लिकटेंस्टीन के प्रिंस एलोइस गुजरात पहुंचे, PM मोदी से कल होगी हैदराबाद हाउस में बैठक
सारांश
मुख्य बातें
लिकटेंस्टीन के वंशागत प्रिंस एलोइस और उनकी पत्नी प्रिंसेस सोफिया भारत की अपनी राजकीय यात्रा के अंतर्गत सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को वडोदरा पहुंचे। वडोदरा हवाई अड्डे पर उनका औपचारिक स्वागत किया गया, जहाँ से वे मंजूसर स्थित एक औद्योगिक इकाई के दौरे के लिए रवाना हुए। यह यात्रा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर आयोजित की गई है और इसमें उच्च-स्तरीय सरकारी व व्यावसायिक प्रतिनिधिमंडल भी सम्मिलित है।
वडोदरा में स्वागत और औद्योगिक दौरा
हवाई अड्डे पर गुजरात के राज्य मंत्री प्रफुल्लभाई पानशेरिया और अन्य वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों ने शाही जोड़े की अगवानी की। इसके बाद उनका काफिला मंजूसर स्थित एक कंपनी के दौरे के लिए रवाना हुआ, जो भारत-लिकटेंस्टीन औद्योगिक सहयोग की संभावनाओं को रेखांकित करता है। विदेश मंत्रालय ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'भारत में आपका हार्दिक स्वागत है! लिकटेंस्टीन के राजकुमार एलोइस भारत की राजकीय यात्रा पर मुंबई पहुंचे। महाराष्ट्र सरकार के प्रोटोकॉल मंत्री जयकुमार रावल ने उनका स्वागत किया। भारत और लिकटेंस्टीन के बीच साझा मूल्यों पर आधारित मधुर और सौहार्दपूर्ण संबंध हैं।'
राजनयिक कार्यक्रम और मुख्य बैठकें
मंगलवार, 27 अक्टूबर को राष्ट्रपति भवन में प्रिंस एलोइस का औपचारिक स्वागत समारोह आयोजित किया जाएगा। विदेश मंत्रालय के अनुसार, उसी दिन हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी द्विपक्षीय वार्ता होगी, जिसमें व्यापार और निवेश, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार, तथा लोगों के बीच आपसी आदान-प्रदान पर चर्चा होगी। क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचार-विमर्श अपेक्षित है।
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर भी प्रिंस एलोइस से मुलाकात करेंगे। राजकुमार राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू उनके सम्मान में एक आधिकारिक भोज (बैंक्वेट) का आयोजन करेंगी।
आर्थिक एजेंडा और मंत्री स्तरीय वार्ता
यात्रा के दौरान गुरुवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री जयंत चौधरी प्रिंस एलोइस से मुलाकात करेंगे। यह मंत्री-स्तरीय संवाद संकेत देता है कि दोनों देश द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग को एक नई दिशा देने के इच्छुक हैं।
भारत-लिकटेंस्टीन संबंधों का संदर्भ
गौरतलब है कि प्रिंस एलोइस की 2026 में यह भारत की दूसरी यात्रा है। इससे पहले फरवरी 2026 में वे 'AI इम्पैक्ट समिट' में भाग लेने के लिए नई दिल्ली आए थे। इसके अलावा वे 2010 और 2018 में भी भारत आ चुके हैं। यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी वैश्विक राजनयिक और आर्थिक साझेदारियों को व्यापक बनाने में सक्रिय है, और यूरोप के छोटे लेकिन उच्च-तकनीकी देशों के साथ संबंध मज़बूत करना इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। लिकटेंस्टीन अपनी वित्तीय सेवाओं, उच्च-परिशुद्धता विनिर्माण और नवाचार-केंद्रित अर्थव्यवस्था के लिए जाना जाता है।
आगे क्या होगा
प्रिंस एलोइस की यात्रा के दौरान भारत और लिकटेंस्टीन के बीच औपचारिक समझौतों या संयुक्त वक्तव्य जारी होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। प्रधानमंत्री मोदी के साथ बैठक के परिणाम, विशेषकर व्यापार और प्रौद्योगिकी सहयोग के क्षेत्र में, आने वाले दिनों में स्पष्ट होंगे।