दिल्ली की रेस कोर्स मस्जिद को 6 दिन में खाली करने का नोटिस, मीरवाइज उमर फारूक ने एक्स पर जताई गहरी चिंता
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली की ऐतिहासिक रेस कोर्स मस्जिद को छह दिनों के भीतर खाली करने का नोटिस दिए जाने के बाद विवाद गहरा गया है। कश्मीर के धार्मिक-राजनीतिक नेता मीरवाइज उमर फारूक ने 20 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर इस फैसले पर कड़ी आपत्ति जताते हुए वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उल्लेखनीय है कि यह मस्जिद 1977 से अधिसूचित वक्फ संपत्ति है और एक सूचीबद्ध धरोहर स्थल भी है।
नोटिस का विवरण और पृष्ठभूमि
रेस कोर्स मस्जिद को जारी किए गए नोटिस में छह दिन की समयसीमा के भीतर परिसर खाली करने का निर्देश दिया गया है। यह मस्जिद 1977 से केंद्रीय वक्फ बोर्ड के तहत अधिसूचित संपत्ति के रूप में दर्ज है और इसे धरोहर स्थल के रूप में भी मान्यता प्राप्त है। इसके बावजूद खाली करने का आदेश जारी होना कानूनी और धार्मिक दोनों मोर्चों पर बहस का केंद्र बन गया है।
मीरवाइज उमर फारूक का बयान
मीरवाइज उमर फारूक ने एक्स पर अपनी पोस्ट में लिखा, 'यह बेहद चिंताजनक है कि दिल्ली की ऐतिहासिक रेस कोर्स मस्जिद, जो 1977 से एक अधिसूचित वक्फ संपत्ति है और एक सूचीबद्ध धरोहर स्थल भी है, उसे छह दिन के भीतर खाली करने के लिए नोटिस दिया गया है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि वक्फ अधिकारियों का इस मामले में बचाव करने में विफल रहना उतनी ही गंभीर चिंता का विषय है।
मीरवाइज ने आगे लिखा, 'यही वह मुख्य कारण है जिसकी वजह से हमने वक्फ संशोधनों और मुस्लिम धार्मिक संपत्तियों पर सरकारी प्रतिनिधियों के माध्यम से सरकार का नियंत्रण बढ़ाने का कड़ा विरोध किया था। अगर कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त एक मस्जिद को भी नहीं बचाया जा सकता, तो फिर बाकी जगहों के लिए क्या सुरक्षा उपाय बचते हैं?' यह बयान वक्फ संशोधन कानून पर पहले से जारी बहस को और तेज़ करता है।
वक्फ संशोधन कानून से जुड़ी बहस
मीरवाइज के बयान के बाद केंद्र के वक्फ संशोधन कानून को लेकर विरोध की आवाज़ें एक बार फिर मुखर हो गई हैं। आलोचकों का कहना है कि इस संशोधन से मुस्लिम धार्मिक संपत्तियों पर सरकारी नियंत्रण बढ़ाने का रास्ता खुलता है। मीरवाइज ने आशंका जताई है कि यह घटना मुसलमानों के इबादत स्थलों के प्रति एक 'नई परिपाटी' का संकेत हो सकती है।
गौरतलब है कि वक्फ संशोधन विधेयक पहले से ही देश भर में विवाद का केंद्र रहा है, और रेस कोर्स मस्जिद को दिया गया नोटिस इस बहस में एक नया आयाम जोड़ता है।
वक्फ अधिकारियों की भूमिका पर सवाल
मीरवाइज ने अपनी पोस्ट में न केवल नोटिस बल्कि वक्फ अधिकारियों की निष्क्रियता पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जब एक अधिसूचित और धरोहर-सूचीबद्ध मस्जिद को खाली कराने के नोटिस का सामना करना पड़े और वक्फ अधिकारी उसका बचाव करने में विफल रहें, तो यह संस्थागत कमज़ोरी को उजागर करता है।
आगे की स्थिति
फ़िलहाल न तो संबंधित अधिकारियों की ओर से इस नोटिस पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण आया है और न ही वक्फ बोर्ड ने कोई औपचारिक प्रतिक्रिया दी है। रेस कोर्स मस्जिद की कानूनी स्थिति — वक्फ संपत्ति एवं धरोहर स्थल — को देखते हुए यह मामला अदालत तक पहुँचने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। आने वाले दिनों में मुस्लिम संगठनों और राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया इस विवाद की दिशा तय करेगी।