17 अगस्त 2026
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मीरवाइज उमर फारूक को नजरबंद कर धार्मिक सभा से रोका, एक्स पर जताई नाराज़गी

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मीरवाइज उमर फारूक को नजरबंद कर धार्मिक सभा से रोका, एक्स पर जताई नाराज़गी

सारांश

मीरवाइज उमर फारूक को सोमवार को नजरबंद कर नक्शबंद साहब की पारंपरिक 'ख्वाजा दिगर' सभा से रोका गया। उन्होंने एक्स पर इसे धार्मिक दमन बताया। पिछले शुक्रवार को भी जामा मस्जिद में उपदेश देने की अनुमति नहीं मिली थी। उनका संगठन AAC मार्च 2025 से UAPA के तहत प्रतिबंधित है।

मुख्य बातें

मीरवाइज उमर फारूक को 17 अगस्त 2026 को नजरबंद कर नक्शबंद साहब की 'ख्वाजा दिगर' धार्मिक सभा संबोधित करने से रोका गया।
यह सभा हर वर्ष रबी-उल-अव्वल के तीसरे दिन आयोजित होती है; मीरवाइज के अनुसार हज़ारों श्रद्धालु प्रतीक्षा में थे।
इससे पहले शुक्रवार को भी उन्हें जामा मस्जिद, नवाहट्टा में उपदेश देने से रोका गया था।
अधिकारियों ने नजरबंदी को निजी सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की ज़रूरत बताया; मीरवाइज ने इसे 'दमनकारी' करार दिया।
गृह मंत्रालय ने 11 मार्च 2025 को UAPA के तहत उनके संगठन जम्मू-कश्मीर अवामी एक्शन कमेटी (AAC) पर पाँच वर्ष का प्रतिबंध लगाया है।

श्रीनगर में वरिष्ठ धार्मिक नेता और मुख्य धर्मगुरु मीरवाइज उमर फारूक को सोमवार, 17 अगस्त 2026 को कथित तौर पर नजरबंद कर दिया गया, जिसके चलते वे नक्शबंद साहब में आयोजित पारंपरिक धार्मिक सभा 'ख्वाजा दिगर' को संबोधित नहीं कर सके। मीरवाइज ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस रोक की तीखी आलोचना करते हुए इसे धार्मिक अधिकारों का हनन बताया।

किस सभा से रोका गया

'ख्वाजा दिगर' की यह धार्मिक सभा हर वर्ष रबी-उल-अव्वल के तीसरे दिन आयोजित होती है और इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। मीरवाइज के अनुसार, सभा में शामिल होने के लिए हज़ारों लोग प्रतीक्षा कर रहे थे, लेकिन अधिकारियों ने उन्हें वहाँ जाने की अनुमति नहीं दी।

मीरवाइज का बयान

मीरवाइज ने एक्स पर लिखा कि उनके राजनीतिक नजरिए और लोगों की सामाजिक व धार्मिक चिंताओं को उठाने की 'सजा' के तौर पर उन्हें सामूहिक धार्मिक आयोजनों को संबोधित करने से रोका जा रहा है। उन्होंने इसे 'शासकों की जानी-पहचानी दमनकारी सोच' का प्रतिबिंब बताया और कहा कि यह 'दुर्भाग्यपूर्ण और शर्मनाक' है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अधिकारी मुसलमानों के धार्मिक अधिकारों के प्रति 'संवेदनहीनता और अनादर' प्रदर्शित कर रहे हैं — उपदेश सुनने और आध्यात्मिक सभाओं में भाग लेने के अधिकार को छीनकर।

पिछले हफ्ते भी रोका गया था

गौरतलब है कि इससे पहले शुक्रवार को भी मीरवाइज उमर फारूक को नजरबंद किया गया था और श्रीनगर के नवाहट्टा स्थित जामा मस्जिद में पारंपरिक शुक्रवार उपदेश देने की अनुमति नहीं मिली थी। यह ऐसे समय में आया है जब कश्मीर घाटी में धार्मिक सभाओं और नेताओं की आवाजाही को लेकर तनाव पहले से बना हुआ है।

अधिकारियों का पक्ष

अधिकारियों का कहना है कि मीरवाइज उमर फारूक को कभी-कभी उनकी निजी सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की दृष्टि से नजरबंद किया जाता है। हालाँकि, मीरवाइज इस तर्क को खारिज करते हुए इसे दमन का औजार बताते हैं।

अवामी एक्शन कमेटी पर प्रतिबंध की पृष्ठभूमि

मीरवाइज उमर फारूक जम्मू-कश्मीर अवामी एक्शन कमेटी (AAC) के प्रमुख भी हैं। गृह मंत्रालय (MHA) ने 11 मार्च 2025 को गैर-कानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत इस संगठन पर पाँच वर्षों के लिए प्रतिबंध लगाया था। इस पृष्ठभूमि में उनकी नजरबंदी और धार्मिक गतिविधियों पर रोक का सिलसिला और अधिक जटिल हो जाता है। मीरवाइज ने चुनी हुई सरकारों से घाटी और जम्मू में मुसलमानों के धार्मिक अधिकारों की रक्षा करने का आग्रह किया है।

आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या प्रशासन और मीरवाइज के बीच इस विवाद का कोई समाधान निकलता है, या यह तनाव और गहरा होता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और इसकी कीमत घाटी में शासन की वैधता को चुकानी पड़ती है। AAC पर UAPA प्रतिबंध और मीरवाइज की व्यक्तिगत गतिविधियों पर रोक — दोनों को एक साथ देखें तो यह सिर्फ कानून-व्यवस्था का मामला नहीं, बल्कि धार्मिक अभिव्यक्ति की सीमाओं को लेकर एक बड़ा संवैधानिक प्रश्न है जिसका उत्तर प्रशासन ने अब तक सार्वजनिक रूप से नहीं दिया।
RashtraPress
17 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मीरवाइज उमर फारूक को किस सभा से रोका गया?
मीरवाइज उमर फारूक को श्रीनगर के नक्शबंद साहब में आयोजित 'ख्वाजा दिगर' की पारंपरिक धार्मिक सभा से रोका गया, जो हर वर्ष रबी-उल-अव्वल के तीसरे दिन होती है। उनके अनुसार हज़ारों श्रद्धालु इस सभा में शामिल होने के लिए प्रतीक्षा कर रहे थे।
अधिकारियों ने मीरवाइज को नजरबंद क्यों किया?
अधिकारियों का कहना है कि मीरवाइज उमर फारूक को उनकी निजी सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कभी-कभी नजरबंद किया जाता है। हालाँकि मीरवाइज इस तर्क को खारिज करते हुए इसे अपने राजनीतिक नजरिए और धार्मिक आवाज़ को दबाने की कोशिश बताते हैं।
जम्मू-कश्मीर अवामी एक्शन कमेटी पर प्रतिबंध कब और क्यों लगा?
गृह मंत्रालय ने 11 मार्च 2025 को UAPA के तहत जम्मू-कश्मीर अवामी एक्शन कमेटी (AAC) पर पाँच वर्षों के लिए प्रतिबंध लगाया। मीरवाइज उमर फारूक इस संगठन के प्रमुख हैं।
क्या इससे पहले भी मीरवाइज को धार्मिक कार्यक्रमों से रोका गया है?
हाँ, इसी हफ्ते शुक्रवार को भी मीरवाइज उमर फारूक को नजरबंद कर श्रीनगर के नवाहट्टा स्थित जामा मस्जिद में पारंपरिक शुक्रवार उपदेश देने की अनुमति नहीं दी गई थी। इस प्रकार लगातार दो धार्मिक अवसरों पर उन्हें रोका गया।
मीरवाइज ने इस रोक पर क्या कहा?
मीरवाइज ने एक्स पर लिखा कि उनके राजनीतिक नजरिए और लोगों की धार्मिक चिंताओं को उठाने की 'सजा' के तौर पर उन्हें सामूहिक धार्मिक आयोजनों से रोका जा रहा है। उन्होंने इसे 'दमनकारी', 'दुर्भाग्यपूर्ण और शर्मनाक' बताया और चुनी हुई सरकारों से धार्मिक अधिकारों की रक्षा का आग्रह किया।
राष्ट्र प्रेस
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