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राहुल बोस: अभिनेता, रग्बी कप्तान और समाज सेवक — एक शख्सियत, कई आयाम

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राहुल बोस: अभिनेता, रग्बी कप्तान और समाज सेवक — एक शख्सियत, कई आयाम

सारांश

अभिनय, रग्बी और समाज सेवा — राहुल बोस ने तीनों को एक साथ जिया। 11 साल तक भारत के लिए रग्बी खेली, समानांतर सिनेमा को चुना और 2004 की सुनामी के बाद 'द फाउंडेशन' बनाकर 35,000 से अधिक लोगों को प्रशिक्षित किया। यह सिर्फ एक जन्मदिन की कहानी नहीं — एक बहुआयामी जीवन की झलक है।

मुख्य बातें

राहुल बोस का जन्म 27 जुलाई 1967 को कोलकाता में हुआ।
उन्होंने 1998 से 2009 तक — 11 वर्षों तक — भारतीय राष्ट्रीय रग्बी टीम का प्रतिनिधित्व किया।
18 दिसंबर 2021 को रग्बी इंडिया के अध्यक्ष बने; ओडिशा सरकार ने 15 अगस्त 2021 को टीम की स्पॉन्सरशिप शुरू की।
' इंग्लिश, ऑगस्ट ' (1994) से पूर्णकालिक अभिनय की शुरुआत; 'पूर्णा' (2017) सहित कई फिल्मों का निर्देशन।
'द फाउंडेशन' के 'प्रोजेक्ट हील' ने 35,000 से अधिक शिक्षकों, अभिभावकों और छात्रों को बाल यौन शोषण के प्रति जागरूक किया।

राहुल बोस27 जुलाई 1967 को कोलकाता में जन्मे — भारतीय मनोरंजन जगत की उन विरल हस्तियों में से हैं जिन्होंने समानांतर सिनेमा, अंतरराष्ट्रीय खेल और सामाजिक सक्रियता को एक साथ जिया। अभिनय, रग्बी और समाज सेवा — तीनों मोर्चों पर उनकी यात्रा भारतीय सार्वजनिक जीवन में एक अलग मिसाल पेश करती है।

प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

राहुल बोस ने अपनी स्कूली शिक्षा कैथेड्रल एंड जॉन कॉनन स्कूल से और उच्च शिक्षा सिडेनहैम कॉलेज से पूरी की। बचपन में उनकी माँ ने उन्हें बॉक्सिंग और रग्बी से परिचित कराया — एक ऐसी नींव जो आगे चलकर उनकी पहचान का अहम हिस्सा बनी। इसी दौर में उन्होंने पूर्व भारतीय क्रिकेट कप्तान मंसूर अली खान पटौदी से क्रिकेट का प्रशिक्षण लिया और बॉक्सिंग में रजत पदक भी जीता।

रग्बी: मैदान से नेतृत्व तक

1998 से 2009 तक — यानी 11 वर्षों तक — राहुल बोस ने भारतीय राष्ट्रीय रग्बी टीम का प्रतिनिधित्व किया। एक अभिनेता के रूप में व्यस्त कार्यक्रम के बावजूद उन्होंने अपनी 24 फिल्मों (1994–2009) की शूटिंग रग्बी कैलेंडर के अनुसार नियोजित की — यह संतुलन अपने आप में असाधारण था।

2017 में भारतीय महिला रग्बी टीम ने एशिया सेवेंस चैंपियनशिप में रजत पदक जीता। 15 अगस्त 2021 को ओडिशा सरकार ने भारतीय रग्बी टीम की आधिकारिक स्पॉन्सरशिप शुरू की। इसके बाद 18 दिसंबर 2021 को राहुल बोस ने रग्बी इंडिया के अध्यक्ष का कार्यभार संभाला — खेल के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का संस्थागत विस्तार।

सिनेमा: समानांतर धारा का चुनाव

अभिनय से उनका पहला परिचय महज छह साल की उम्र में स्कूल नाटक 'टॉम, द पाइपर्स सन' में हुआ था। माँ के निधन के बाद उन्होंने रेडिफ्यूजन में कॉपीराइटर के रूप में काम किया। 1994 में फिल्म 'इंग्लिश, ऑगस्ट' की सफलता ने उन्हें पूर्णकालिक अभिनय की राह पर ला खड़ा किया।

व्यावसायिक सिनेमा की चकाचौंध से दूर रहते हुए उन्होंने 'मिस्टर एंड मिसेज अय्यर', 'चमेली', 'झंकार बीट्स' और 'विश्वरूपम' जैसी फिल्मों में अपनी अभिनय क्षमता को साबित किया। निर्देशक के रूप में उनकी पहली फिल्म 'एवरीबडी सेज आई एम फाइन!' (2001) के लिए उन्होंने महज 33 दिनों में फंड जुटाया। 2017 में उन्होंने 'पूर्णा' का निर्देशन किया — 13 साल की उम्र में माउंट एवरेस्ट फतह करने वाली सबसे कम उम्र की लड़की की बायोपिक, जिसकी शूटिंग 1 दिसंबर से 31 जनवरी के बीच की गई।

समाज सेवा: सुनामी से मिला नया मकसद

2004 की विनाशकारी सुनामी के बाद अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में राहत कार्यों में हिस्सा लेने के अनुभव ने राहुल बोस के जीवन की दिशा बदल दी। इसी प्रेरणा से उन्होंने 'द फाउंडेशन' की स्थापना की, जिसका मिशन समाज से हर प्रकार के भेदभाव को जड़ से मिटाना है।

फाउंडेशन के 'प्रोजेक्ट रीच' के ज़रिए भौगोलिक और राजनीतिक रूप से कटे-छँटे क्षेत्रों के प्रतिभाशाली बच्चों को देश के बेहतरीन स्कूलों में दाखिला दिलाया जा रहा है। वहीं 'प्रोजेक्ट हील' ने बाल यौन शोषण के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए 35,000 से अधिक शिक्षकों, अभिभावकों और छात्रों को प्रशिक्षित किया है।

आगे की राह

रग्बी इंडिया के अध्यक्ष के रूप में राहुल बोस का लक्ष्य इस खेल को भारत के युवाओं के बीच और व्यापक पहचान दिलाना है। सिनेमा, खेल और सामाजिक कार्य — तीनों क्षेत्रों में एक साथ सक्रिय यह शख्सियत भारतीय सार्वजनिक जीवन में एक अनूठा उदाहरण बनी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 से अधिक प्रशिक्षणार्थी और 'प्रोजेक्ट रीच' की शैक्षिक पहुँच — ये आँकड़े बताते हैं कि उनकी सामाजिक प्रतिबद्धता महज प्रतीकात्मक नहीं है। सवाल यह है कि ऐसी बहुआयामी हस्तियों को भारतीय मीडिया और नीति-निर्माण में वह स्थान मिलता है जिसकी वे हकदार हैं?
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राहुल बोस कौन हैं और वे किस लिए जाने जाते हैं?
राहुल बोस एक भारतीय अभिनेता, पूर्व अंतरराष्ट्रीय रग्बी खिलाड़ी, फिल्म निर्देशक और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। वे 'इंग्लिश, ऑगस्ट', 'मिस्टर एंड मिसेज अय्यर' जैसी समानांतर फिल्मों और रग्बी इंडिया के अध्यक्ष के रूप में जाने जाते हैं।
राहुल बोस ने रग्बी में कितने वर्ष खेला?
राहुल बोस ने 1998 से 2009 तक — यानी 11 वर्षों तक — भारतीय राष्ट्रीय रग्बी टीम का प्रतिनिधित्व किया। इस दौरान उन्होंने अपनी फिल्मों की शूटिंग भी रग्बी कैलेंडर के अनुसार नियोजित की।
राहुल बोस रग्बी इंडिया के अध्यक्ष कब बने?
राहुल बोस ने 18 दिसंबर 2021 को रग्बी इंडिया के अध्यक्ष का कार्यभार संभाला। इससे पहले 15 अगस्त 2021 को ओडिशा सरकार ने भारतीय रग्बी टीम की आधिकारिक स्पॉन्सरशिप की घोषणा की थी।
'द फाउंडेशन' क्या है और इसकी स्थापना क्यों हुई?
'द फाउंडेशन' राहुल बोस द्वारा स्थापित एक सामाजिक संस्था है, जिसका उद्देश्य समाज से हर प्रकार के भेदभाव को मिटाना है। इसकी प्रेरणा 2004 की सुनामी के दौरान अंडमान और निकोबार में किए गए राहत कार्यों से मिली।
राहुल बोस की किन फिल्मों ने उन्हें पहचान दिलाई?
राहुल बोस को 'इंग्लिश, ऑगस्ट' (1994), 'मिस्टर एंड मिसेज अय्यर', 'चमेली', 'झंकार बीट्स' और 'विश्वरूपम' जैसी फिल्मों से पहचान मिली। निर्देशक के रूप में उन्होंने 'एवरीबडी सेज आई एम फाइन!' (2001) और 'पूर्णा' (2017) का निर्देशन किया।
राष्ट्र प्रेस
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