्रदर्शनकारियों के बीच पहुँचे। वहाँ उन्होंने खुद काली पगड़ी पहनकर यह प्रतीकात्मक विरोध शुरू किया। झोटा के पिता भीम सिंह और प्रदर्शन में मौजूद अन्य लोगों ने उनकी इस अपील का समर्थन किया।
ढिल्लों ने कहा कि वे इस विरोध में एक पार्टी नेता के रूप में नहीं, बल्कि पीड़ित परिवार के विस्तारित सदस्य की हैसियत से शामिल हुए हैं।
ढिल्लों का बयान — कानून-व्यवस्था पर सवाल
ढिल्लों ने कहा, 'नशीली दवाओं के खिलाफ आवाज़ उठाने वाले एक युवक की बेरहमी से हत्या कर दी गई। यह सिर्फ परविंदर सिंह की हत्या नहीं है — यह पंजाब में कानून-व्यवस्था की भी हत्या है।' उन्होंने कहा कि इस घटना ने पंजाब के लोगों को गहरा सदमा पहुँचाया है।
उनके अनुसार, काली पगड़ी महज़ एक कपड़ा नहीं, बल्कि AAP सरकार की विफलता के खिलाफ प्रतिरोध का प्रतीक है।
पंजाबियों से एकजुटता की अपील
ढिल्लों ने पंजाब के सभी नागरिकों से आग्रह किया कि वे काले कपड़े, काले दुपट्टे पहनकर और काले झंडे लेकर पीड़ित परिवार के समर्थन में एकजुट हों। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह प्रतीकात्मक विरोध तब तक जारी रहेगा जब तक झोटा के परिवार को न्याय नहीं मिल जाता।
पृष्ठभूमि — परविंदर सिंह झोटा की हत्या
परविंदर सिंह झोटा एक युवा कार्यकर्ता थे जो पंजाब में नशे के खिलाफ अभियान चला रहे थे। कथित तौर पर इस अभियान के चलते उनकी हत्या कर दी गई। गौरतलब है कि पंजाब में नशे की समस्या लंबे समय से गंभीर राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा रही है, और इस मामले ने राज्य में सत्तारूढ़ AAP सरकार को घेरने का राजनीतिक अवसर विपक्षी दलों को दिया है।
BJP, जो पंजाब में मुख्य विपक्षी दलों में से एक है, इस घटना को AAP के शासनकाल में कानून-व्यवस्था के पतन के प्रमाण के रूप में पेश कर रही है। आलोचकों का कहना है कि राज्य सरकार को अब तक ठोस कार्रवाई करनी चाहिए थी।
मामले में आगे की जाँच और सरकारी प्रतिक्रिया पर सभी की नज़रें टिकी हैं।