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रबी फसलों का एमएसपी 2027-28: कुसुम में ₹675 की बढ़ोतरी, हांसी के किसानों ने जताई उम्मीद

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रबी फसलों का एमएसपी 2027-28: कुसुम में ₹675 की बढ़ोतरी, हांसी के किसानों ने जताई उम्मीद

सारांश

केंद्र सरकार ने 2027-28 के लिए छह रबी फसलों का एमएसपी बढ़ाया — कुसुम में सबसे अधिक ₹675 प्रति क्विंटल की वृद्धि। हांसी के किसानों ने स्वागत किया, लेकिन सवाल यह है कि मंडियों में वास्तविक खरीद इस घोषित मूल्य तक पहुँचेगी या नहीं।

मुख्य बातें

केंद्र सरकार ने मार्केटिंग सीजन 2027-28 के लिए छह रबी फसलों का एमएसपी बढ़ाया।
कुसुम में सर्वाधिक ₹675 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी; गेहूं में सबसे कम ₹25 प्रति क्विंटल ।
गेहूं ₹2,610 , सरसों ₹6,613 , मसूर ₹7,390 , चना ₹5,958 , कुसुम ₹7,215 , जौ ₹2,286 प्रति क्विंटल तय।
हांसी के किसान मंजीत यादव और रामबिलास ने फैसले का स्वागत किया, लेकिन मंडी खरीद मूल्य पर चिंता जताई।
किसानों के अनुसार खेती की बढ़ती लागत के मद्देनज़र एमएसपी का वास्तविक लाभ खरीद की मात्रा और मूल्य पर निर्भर करेगा।

केंद्र सरकार ने मार्केटिंग सीजन 2027-28 के लिए छह प्रमुख रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में बढ़ोतरी की घोषणा की है। इस फैसले का उद्देश्य किसानों को उनकी उपज पर लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करना और फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करना बताया गया है। हरियाणा के हांसी क्षेत्र के किसानों ने इस कदम को खेती और आमदनी के नज़रिए से राहतभरा बताया है, हालाँकि उन्होंने मंडियों में वास्तविक खरीद मूल्य को लेकर चिंता भी जताई है।

नई एमएसपी दरें: फसलवार विवरण

सरकार द्वारा घोषित नई दरों के अनुसार गेहूं का एमएसपी ₹2,610 प्रति क्विंटल, जौ का ₹2,286, चना का ₹5,958, मसूर का ₹7,390, सरसों का ₹6,613 और कुसुम का ₹7,215 प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है।

बढ़ोतरी के मामले में कुसुम सबसे आगे है, जिसके एमएसपी में ₹675 प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है। इसके बाद सरसों में ₹413, मसूर में ₹390, जौ में ₹136, चने में ₹83 और गेहूं में ₹25 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है।

किसानों की राय: उम्मीद के साथ सवाल भी

जमावड़ी के किसान मंजीत यादव ने एमएसपी बढ़ोतरी का स्वागत करते हुए कहा कि 'चना और गेहूं समेत फसलों के भाव बढ़ने से किसानों को खुशहाली मिलने की उम्मीद है।' उन्होंने यह भी कहा कि 'अगर सरकार इसी तरह किसानों को लगातार प्रोत्साहित करती रहे तो किसान आर्थिक रूप से मजबूत हो सकते हैं।'

किसान रामबिलास ने भी केंद्र सरकार के इस फैसले को सकारात्मक बताया। उन्होंने कहा कि 'सरकार ने चना और गेहूं के दाम बढ़ाकर अच्छा काम किया है, लेकिन अगर एमएसपी में और बढ़ोतरी होती तो किसानों के लिए और बेहतर होता।'

यह ऐसे समय में आया है जब खेती की लागत — खाद, बीज, डीजल और मज़दूरी — लगातार बढ़ रही है। किसानों का कहना है कि बढ़े हुए एमएसपी का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा जब मंडियों में फसल की खरीद निर्धारित समर्थन मूल्य के आसपास या उससे बेहतर भाव पर हो।

सरकार की अन्य कृषि योजनाएँ

एमएसपी बढ़ोतरी के अलावा किसान केंद्र सरकार की अन्य योजनाओं का भी उल्लेख करते हैं। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत आर्थिक सहायता, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और कृषि क्षेत्र से जुड़ी अन्य योजनाओं के ज़रिए किसानों को अलग-अलग स्तर पर सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।

गौरतलब है कि फसल विविधीकरण को बढ़ावा देना सरकार की दीर्घकालिक कृषि नीति का हिस्सा है, जिसमें तिलहन और दलहन जैसी फसलों को प्रोत्साहित करना प्राथमिकता में है — और कुसुम व मसूर की एमएसपी में अपेक्षाकृत अधिक बढ़ोतरी इसी दिशा में एक संकेत है।

आगे क्या होगा

किसानों की असली परीक्षा रबी सीजन की बुआई और उसके बाद मंडियों में खरीद के दौरान होगी। आलोचकों का कहना है कि एमएसपी की घोषणा और उसका ज़मीनी क्रियान्वयन अक्सर एक-दूसरे से मेल नहीं खाते। हांसी क्षेत्र के किसान उम्मीद कर रहे हैं कि इस बार सरकारी खरीद तंत्र घोषित मूल्य पर सक्रिय रहे, ताकि बढ़ा हुआ एमएसपी केवल कागज़ों तक सीमित न रहे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन गेहूं में महज़ ₹25 की वृद्धि यह सवाल खड़ा करती है कि क्या यह बढ़ोतरी बढ़ती उत्पादन लागत के अनुपात में है। असली कसौटी यह होगी कि सरकारी खरीद एजेंसियाँ मंडियों में इन दरों पर फसल खरीदती हैं या नहीं — क्योंकि अतीत में एमएसपी घोषणाएँ और ज़मीनी खरीद के बीच की खाई किसानों की आय पर सीधा असर डालती रही है। बिना मज़बूत खरीद तंत्र के, यह बढ़ोतरी उन घोषणाओं की कड़ी बन सकती है जो किसान के खाते तक पूरी तरह नहीं पहुँचतीं।
RashtraPress
30 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रबी फसलों का एमएसपी 2027-28 में कितना बढ़ा?
केंद्र सरकार ने मार्केटिंग सीजन 2027-28 के लिए छह रबी फसलों का एमएसपी बढ़ाया है — कुसुम में सबसे अधिक ₹675 प्रति क्विंटल और गेहूं में सबसे कम ₹25 प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है। सरसों में ₹413, मसूर में ₹390, जौ में ₹136 और चने में ₹83 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई है।
2027-28 में गेहूं का एमएसपी कितना है?
2027-28 मार्केटिंग सीजन के लिए गेहूं का एमएसपी ₹2,610 प्रति क्विंटल तय किया गया है, जो पिछले सीजन की तुलना में ₹25 प्रति क्विंटल अधिक है।
एमएसपी बढ़ोतरी से किसानों को वास्तविक फायदा कब होगा?
किसानों के अनुसार एमएसपी बढ़ोतरी का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा जब मंडियों में फसल की खरीद घोषित समर्थन मूल्य के आसपास या उससे अधिक भाव पर हो। खरीद की मात्रा और सरकारी खरीद तंत्र की सक्रियता इसमें निर्णायक भूमिका निभाएगी।
कुसुम के एमएसपी में सबसे अधिक बढ़ोतरी क्यों की गई?
कुसुम के एमएसपी में ₹675 प्रति क्विंटल की सर्वाधिक बढ़ोतरी की गई है, जो सरकार की फसल विविधीकरण नीति का हिस्सा मानी जा रही है। तिलहन फसलों को प्रोत्साहित करना सरकार की दीर्घकालिक कृषि प्राथमिकताओं में शामिल है।
हांसी के किसानों ने एमएसपी बढ़ोतरी पर क्या कहा?
हांसी के किसान मंजीत यादव ने बढ़ोतरी का स्वागत करते हुए कहा कि उचित मूल्य मिलने से किसान आर्थिक रूप से मजबूत होगा। किसान रामबिलास ने भी फैसले को सकारात्मक बताया, लेकिन कहा कि और अधिक बढ़ोतरी होती तो बेहतर होता।
राष्ट्र प्रेस
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