राहुल गांधी सुल्तानपुर मानहानि मामले में बरी, अमित शाह पर टिप्पणी से जुड़ा था केस
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को 26 अक्टूबर 2026 को सुल्तानपुर की विशेष एमपी-एमएलए अदालत ने मानहानि मामले में बरी कर दिया। यह मामला मई 2018 में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी से जुड़ा था। फैसले के दौरान राहुल गांधी स्वयं अदालत में उपस्थित रहे और इससे पहले अदालत के निर्देश पर निजी बंधपत्र भी दाखिल किया।
मुख्य घटनाक्रम
राहुल गांधी सोमवार सुबह करीब 11:12 बजे सुल्तानपुर की विशेष एमपी-एमएलए अदालत पहुंचे। उनकी उपस्थिति को देखते हुए दीवानी न्यायालय परिसर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी। अदालत में प्रवेश से पहले फरियादियों को परिसर के बाहर कतार में खड़ा किया गया, और राहुल गांधी के अदालत कक्ष में पहुंचने के बाद सुरक्षा कारणों से कक्ष का दरवाज़ा बंद कर दिया गया।
इस दौरान पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर कूरेभार के पास कांग्रेस कार्यकर्ता राहुल गांधी के स्वागत में जुटे रहे। पूर्व मंत्री ओपी सिंह करीब 400 गाड़ियों के काफिले और लगभग चार हज़ार समर्थकों के साथ पहुंचे।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला मई 2018 में कर्नाटक विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान बेंगलुरु में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी की कथित टिप्पणी से उपजा था। आरोप था कि उन्होंने भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष और वर्तमान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ मानहानिकारक टिप्पणी की थी।
इस टिप्पणी को आधार बनाते हुए भाजपा नेता और सुल्तानपुर जिला सहकारी बैंक के पूर्व अध्यक्ष विजय मिश्रा ने 4 अगस्त 2018 को राहुल गांधी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। मामले की सुनवाई पहले सिविल कोर्ट में हुई, और बाद में इसे एमपी-एमएलए अदालत में स्थानांतरित कर दिया गया।
मुकदमे के अहम पड़ाव
अदालत ने 27 नवंबर 2023 को राहुल गांधी को समन जारी किया था। इसके बाद 20 फरवरी 2024 को वे पहली बार व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश हुए, जहाँ उन्हें ₹25-25 हज़ार के दो मुचलकों पर जमानत मिली थी। राहुल गांधी ने तब आरोपों को नकारते हुए इसे 'सत्ता पक्ष की साजिश' बताया था।
शिकायतकर्ता की ओर से राहुल गांधी की आवाज़ का नमूना लेने के लिए अदालत में आवेदन दिया गया था, लेकिन ट्रायल कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया था। सेशन कोर्ट और इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने भी इस माँग को स्वीकार नहीं किया था।
अदालत का अंतिम फैसला
सोमवार को फैसले के लिए राहुल गांधी की व्यक्तिगत उपस्थिति अनिवार्य की गई थी। अदालत ने फैसला सुनाने से पहले निजी बंधपत्र और जमानतनामा दाखिल करने का निर्देश दिया था, जिसका पालन राहुल गांधी ने सुल्तानपुर पहुंचने के बाद किया। शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों पर सुनवाई पूरी करने के बाद अदालत ने उन्हें बरी कर दिया।
आगे का संभावित परिदृश्य
गौरतलब है कि यह मामला ऐसे समय में निपटा है जब राहुल गांधी लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका में हैं और भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर लगातार निशाना साध रहे हैं। अदालत के इस फैसले को कांग्रेस की ओर से राजनीतिक राहत के रूप में देखा जाएगा, हालाँकि शिकायतकर्ता पक्ष के आगे की कानूनी कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।