रबी फसल एमएसपी 2027-28: गेहूं ₹2,610, मसूर ₹7,390 प्रति क्विंटल तय, किसानों को राहत
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने मार्केटिंग सीजन 2027-28 के लिए प्रमुख रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में बढ़ोतरी की घोषणा की है, जिससे उत्तर प्रदेश के कुशीनगर और छत्तीसगढ़ के धमतरी सहित देशभर के किसानों में राहत की उम्मीद जगी है। गेहूं, जौ, चना, मसूर, सरसों और कुसुम — छह प्रमुख रबी फसलों के समर्थन मूल्य में इजाफा किया गया है। सरकार के अनुसार, इस निर्णय से किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य मिलने के साथ-साथ फसल विविधीकरण को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
मुख्य एमएसपी दरें: फसलवार विवरण
केंद्र सरकार द्वारा घोषित मार्केटिंग सीजन 2027-28 के लिए एमएसपी दरें इस प्रकार हैं — गेहूं: ₹2,610 प्रति क्विंटल, जौ: ₹2,286 प्रति क्विंटल, चना: ₹5,958 प्रति क्विंटल, मसूर: ₹7,390 प्रति क्विंटल, सरसों: ₹6,613 प्रति क्विंटल, और कुसुम: ₹7,215 प्रति क्विंटल।
यह ऐसे समय में आया है जब जुताई, बुवाई, खाद, बीज, सिंचाई और मजदूरी पर होने वाला खर्च पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ा है, जिससे खेती की लागत पर किसानों का आर्थिक दबाव बढ़ गया था।
किसानों की प्रतिक्रिया: राहत के साथ और माँग भी
कुशीनगर के किसानों ने सरकार के इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि एमएसपी बढ़ने से उन्हें कुछ हद तक अतिरिक्त लाभ मिलेगा। एक किसान ने कहा, 'यह किसानों के हित में बहुत अच्छा फैसला है। खेती की लागत बढ़ गई है — जुताई, बुवाई, खाद और बीज समेत हर चीज़ का खर्च बढ़ा है। ऐसे में एमएसपी में बढ़ोतरी से किसानों को राहत मिलेगी।'
हालाँकि, कई किसानों ने यह भी कहा कि बढ़ती महंगाई को देखते हुए समर्थन मूल्य में और वृद्धि की ज़रूरत है। एक किसान ने कहा, 'जिस तरह महंगाई बढ़ रही है, उसी तरह फसलों के दाम में भी बढ़ोतरी होनी चाहिए। सरकार को किसानों के बारे में और विचार करना चाहिए, ताकि उन्हें खेती से बेहतर लाभ मिल सके। फिलहाल एमएसपी बढ़ाने के लिए हम सरकार का धन्यवाद करते हैं।'
धमतरी के किसानों ने भी इस फैसले को सराहा और कहा कि खाद, बीज, कृषि मशीनरी, सिंचाई एवं मजदूरी की लागत में निरंतर वृद्धि के बीच एमएसपी बढ़ना उनके लिए आर्थिक राहत का काम करेगा। कुछ किसानों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार का आभार भी जताया।
लावारिस पशुओं की समस्या: किसानों की अतिरिक्त चिंता
कुशीनगर के किसानों ने एमएसपी के साथ-साथ लावारिस और जंगली पशुओं की समस्या पर भी गहरी चिंता व्यक्त की। किसानों का कहना है कि खेतों में खड़ी फसलों को पशु बड़े पैमाने पर नुकसान पहुँचाते हैं और कई बार एक बड़ा हिस्सा बर्बाद हो जाता है।
कुछ किसानों ने यह भी सुझाव दिया कि सरकार एमएसपी के रूप में दी जाने वाली अतिरिक्त राशि का एक हिस्सा नीलगाय और अन्य आवारा पशुओं को पकड़ने एवं उनके रखरखाव पर खर्च करे, तो इससे भी किसानों को बड़ा लाभ मिल सकता है। उन्होंने सरकार से इस दिशा में प्रभावी कदम उठाने की माँग की।
आम जनता और खेती पर असर
गौरतलब है कि रबी फसलों का एमएसपी न केवल किसानों की आय से जुड़ा है, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा और महंगाई नियंत्रण पर भी इसका प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ता है। गेहूं और चना जैसी फसलों का समर्थन मूल्य बढ़ने से किसान अधिक मात्रा में इनकी बुवाई करने के लिए प्रोत्साहित हो सकते हैं, जिससे फसल विविधीकरण का लक्ष्य भी पूरा हो सकेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, एमएसपी में बढ़ोतरी तभी पूरी तरह प्रभावी होती है जब सरकारी खरीद तंत्र मजबूत हो और किसानों को वास्तव में घोषित मूल्य मिल सके। खेती को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाने के लिए लागत नियंत्रण और बाज़ार तक सीधी पहुँच भी उतनी ही ज़रूरी मानी जाती है।
क्या होगा आगे
केंद्र सरकार के इस फैसले के बाद राज्य सरकारों से अपेक्षा है कि वे सरकारी खरीद केंद्रों की व्यवस्था समय पर करें ताकि किसानों को घोषित एमएसपी का वास्तविक लाभ मिल सके। किसान संगठन यह भी देख रहे हैं कि क्या आने वाले समय में सरकार लावारिस पशुओं की समस्या के समाधान के लिए कोई नीतिगत कदम उठाती है।