पंजाब BJP ने PMAY घोटाले की जांच माँगी: ममदोट में 31 घर प्रभावशाली जमींदारों को आवंटित
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पूर्व अध्यक्ष अश्वनी शर्मा ने 1 अक्टूबर 2026 को राज्य सरकार से फिरोजपुर जिले के ममदोट में प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत घरों के आवंटन में कथित रिश्वतखोरी की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच का आदेश देने की माँग की। उनका आरोप है कि 400 जरूरतमंद परिवारों की सूची में से मात्र 33 घरों को मंजूरी दी गई और उनमें से कथित तौर पर केवल 2 घर वास्तविक लाभार्थियों को मिले।
आरोप: किसे मिले घर, किसे छोड़ा गया
शर्मा के अनुसार, शेष 31 घर कथित तौर पर 50 से 200 एकड़ भूमि के स्वामी प्रभावशाली व्यक्तियों को आवंटित किए गए। यह ऐसे समय में आया है जब PMAY केंद्र सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता वाली कल्याण योजना मानी जाती है, जिसका उद्देश्य ग़रीबतम परिवारों को छत मुहैया कराना है। शर्मा ने इन कथित अनियमितताओं को गरीबी से जूझ रहे लोगों के साथ घोर अन्याय बताया।
उन्होंने एक बयान में कहा कि रिश्वत के बदले घरों के आवंटन के आरोप बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और शर्मनाक हैं। शर्मा ने यह भी आरोप लगाया कि इस तरह की प्रथाएँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कमज़ोर तबकों के कल्याण के दृष्टिकोण को कमज़ोर करती हैं।
BJP की प्रमुख माँगें
शर्मा ने राज्य सरकार के सामने कई ठोस माँगें रखी हैं। पहली, मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच का आदेश दिया जाए। दूसरी, रिश्वत लेने के आरोपी कर्मचारियों के विरुद्ध आरोप सिद्ध होने पर कठोर कार्रवाई की जाए।
तीसरी, जिन लाभार्थियों को घर आवंटित किए गए हैं, उनकी पात्रता की गहन जाँच हो। चौथी, जिन 367 निम्न-आय वाले परिवारों के आवेदन खारिज किए गए, उनके आवेदनों का पुनः सत्यापन किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि BJP प्रधानमंत्री आवास योजना में किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं करेगी।
दलित गाँवों को PMAY में शामिल करने पर BJP का स्वागत
इसी बीच, पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री विजय सांपला ने PMAY के अंतर्गत पंजाब के 484 दलित बहुल गाँवों को शामिल किए जाने पर प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद दिया। इन गाँवों में 40 प्रतिशत से अधिक आबादी दलित समुदाय से है। केंद्र सरकार इन गाँवों में विकास कार्यों के लिए प्रत्येक गाँव को ₹20 लाख तक का अनुदान प्रदान करेगी।
सांपला ने कहा कि इस योजना के लाभ केवल सड़क और भवन निर्माण तक सीमित नहीं हैं। यह पेयजल, स्वच्छता, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं पोषण, सामाजिक सुरक्षा, आवास, बिजली, स्वच्छ ईंधन, कृषि, वित्तीय समावेशन, डिजिटल सुविधाएँ, रोज़गार और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों को भी समेटती है।
आम जनता पर असर
ममदोट की घटना उन सैकड़ों परिवारों के लिए सीधा मसला है जो वर्षों से पक्के घर की प्रतीक्षा में हैं। गौरतलब है कि PMAY जैसी केंद्रीय योजनाओं में ज़मीनी स्तर पर कथित धाँधली के आरोप नए नहीं हैं — यह देशभर में कई राज्यों में दर्ज हो चुके हैं। यदि ममदोट के आरोप जाँच में सही पाए जाते हैं, तो यह न केवल संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही का सवाल बनेगा, बल्कि पंजाब में PMAY के क्रियान्वयन की पूरी प्रक्रिया पर सवालिया निशान लगाएगा।
क्या होगा आगे
अभी तक पंजाब राज्य सरकार की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। BJP ने संकेत दिया है कि यदि जांच का आदेश नहीं दिया गया तो वह आंदोलन की राह अपना सकती है। दूसरी ओर, 484 दलित बहुल गाँवों को PMAY में शामिल करने की घोषणा राज्य में दलित मतदाताओं को लेकर BJP की रणनीतिक सक्रियता की भी झलक देती है।