1 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

रबी फसलों के एमएसपी में बड़ी बढ़ोतरी: कुसुम में ₹675, गेहूं ₹2,610 प्रति क्विंटल तय

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
रबी फसलों के एमएसपी में बड़ी बढ़ोतरी: कुसुम में ₹675, गेहूं ₹2,610 प्रति क्विंटल तय

सारांश

केंद्र सरकार ने रबी की 6 फसलों का एमएसपी बढ़ाया — कुसुम में सर्वाधिक ₹675 प्रति क्विंटल की वृद्धि। गेहूं अब ₹2,610 और मसूर ₹7,390 पर। किसानों को राहत, लेकिन बढ़ती उत्पादन लागत के मद्देनज़र कई चाहते हैं और अधिक — साथ ही फसल बीमा और इनपुट सब्सिडी पर ज़ोर।

मुख्य बातें

केंद्र सरकार ने रबी सीजन की 6 प्रमुख फसलों के एमएसपी में बढ़ोतरी को 1 अक्टूबर 2026 को मंजूरी दी।
कुसुम (सूरजमुखी) में सर्वाधिक ₹675 प्रति क्विंटल और गेहूं में न्यूनतम ₹25 प्रति क्विंटल की वृद्धि हुई।
नई दरें: गेहूं ₹2,610 , चना ₹5,958 , मसूर ₹7,390 , सरसों ₹6,613 प्रति क्विंटल।
बस्ती, कानपुर देहात, चूरू और जोधपुर के किसानों ने बढ़ोतरी का स्वागत किया, लेकिन उत्पादन लागत के अनुपात में और वृद्धि की माँग भी उठाई।
किसानों ने फसल बीमा, किसान क्रेडिट कार्ड की सीमा बढ़ाने और इनपुट लागत घटाने की भी माँग रखी।

केंद्र सरकार ने 1 अक्टूबर 2026 को रबी सीजन की छह प्रमुख फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में बढ़ोतरी को मंजूरी दी, जिसका उद्देश्य किसानों को उत्पादन लागत के सापेक्ष लाभकारी आय सुनिश्चित करना है। इस फैसले का देश के विभिन्न राज्यों के किसानों ने स्वागत किया है, हालाँकि कुछ ने बढ़ती खेती लागत के मद्देनज़र और अधिक बढ़ोतरी की माँग भी रखी है।

नई एमएसपी दरें: फसलवार विवरण

सरकारी अधिसूचना के अनुसार, कुसुम (सूरजमुखी) के एमएसपी में सर्वाधिक ₹675 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है। इसके बाद रेपसीड और सरसों में ₹413 प्रति क्विंटल, मसूर में ₹390 प्रति क्विंटल, जौ में ₹136 प्रति क्विंटल, चने में ₹83 प्रति क्विंटल और गेहूं में ₹25 प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है।

नई दरों के अनुसार गेहूं का एमएसपी ₹2,610 प्रति क्विंटल, चने का ₹5,958 प्रति क्विंटल, मसूर का ₹7,390 प्रति क्विंटल और सरसों का ₹6,613 प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। यह बढ़ोतरी दलहनी और तिलहनी फसलों को केंद्र में रखती है, जो फसल विविधीकरण की दृष्टि से नीतिगत प्राथमिकता रही है।

किसानों की प्रतिक्रिया

बस्ती के किसानों ने कहा कि एमएसपी में बढ़ोतरी से उन्हें आर्थिक लाभ अवश्य मिलेगा। भले ही बढ़ोतरी उनकी अपेक्षाओं के पूरी तरह अनुरूप नहीं है, लेकिन गेहूं, सरसों, चना और अन्य रबी फसलों के समर्थन मूल्य में वृद्धि से उन्हें उपज का बेहतर मूल्य मिलने की उम्मीद है।

कानपुर देहात के किसानों ने कहा कि खाद, डीजल, सिंचाई और मजदूरी समेत खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। ऐसे में एमएसपी में बढ़ोतरी जरूरी थी। सरसों और मसूर जैसी फसलों के दाम बढ़ने से उनकी आय पर सीधा सकारात्मक असर पड़ सकता है।

राजस्थान के चूरू जिले के किसानों ने कहा कि दाल और तिलहन फसलों के लिए एमएसपी की व्यवस्था होने से उन्हें उपज का बेहतर मूल्य मिलने की उम्मीद है। वहीं, जोधपुर के किसानों ने बताया कि पहले गेहूं, चना और सरसों जैसी फसलें स्थानीय बिचौलियों के माध्यम से बेचनी पड़ती थीं, जिससे उचित मूल्य नहीं मिल पाता था — अब एमएसपी बढ़ने से बेहतर दाम की संभावना है।

विशेषज्ञ की राय

कृषि उपनिदेशक अशोक कुमार ने कहा कि रबी फसलों के एमएसपी में बढ़ोतरी से किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और उन्हें उपज का बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बढ़ेगी। उन्होंने इस फैसले को कृषि आय सुधार की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया।

गौरतलब है कि एक किसान ने कहा कि यदि सरकार इसी तरह समय-समय पर एमएसपी की समीक्षा करती रही तो दलहनी फसलों की खेती को प्रोत्साहन मिलेगा और किसान फसल विविधीकरण की ओर बढ़ सकते हैं।

अन्य कृषि योजनाओं पर किसानों के विचार

किसानों ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि को छोटे और सीमांत किसानों के लिए मददगार बताया, जो खेती की शुरुआती जरूरतें पूरी करने में सहायक है। उन्होंने किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) को भी कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण योजना बताते हुए कहा कि इसके लक्ष्य में बढ़ोतरी से कृषि ऋण की उपलब्धता बेहतर होगी।

साथ ही किसानों ने प्राकृतिक आपदाओं में फसल बर्बादी पर बीमा लाभ न मिलने की समस्या उठाई और सरकार से ऐसी परिस्थितियों को प्रभावी ढंग से बीमा दायरे में शामिल करने की माँग की।

आगे की राह और किसानों की माँगें

किसानों ने एमएसपी बढ़ोतरी के साथ-साथ खाद, बीज, डीजल, बिजली, सिंचाई और कृषि मशीनरी की लागत कम करने की दिशा में भी कदम उठाने की माँग की। उनका तर्क है कि खेती को वास्तव में लाभकारी बनाने के लिए केवल समर्थन मूल्य बढ़ाना पर्याप्त नहीं — उत्पादन लागत और बाज़ार से जुड़ी समस्याओं का समाधान भी उतना ही जरूरी है।

यह ऐसे समय में आया है जब कृषि आय और शहरी आय के बीच की खाई पर नीतिगत बहस तेज हो रही है। एमएसपी में निरंतर और सुनियोजित बढ़ोतरी से फसल विविधीकरण और कृषि जोखिम प्रबंधन दोनों को बल मिलने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या किसान को मंडी में वास्तव में यह दाम मिलता है। जोधपुर के किसानों का बिचौलियों का ज़िक्र इस खाई को रेखांकित करता है — एमएसपी एक मंज़िल है, न कि गारंटी। गेहूं पर महज ₹25 की वृद्धि, जबकि उर्वरक और डीजल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं, यह बताता है कि प्रमुख खाद्यान्न फसलों के लिए असल आय सुरक्षा अभी भी अधूरी है। दलहन और तिलहन में अपेक्षाकृत बड़ी बढ़ोतरी विविधीकरण की नीयत दर्शाती है, पर जब तक खरीद तंत्र मजबूत नहीं होगा, घोषणाएँ कागज़ी राहत ही रहेंगी।
RashtraPress
1 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रबी फसलों के एमएसपी में 2026 में कितनी बढ़ोतरी हुई है?
केंद्र सरकार ने 1 अक्टूबर 2026 को 6 रबी फसलों का एमएसपी बढ़ाया — कुसुम में ₹675, सरसों में ₹413, मसूर में ₹390, जौ में ₹136, चने में ₹83 और गेहूं में ₹25 प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है।
गेहूं का नया एमएसपी 2026 में क्या है?
रबी सीजन 2026-27 के लिए गेहूं का नया एमएसपी ₹2,610 प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है, जो पिछले मूल्य से ₹25 प्रति क्विंटल अधिक है।
एमएसपी बढ़ोतरी पर किसानों की क्या प्रतिक्रिया है?
अधिकांश किसानों ने बढ़ोतरी का स्वागत किया है और बेहतर आय की उम्मीद जताई है। हालाँकि बस्ती और कानपुर देहात जैसे क्षेत्रों के किसानों का कहना है कि खाद, डीजल और मजदूरी की बढ़ती लागत को देखते हुए बढ़ोतरी और अधिक होनी चाहिए थी।
क्या एमएसपी के साथ किसानों ने अन्य माँगें भी रखी हैं?
हाँ, किसानों ने प्राकृतिक आपदाओं में फसल बर्बादी पर बीमा लाभ सुनिश्चित करने, किसान क्रेडिट कार्ड की सीमा बढ़ाने और खाद, बीज, डीजल व सिंचाई की लागत कम करने की माँग रखी है।
किस फसल के एमएसपी में सबसे अधिक बढ़ोतरी हुई है?
कुसुम (सूरजमुखी) के एमएसपी में सर्वाधिक ₹675 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई है। इसके बाद रेपसीड और सरसों में ₹413 और मसूर में ₹390 प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 घंटे पहले
  2. कल
  3. कल
  4. कल
  5. 4 महीने पहले
  6. 12 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले