रबी फसलों के एमएसपी में बड़ी बढ़ोतरी: कुसुम पर ₹675, सरसों पर ₹413 प्रति क्विंटल का इज़ाफा
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने 30 सितंबर 2026 को रबी विपणन सत्र 2027-28 के लिए सभी अनिवार्य रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने यह फैसला किया, जिसका उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करना है।
फसलवार एमएसपी बढ़ोतरी का ब्यौरा
आधिकारिक बयान के अनुसार, इस बार सबसे अधिक बढ़ोतरी कुसुम के एमएसपी में ₹675 प्रति क्विंटल की गई है। रेपसीड और सरसों के लिए ₹413 प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है, जो तिलहन फसलों को प्रोत्साहित करने की नीति का हिस्सा है।
मसूर के एमएसपी में ₹390 प्रति क्विंटल, जौ में ₹136 प्रति क्विंटल, चने में ₹83 प्रति क्विंटल और गेहूं में ₹25 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी को मंजूरी दी गई है। दालों और तिलहन फसलों पर अपेक्षाकृत अधिक वृद्धि यह संकेत देती है कि सरकार का ज़ोर खाद्य तेल और प्रोटीन उत्पादन में आत्मनिर्भरता पर है।
बजट 2018-19 की घोषणा से जुड़ाव
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह बढ़ोतरी केंद्रीय बजट 2018-19 में की गई उस घोषणा के अनुरूप है, जिसके तहत एमएसपी को अखिल भारतीय भारित औसत उत्पादन लागत के कम से कम 1.5 गुना के स्तर पर तय किया जाता है। यह फॉर्मूला किसानों को न्यूनतम 50% लाभ की गारंटी देने का प्रयास करता है, हालांकि आलोचकों का कहना है कि लागत-गणना की पद्धति और वास्तविक बाज़ार मूल्य के बीच अंतर बना रहता है।
खरीद और भुगतान में ऐतिहासिक वृद्धि
सरकार के आंकड़ों के अनुसार, 2014-15 से 2025-26 के बीच गेहूं की कुल खरीद 3,715 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) रही, जो 2004-05 से 2013-14 के दौरान 2,254 एलएमटी थी। इसी अवधि में छह रबी फसलों की संयुक्त खरीद 3,921 एलएमटी तक पहुँची, जबकि पिछले दशक में यह 2,302 एलएमटी थी।
एमएसपी भुगतान के मोर्चे पर भी उल्लेखनीय बदलाव आया है। 2014-15 से 2025-26 के दौरान गेहूं उत्पादक किसानों को एमएसपी के रूप में ₹7.31 लाख करोड़ का भुगतान किया गया, जबकि इससे पहले के दशक में यह आंकड़ा ₹2.56 लाख करोड़ था। छह रबी फसलों के लिए संयुक्त एमएसपी भुगतान ₹8.36 लाख करोड़ रहा, जो पूर्व दशक के ₹2.65 लाख करोड़ की तुलना में तीन गुने से अधिक है।
दालों और तिलहन को क्यों मिल रही प्राथमिकता
हाल के वर्षों में केंद्र सरकार अनाज के अलावा दालों और तिलहनों की खेती को प्रोत्साहित करने की नीति पर चल रही है। इन फसलों पर अपेक्षाकृत अधिक एमएसपी बढ़ोतरी इसी रणनीति का हिस्सा है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत खाद्य तेल आयात पर अपनी निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा है और दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता का लक्ष्य तय कर रहा है।
किसानों और कृषि क्षेत्र पर असर
यह निर्णय रबी बुवाई के मौसम से ठीक पहले आया है, जो अक्टूबर-नवंबर में शुरू होता है। कुसुम और सरसों उत्पादकों को सबसे अधिक लाभ मिलने की संभावना है। गौरतलब है कि यह एमएसपी वृद्धि सरकारी खरीद मूल्य को निर्धारित करती है — बाज़ार में वास्तविक मूल्य इससे भिन्न हो सकता है, जो किसान संगठनों की एक पुरानी शिकायत है। आगामी रबी सत्र में फसल विविधीकरण पर इस नीति का असर दिखाई देगा।