31 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

रोहित टोकस: स्कूल में सहपाठी से मिली हार ने बदली ज़िंदगी, दो सर्जरी के बाद CWG 2022 में जीता ब्रॉन्ज

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
रोहित टोकस: स्कूल में सहपाठी से मिली हार ने बदली ज़िंदगी, दो सर्जरी के बाद CWG 2022 में जीता ब्रॉन्ज

सारांश

स्कूल में एक सहपाठी से मिली हार ने रोहित टोकस को तोड़ा नहीं, बल्कि रिंग में वापस खींच लाई। दो सर्जरी, संक्रमण और असहनीय दर्द के बाद भी CWG 2022 में ब्रॉन्ज जीतना — यह सिर्फ एक पदक नहीं, एक इरादे की जीत है।

मुख्य बातें

रोहित टोकस का जन्म 1 अगस्त 1993 को दिल्ली के मुनीरका में हुआ।
स्कूल में सहपाठी से मिली हार के बाद बॉक्सिंग में वापसी की और दो महीने की ट्रेनिंग से उसी सहपाठी को रिंग में हराया।
2011 में नेशनल बॉक्सिंग चैंपियनशिप में गोल्ड और क्यूबा युवा ओलंपिक में सिल्वर मेडल जीता।
2018 में घुटने की चोट के कारण AIBA वर्ल्ड चैंपियनशिप से बाहर, दो बार सर्जरी से गुज़रे।
टोक्यो ओलंपिक का सपना टूटने के बाद CWG 2022 में असहनीय दर्द के बावजूद ब्रॉन्ज मेडल जीता।

भारतीय बॉक्सर रोहित टोकस की कहानी महज़ एक खेल-यात्रा नहीं, बल्कि हार को प्रेरणा में बदलने की मिसाल है। कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी धाक जमाई — और यह सफर शुरू हुआ था नई दिल्ली के एक स्कूल में एक सहपाठी से मिली उस करारी हार से, जो उन्हें अंदर तक चुभ गई थी।

बचपन और बॉक्सिंग की पहली दस्तक

रोहित टोकस का जन्म 1 अगस्त 1993 को दिल्ली के मुनीरका इलाके में हुआ। बचपन से ही भाइयों के साथ खेल-कूद और मार-पिटाई उनकी दिनचर्या का हिस्सा थी। घर के पास एक बॉक्सिंग अकादमी थी, जहाँ निःशुल्क प्रशिक्षण दिया जाता था। रोहित के पिता ने सभी भाइयों को वहाँ भेजना शुरू किया और यह प्रोत्साहन रंग लाया। हालाँकि, एक-दो साल बाद रोहित ने बॉक्सिंग छोड़कर तैराकी अपना ली।

वह हार जिसने बदल दी दिशा

जब रोहित का स्कूल बदला, तो नई कक्षा में उनकी मुलाकात एक ऐसे सहपाठी से हुई जो नियमित रूप से बॉक्सिंग का अभ्यास करता था। रोहित ने उसे 'शैडो बॉक्सिंग' करते देखा और बिना सोचे चुनौती दे डाली। नतीजा — करारी हार। यह हार इतनी गहरी चुभी कि रोहित अगले कुछ दिन स्कूल ही नहीं गए। उन्होंने दोबारा बॉक्सिंग कोचिंग शुरू की और उसी सहपाठी को रिंग में हराने की ठानी।

दिन-रात की जबरदस्त मेहनत के बाद रोहित ने दिल्ली राज्य चैंपियनशिप में हिस्सा लिया और दो महीने की कड़ी ट्रेनिंग के दम पर उसी सहपाठी को रिंग में पराजित कर चैंपियन बने। गौरतलब है कि यह जीत महज़ एक मुकाबले की नहीं, बल्कि एक मानसिकता की जीत थी।

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय उड़ान

2010 में भारत में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स को देखकर रोहित ने बॉक्सिंग को ही अपना करियर बनाने का निर्णय लिया। 2011 में उन्होंने नेशनल बॉक्सिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता, जिसके बाद उन्हें राष्ट्रीय शिविर में स्थान मिला। इसी वर्ष क्यूबा युवा ओलंपिक में उन्होंने सिल्वर मेडल अपने नाम किया।

चोटों का कठिन दौर

बुलंदियों की ओर बढ़ते रोहित के करियर पर 2018 में घुटने की गंभीर चोट ने ब्रेक लगा दिया। क्वालीफाई करने के बावजूद वे AIBA वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप में हिस्सा नहीं ले सके। सर्जरी के बाद संक्रमण ने उन्हें दूसरी सर्जरी के लिए मजबूर किया। पूरी तरह ठीक होने के बाद उन्होंने टोक्यो ओलंपिक की तैयारी शुरू की। नेशनल चैंपियनशिप के क्वार्टर फाइनल में उन्होंने ओलंपिक टिकट के प्रबल दावेदार आशीष कुमार को हराकर सबका ध्यान खींचा। लेकिन सेमीफाइनल में वही घुटना एक बार फिर चोटिल हो गया — रोहित राष्ट्रीय चैंपियन तो बने, मगर ओलंपिक का सपना टूट गया।

दर्द को दरकिनार कर CWG 2022 में ब्रॉन्ज

कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में रोहित के लिए चुनौती यहीं खत्म नहीं हुई। टूर्नामेंट के पहले मुकाबले से पहले उसी घुटने में फिर चोट लग गई। फिजियोथेरेपिस्ट ने घुटने पर काम किया, लेकिन टेप लगाने की वजह से गंभीर फोड़े निकल आए, जिनका दर्द असहनीय था। इन तमाम तकलीफों को नज़रअंदाज़ करते हुए रोहित रिंग में उतरे और ब्रॉन्ज मेडल जीतकर भारत का मान बढ़ाया। यह पदक केवल एक धातु का टुकड़ा नहीं, बल्कि वर्षों की पीड़ा, दृढ़ता और जुनून का प्रतीक था। रोहित टोकस की यह यात्रा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ एथलीट चोटों और तंत्र की खामियों के बावजूद अपने दम पर लड़ते हैं। दो सर्जरी और संक्रमण के बाद भी कोई खिलाड़ी टेप लगाकर मैदान में उतरे — यह व्यक्तिगत जज़्बे की तारीफ है, लेकिन यह सवाल भी उठाता है कि क्या हमारी खेल-चिकित्सा प्रणाली उन्हें पर्याप्त सहारा दे पाई। ओलंपिक सपना टूटने के बाद भी पदक जीतना उनकी मानसिक दृढ़ता का प्रमाण है, पर यह भी याद रहे कि ऐसे कितने रोहित टोकस समय पर सही इलाज और समर्थन न मिलने से गुमनाम रह जाते हैं।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रोहित टोकस ने बॉक्सिंग कैसे शुरू की?
रोहित ने बचपन में घर के पास की निःशुल्क बॉक्सिंग अकादमी से शुरुआत की, फिर तैराकी अपनाई। स्कूल बदलने पर एक सहपाठी से मिली हार ने उन्हें दोबारा रिंग में खींचा और उन्होंने दो महीने की ट्रेनिंग से उसी सहपाठी को हराया।
रोहित टोकस को किन चोटों का सामना करना पड़ा?
2018 में घुटने की गंभीर चोट के कारण उन्हें दो बार सर्जरी से गुज़रना पड़ा — पहली सर्जरी के बाद संक्रमण हुआ जिससे दूसरी सर्जरी ज़रूरी हो गई। CWG 2022 में भी पहले मुकाबले से पहले वही घुटना फिर चोटिल हुआ।
रोहित टोकस ने CWG 2022 में मेडल कैसे जीता?
CWG 2022 में घुटने की चोट और टेप से हुए गंभीर फोड़ों के असहनीय दर्द के बावजूद रोहित रिंग में उतरे और ब्रॉन्ज मेडल जीता। उनके फिजियोथेरेपिस्ट ने मुकाबले से पहले घुटने पर विशेष काम किया।
रोहित टोकस की प्रमुख उपलब्धियाँ क्या हैं?
रोहित ने 2011 में नेशनल बॉक्सिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल और क्यूबा युवा ओलंपिक में सिल्वर मेडल जीता। इसके अलावा उन्होंने CWG 2022 में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर अपना सर्वोच्च अंतरराष्ट्रीय सम्मान हासिल किया।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 22 घंटे पहले
  2. कल
  3. 6 दिन पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 8 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 1 साल पहले