पंजाब CBI छापेमारी पर सियासी घमासान: BJP ने कहा — हाईकोर्ट के आदेश पर हुई FIR, केंद्र ने नहीं भेजी CBI
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के सीधे निर्देश पर केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के ओएसडी समेत 5 अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर पंजाब में 8 स्थानों पर एक साथ छापेमारी की, जिससे राज्य की सियासत में भूचाल आ गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 6 अक्टूबर 2026 को स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई केंद्र सरकार के निर्देश पर नहीं, बल्कि न्यायपालिका के आदेश और प्रवर्तन निदेशालय (ED) की रिपोर्ट के आधार पर की गई है।
मुख्य घटनाक्रम
CBI की इस कार्रवाई के बाद आम आदमी पार्टी (AAP) ने इसे केंद्र सरकार की राजनीतिक बदले की कार्रवाई करार दिया था। इसके जवाब में BJP नेताओं ने तथ्यों को सार्वजनिक रूप से सामने रखा। BJP महासचिव तरुण चुघ ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, भगवंत मान, तथ्य स्पष्ट हैं। भारत सरकार की ओर से पंजाब में CBI नहीं भेजी गई है। पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने CBI को मामला दर्ज करने और ED द्वारा उसके समक्ष रखी गई सामग्री के आधार पर आरोपों की जाँच करने का निर्देश दिया।'
चुघ ने यह भी स्पष्ट किया कि जाँच के दायरे में IAS/IPS पोस्टिंग, विभागीय कार्यवाही, नीतिगत निर्णय, निविदा शर्तें, लाइसेंस, CLU मामले, संपत्ति विवाद और राजस्व विभाग के मामलों में कथित हस्तक्षेप शामिल हैं।
BJP नेताओं के आरोप
केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने भगवंत मान सरकार पर कड़े शब्दों में हमला बोला। उन्होंने लिखा, 'पंजाब भर में खुद को 'ईमानदार सीएम' बताने वाले होर्डिंग लगाने वाले भगवंत मान की असलियत आज सामने आ गई है।' बिट्टू के अनुसार CBI ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के सीधे आदेशों और ED की रिपोर्ट पर कार्रवाई करते हुए FIR दर्ज की।
उन्होंने कथित आरोपों की फेहरिस्त भी गिनाई — IAS/IPS अधिकारियों के तबादलों की बोली लगाना, सरकारी टेंडरों में हेरफेर, जमीन के CLU (भूमि उपयोग परिवर्तन) की मंजूरी में अनियमितता और निजी फायदे के लिए गोपनीय नीति मसौदों को लीक करना। बिट्टू ने कहा, 'ईमानदारी सिर्फ विज्ञापनों तक ही सीमित थी, जबकि बंद दरवाजों के पीछे सत्ता का खुलेआम दुरुपयोग किया जा रहा था।'
AAP का रुख और केंद्र-राज्य टकराव
गौरतलब है कि AAP और BJP के बीच केंद्रीय एजेंसियों के उपयोग को लेकर यह विवाद नया नहीं है। यह ऐसे समय में आया है जब कई विपक्षी-शासित राज्य केंद्रीय जाँच एजेंसियों की भूमिका को राजनीतिक हथियार बताते रहे हैं। हालाँकि, इस बार BJP ने न्यायिक आदेश का हवाला देकर यह स्थापित करने की कोशिश की है कि कार्रवाई कार्यपालिका-प्रेरित नहीं, न्यायालय-आदेशित है — एक महत्वपूर्ण संवैधानिक अंतर।
चुघ ने अपील की, 'राजनीतिक आरोपों के बजाय जाँच और न्यायिक प्रक्रिया को अपना काम करने दें। यदि आरोप निराधार हैं तो जाँच से यह भी पता चल जाएगा। पंजाब पारदर्शिता, तथ्य और जवाबदेही का हकदार है।'
आगे क्या होगा
CBI की जाँच अब न्यायिक निगरानी में आगे बढ़ेगी, जिससे इसे प्रत्यक्ष राजनीतिक हस्तक्षेप से अलग रखा जाएगा — कम से कम प्रक्रियागत रूप से। भगवंत मान सरकार पर दबाव बढ़ेगा और आने वाले दिनों में इस मामले में और नाम सामने आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। बिट्टू ने कहा कि यह निष्पक्ष जाँच सुनिश्चित करेगी कि सच्चाई सामने आए और दोषियों को कानून के तहत कड़ी सजा मिले।