रबी फसलों की सरकारी खरीद 3,921 लाख मीट्रिक टन पर, एमएसपी भुगतान ₹8.36 लाख करोड़ के पार
सारांश
मुख्य बातें
सरकार द्वारा जारी आधिकारिक फैक्टशीट के अनुसार, छह प्रमुख रबी फसलों की खरीद वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 3,921 लाख मीट्रिक टन हो गई है, जो 2004-05 में 2,302 लाख मीट्रिक टन थी। इसी अवधि में किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के तहत किया गया कुल भुगतान ₹2.65 लाख करोड़ से बढ़कर ₹8.36 लाख करोड़ हो गया है — यानी दो दशकों में तीन गुने से अधिक की वृद्धि। यह आँकड़े 29 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में जारी फैक्टशीट में सामने आए।
रबी एमएसपी 2027-28: फसलवार बढ़ोतरी
केंद्र सरकार ने 30 सितंबर 2026 को रबी विपणन सत्र (आरएमएस) 2027-28 के लिए सभी निर्धारित रबी फसलों के एमएसपी में वृद्धि को मंजूरी दी। इस सत्र में 324 लाख मीट्रिक टन उपज के लिए किसानों को लगभग ₹90,962 करोड़ का भुगतान किए जाने का अनुमान है।
फसलवार एमएसपी वृद्धि में सबसे अधिक बढ़ोतरी कुसुम के लिए की गई है — ₹675 प्रति क्विंटल। इसके बाद रेपसीड और सरसों (₹413 प्रति क्विंटल), मसूर (₹390 प्रति क्विंटल) और जौ (₹136 प्रति क्विंटल) का स्थान है। गेहूं और चना के एमएसपी में भी पिछले वर्ष की तुलना में वृद्धि दर्ज की गई है।
उत्पादन लागत पर मिलने वाले रिटर्न के मामले में गेहूं सबसे आगे है, जहाँ 106 प्रतिशत मार्जिन का अनुमान है। इसके बाद रेपसीड और सरसों (96 प्रतिशत), मसूर (92 प्रतिशत) और चना (59 प्रतिशत) का नंबर आता है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म से पारदर्शिता में सुधार
फैक्टशीट में कहा गया है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म खरीद और भुगतान प्रक्रियाओं की 'सुलभता और पारदर्शिता' बढ़ा रहे हैं। 19 अक्टूबर 2026 तक 'ई-संयुक्त' प्लेटफॉर्म के ज़रिए 43 लाख से अधिक किसानों से 37.45 लाख मीट्रिक टन से अधिक उपज की खरीद की गई है और किसानों के खातों में ₹13,000 करोड़ से अधिक की राशि सीधे जमा की गई है।
वहीं, 'ई-समृद्धि' प्लेटफॉर्म पर 1.37 करोड़ से अधिक किसान पंजीकृत हैं। इसके माध्यम से 2.25 करोड़ यूनिट से अधिक उपज की खरीद हो चुकी है और किसानों को 81 लाख से अधिक बार भुगतान किया जा चुका है।
एमएसपी का ढाँचा और सीएसीपी की भूमिका
सरकार हर वर्ष 22 प्रमुख कृषि फसलों के लिए एमएसपी की घोषणा करती है। ये दरें कृषि लागत और मूल्य आयोग (सीएसीपी) की सिफारिशों पर आधारित होती हैं। फैक्टशीट के अनुसार, रबी फसलों के एमएसपी में बढ़ोतरी का उद्देश्य किसानों को उपज का उचित मूल्य दिलाने के साथ-साथ फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करना भी है।
गौरतलब है कि यह आँकड़े ऐसे समय में सामने आए हैं जब कृषि क्षेत्र में सरकारी खरीद प्रणाली की प्रासंगिकता और एमएसपी को कानूनी गारंटी देने की माँग लगातार राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनी हुई है।
आगे की राह
आरएमएस 2027-28 की खरीद प्रक्रिया जारी है और सरकार का लक्ष्य डिजिटल भुगतान प्रणाली के विस्तार से अधिक किसानों को औपचारिक खरीद नेटवर्क में लाना है। विशेषज्ञों के अनुसार, डिजिटल प्लेटफॉर्म के ज़रिए भुगतान की सीधी डिलीवरी बिचौलियों की भूमिका को सीमित करने में सहायक हो सकती है — हालाँकि छोटे और सीमांत किसानों तक पहुँच अभी भी एक चुनौती बनी हुई है।